एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस बना गंभीर खतरा, संक्रमण होने पर बढ़ रहा मौत और इलाज का खर्च

एंटीबायोटिक दवाओं के खिलाफ बैक्टीरिया में बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता भारत के लिए गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की एक नई स्टडी में सामने आया है कि ड्रग-रेजिस्टेंट बैक्टीरियल इंफेक्शन से मरीजों में मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे मरीजों को अस्पताल में अधिक समय तक भर्ती रहना पड़ता है और इलाज का खर्च भी बढ़ जाता है।
डेढ़ लाख से ज्यादा मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण
यह शोध 2022 से 2025 के बीच अस्पतालों में भर्ती मरीजों के आंकड़ों पर आधारित है। अध्ययन में करीब 1.6 लाख मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिनमें 26,213 मरीजों में चार प्रमुख ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया पाए गए। इनमें ई. कोलाई, क्लेबसिएला निमोनिया, एसीनेटोबैक्टर बॉमानी और स्यूडोमोनास एरुजिनोसा शामिल हैं।
61 प्रतिशत से ज्यादा संक्रमण कार्बापेनेम-रेजिस्टेंट
अध्ययन के मुताबिक इन संक्रमणों में 61.1 प्रतिशत मामले कार्बापेनेम-रेजिस्टेंट पाए गए। कार्बापेनेम एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल गंभीर बैक्टीरियल संक्रमणों के इलाज में किया जाता है। इन दवाओं के खिलाफ प्रतिरोध बढ़ने से गंभीर संक्रमणों का प्रभावी इलाज करना डॉक्टरों के लिए चुनौती बन रहा है।
ड्रग-रेजिस्टेंट संक्रमण में मृत्यु दर ज्यादा
अध्ययन में दवा-रोधी और दवा के प्रति संवेदनशील संक्रमण वाले मरीजों की मृत्यु दर की तुलना की गई। क्लेबसिएला निमोनिया के ड्रग-रेजिस्टेंट संक्रमण में मृत्यु दर 31.2 प्रतिशत रही, जबकि संवेदनशील संक्रमण में यह 23.5 प्रतिशत थी। इसी तरह ई. कोलाई के रेजिस्टेंट संक्रमण में मृत्यु दर 24.4 प्रतिशत रही, जबकि संवेदनशील संक्रमण में यह 17.3 प्रतिशत थी।
इलाज का खर्च भी बढ़ा
ड्रग-रेजिस्टेंट संक्रमण का असर मरीजों के इलाज के खर्च पर भी पड़ता है। अध्ययन के अनुसार ऐसे मामलों में एंटीबायोटिक इलाज की लागत संवेदनशील संक्रमणों की तुलना में करीब 1.1 से 2 गुना तक अधिक रही।
ई. कोलाई संक्रमण में औसत खर्च करीब 420 डॉलर रहा, जबकि संवेदनशील संक्रमण में यह 211 डॉलर था। एसीनेटोबैक्टर बॉमानी में रेजिस्टेंट संक्रमण का औसत खर्च 655 डॉलर और संवेदनशील संक्रमण का 436 डॉलर रहा। स्यूडोमोनास एरुजिनोसा में यह खर्च क्रमशः 702 और 510 डॉलर रहा।
एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल बढ़ा रहा समस्या
विशेषज्ञों के मुताबिक एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस अब भविष्य की नहीं, बल्कि वर्तमान की गंभीर समस्या है। संक्रमण की रोकथाम, समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटीबायोटिक का इस्तेमाल इस चुनौती से निपटने के अहम उपाय हैं। बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेना या डॉक्टर की सलाह के बिना दवा का कोर्स बीच में छोड़ देना रेजिस्टेंस बढ़ने का कारण बन सकता है।



