भारत ने सऊदी अरब पर हूती हमलों की निंदा की, पाकिस्तान ने दिया हरसंभव समर्थन का भरोसा

सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हालिया हमलों को लेकर भारत और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया सामने आई है। भारत ने हमलों को अस्वीकार्य बताते हुए क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया है। वहीं, पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए हरसंभव सहयोग देने की बात कही है।
सऊदी अरब पर हमलों को भारत ने बताया अस्वीकार्य
हूती विद्रोहियों ने खमीस मुशायत, आभा और ताइफ जैसे सऊदी शहरों को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया। इन हमलों में कई नागरिकों के घायल होने और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सऊदी अरब के संप्रभु क्षेत्रों, नागरिकों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की निंदा की। उन्होंने मक्का शहर पर हमले की कोशिश पर भी चिंता जताई।
क्षेत्रीय सुरक्षा और जलमार्ग को खतरा
रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस तरह के हमले क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करते हैं। साथ ही, ये लाल सागर से जुड़े महत्वपूर्ण बाब-अल-मंदेब जलमार्ग में जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही के लिए खतरा पैदा करते हैं। भारत ने क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता बहाल होने की उम्मीद जताई।
पाकिस्तान ने सऊदी अरब के समर्थन का किया ऐलान
पाकिस्तान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा कि सऊदी अरब की सुरक्षा के प्रति इस्लामाबाद की प्रतिबद्धता बिना किसी शर्त के है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा कि पाकिस्तान कूटनीतिक और भौतिक, दोनों स्तरों पर सऊदी अरब के साथ खड़ा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान सऊदी अरब की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
संयुक्त रक्षा समझौते से बढ़ी अहमियत
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने पिछले महीने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के अनुसार, तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला सभी देशों पर हमला माना जाएगा। ऐसे में पाकिस्तान की ओर से दिया गया समर्थन का बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सऊदी अरब और हूतियों के बीच बढ़ता तनाव
सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। हाल के दिनों में सऊदी ठिकानों, तेल प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं से पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और लाल सागर के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।



