ऑनलाइन अटेंडेंस से नाराज शिक्षिका ने सरकार को दी चुनौती, कलेक्टर-CM तक की ऑनलाइन उपस्थिति की मांग; वीडियो वायरल

जांजगीर-चांपा। स्कूलों में शिक्षकों की ऑनलाइन अटेंडेंस को लेकर नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। जांजगीर-चांपा जिले की एक शिक्षिका का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था को लेकर सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाती नजर आ रही हैं। शिक्षिका ने न केवल ऑनलाइन अटेंडेंस की व्यवस्था पर नाराजगी जताई, बल्कि कलेक्टर और मुख्यमंत्री समेत सभी अधिकारी-कर्मचारियों की उपस्थिति भी ऑनलाइन दर्ज कराने की मांग कर डाली।
वायरल वीडियो में शिक्षिका खुद को ड्यूटी पर बताते हुए अपनी बात रख रही हैं। जानकारी के मुताबिक, यह वीडियो 29 अगस्त को सुबह करीब 10 बजकर 58 मिनट पर बनाया गया था। वीडियो में शिक्षिका ने कहा कि शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए शासन ने स्कूलों में ऐप के माध्यम से अटेंडेंस इन और अटेंडेंस आउट की व्यवस्था लागू की है।
ऑनलाइन अटेंडेंस को लेकर जताई नाराजगी
शिक्षिका निर्मला कोमल का कहना है कि समय पर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने के लिए शिक्षक-शिक्षिकाओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनका आरोप है कि निर्धारित समय पर स्कूल पहुंचने की कोशिश में कई शिक्षक मुश्किल परिस्थितियों से गुजरते हैं और कई बार हादसों का भी सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि शिक्षकों की उपस्थिति पर ऐप के जरिए लगातार निगरानी रखने के बजाय सरकार को व्यवस्था की दूसरी समस्याओं पर भी ध्यान देना चाहिए। शिक्षिका ने कहा कि शिक्षक अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह निभा रहे हैं और उन पर इस तरह की निगरानी की जरूरत नहीं है।
‘सिर्फ शिक्षकों की ही ऑनलाइन अटेंडेंस क्यों?’
वीडियो में शिक्षिका ने ऑनलाइन अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि अगर शिक्षकों की उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज कराई जा रही है, तो यही व्यवस्था सभी सरकारी विभागों में लागू होनी चाहिए।
उन्होंने कलेक्टर और मुख्यमंत्री तक की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने की मांग रखी। उनका कहना है कि जिस तरह शिक्षकों के आने-जाने का समय डिजिटल माध्यम से दर्ज किया जा रहा है, उसी तरह सभी अधिकारी-कर्मचारियों की उपस्थिति भी सार्वजनिक और ऑनलाइन होनी चाहिए।
इतना ही नहीं, शिक्षिका ने मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों की मॉनिटरिंग को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने अपील की कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों और गतिविधियों को भी जनता की निगरानी के लिए सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
‘शिक्षकों पर नजर रखना छोड़ें, दूसरे विभागों पर ध्यान दें’
शिक्षिका निर्मला कोमल ने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षकों पर ऐप के माध्यम से निगरानी करना बंद किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, शिक्षक अपना काम जिम्मेदारी से कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से दूसरे विभागों की कार्यप्रणाली पर भी ध्यान देने की अपील की।
उन्होंने सड़क पर घूमने वाले मवेशियों की समस्या का मुद्दा भी उठाया और कहा कि सरकार को सड़कों से मवेशियों को हटाने जैसी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। उनके बयान में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नाराजगी साफ नजर आई।
‘जो बोल रही हूं, उससे डरूंगी नहीं’
वीडियो के अंत में शिक्षिका ने अपने तेवर और भी तीखे कर दिए। उन्होंने कहा कि वह जो बोल रही हैं, उससे डरने वाली नहीं हैं। उन्होंने सरकार को व्यवस्था सुधारने की नसीहत देते हुए राजनीतिक तौर पर भी कड़ा संदेश दिया।
शिक्षिका ने कहा कि अगर व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले चुनाव में जनता सरकार को सत्ता से बाहर करने का फैसला कर सकती है। उनके इस बयान के बाद वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया है।
फिलहाल शिक्षिका के वायरल वीडियो को लेकर शिक्षा विभाग या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। हालांकि, ऑनलाइन अटेंडेंस को लेकर शिक्षकों के बीच चल रही बहस के बीच इस वीडियो ने एक बार फिर डिजिटल उपस्थिति व्यवस्था और सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।



