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मलेशिया में चमका बस्तर का युवा, अनुभव शोरी को मिला ‘आदिवासी युवा बदलाव दूत’ सम्मान-2026

बस्तर-बस्तर के युवा अनुभव शोरी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है। मलेशिया में आयोजित छठे अंतरराष्ट्रीय आदिवासी युवा सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अनुभव शोरी को प्रतिष्ठित ‘आदिवासी युवा बदलाव दूत सम्मान-2026’ के लिए चुना गया है। यह सम्मान आदिवासी समुदायों के बीच सामाजिक बदलाव, अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए उल्लेखनीय काम करने वाले युवाओं को दिया जा रहा है।

मलेशिया में बस्तर के युवा का सम्मान, अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान

मलेशिया में 29 अगस्त से 2 सितंबर तक छठे अंतरराष्ट्रीय आदिवासी युवा सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में एशिया के 12 देशों से आदिवासी युवा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। अलग-अलग देशों से पहुंचे युवाओं ने अपने समुदायों की चुनौतियों, अधिकारों, संस्कृति, प्राकृतिक संसाधनों और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर विचार साझा किए।

इसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने समुदाय और क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले छह युवाओं को ‘आदिवासी युवा बदलाव दूत सम्मान-2026’ के लिए चुना गया। भारत की ओर से इस सम्मान के लिए बस्तर के अनुभव शोरी का चयन किया गया है।

अनुभव शोरी का चयन बस्तर और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए इसलिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने आदिवासी समुदायों से जुड़े जमीनी मुद्दों पर लगातार काम किया है और इन्हीं मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का अवसर उन्हें मिला।

जल-जंगल-जमीन और आदिवासी अधिकारों के लिए लगातार काम

अनुभव शोरी लंबे समय से आदिवासी समुदायों के अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर काम कर रहे हैं। उनका मुख्य फोकस जल-जंगल-जमीन, सामुदायिक वन अधिकार, वनाधिकार कानून और ग्राम सभाओं को मजबूत करने जैसे विषयों पर रहा है।

बस्तर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में लोगों को अपने कानूनी अधिकारों और सरकारी व्यवस्थाओं की जानकारी देना एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में अनुभव ने समुदायों के बीच पहुंचकर लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया।

उनके काम में स्थानीय समुदायों की भागीदारी को खास महत्व दिया गया है। उनका मानना है कि आदिवासी क्षेत्रों में विकास की योजनाओं के साथ-साथ वहां के लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। खासकर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका अहम होती है।

गांव-गांव तक पहुंचाई अधिकारों की जानकारी

आदिवासी क्षेत्रों में वनाधिकार कानून, ग्राम सभा की भूमिका और सामुदायिक वन संसाधनों जैसे विषय आम लोगों के लिए कई बार जटिल होते हैं। अनुभव शोरी ने इन मुद्दों को समुदायों के बीच सरल तरीके से समझाने और लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने की दिशा में काम किया।

उनके प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा समुदाय आधारित पहल से जुड़ा रहा है। इसमें लोगों को अपने अधिकारों को समझने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में अपनी भूमिका को पहचानने के लिए प्रेरित करना शामिल रहा है।

इसी वजह से उनका काम केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे समुदाय के साथ मिलकर किए गए प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

12 देशों के युवाओं के बीच भारत का प्रतिनिधित्व

मलेशिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में एशिया के 12 देशों से आदिवासी युवा प्रतिनिधि शामिल हुए। सम्मेलन में आदिवासी समुदायों के अधिकार, संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

इस दौरान अलग-अलग देशों के युवाओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे काम और सामने आने वाली चुनौतियों को साझा किया। ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की ओर से अनुभव शोरी का प्रतिनिधित्व करना बस्तर के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

खास बात यह है कि जिन छह युवाओं का चयन ‘आदिवासी युवा बदलाव दूत सम्मान-2026’ के लिए किया गया, उनमें भारत से अनुभव शोरी शामिल हैं।

अनुभव ने सम्मान को बताया सामूहिक उपलब्धि

सम्मान के लिए चयनित होने के बाद अनुभव शोरी ने इसे अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय बस्तर और आदिवासी समुदायों के सामूहिक प्रयासों का सम्मान बताया।

उनका कहना है कि इस उपलब्धि में उन समुदायों, ग्राम सभाओं, बुजुर्गों, युवाओं और साथियों की भूमिका है, जो लगातार जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के आदिवासी युवाओं की आवाज रखने का अवसर अनुभव के लिए महत्वपूर्ण रहा। उनका मानना है कि ऐसे मंचों के जरिए आदिवासी समुदायों से जुड़े स्थानीय मुद्दों को वैश्विक स्तर पर सामने रखने का मौका मिलता है।

बस्तर के युवाओं के लिए बनी प्रेरणा की कहानी

अनुभव शोरी को मिला यह सम्मान केवल एक युवा की उपलब्धि नहीं है, बल्कि बस्तर के दूसरे युवाओं के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बन सकता है।

बस्तर की पहचान उसकी समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी रही है। ऐसे में इसी क्षेत्र से आने वाले किसी युवा का अंतरराष्ट्रीय मंच पर आदिवासी अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े काम के लिए पहचान हासिल करना महत्वपूर्ण है।

यह उपलब्धि युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपराओं के साथ-साथ समुदाय के अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए आगे आने का संदेश भी देती है।

अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची बस्तर की आवाज

मलेशिया में अनुभव शोरी का चयन यह दिखाता है कि बस्तर के स्थानीय मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की भी संभावनाएं हैं। जल-जंगल-जमीन, वनाधिकार और आदिवासी समुदायों की भागीदारी जैसे मुद्दे केवल स्थानीय विषय नहीं हैं, बल्कि दुनिया के कई आदिवासी समुदायों से जुड़े हुए हैं।

अंतरराष्ट्रीय आदिवासी युवा सम्मेलन में अलग-अलग देशों के युवाओं के बीच विचारों का आदान-प्रदान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा सकता है।

अनुभव शोरी ने इस सम्मान को समुदाय के सामूहिक प्रयासों को समर्पित करते हुए भविष्य में भी आदिवासी युवाओं और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर काम जारी रखने की बात कही है।

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Shruti Jangde

With over 6 years of experience in the media industry, I specialize in news anchoring, copywriting, and digital journalism. I cover a wide range of news, delivering accurate, unbiased, and fact-based reporting. Passionate about bringing the truth to the public, I am committed to ethical journalism and credible storytelling. My goal is to inform, inspire, and make a meaningful impact through responsible reporting.

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