एशियन गेम्स 2026: ई-कचरे से तैयार हुआ मेडल, जापानी डिजाइनर ने दिया खास रूप; जानें इसकी 5 विशेषताएं

जापान के आइची-नागोया में आयोजित होने वाले 20वें एशियन गेम्स 2026 के मेडल अपनी अनोखी डिजाइन और पर्यावरण के प्रति जागरूकता के कारण चर्चा में हैं। इन मेडल्स को एक राष्ट्रीय डिजाइन प्रतियोगिता के जरिए चुना गया है। जापानी डिजाइनर डाइसुके शीबा ने इनका डिजाइन तैयार किया है, जो ‘इमेजिन वन एशिया’ और ‘विविधता में एकता’ की थीम पर आधारित है।
मेडल के डिजाइन के पीछे की सोच
डाइसुके शीबा ने मेडल तैयार करने के लिए एक अनोखी प्रक्रिया अपनाई। उन्होंने कई सिरेमिक डिस्क को तोड़कर उनके टुकड़ों को जोड़ने की प्रक्रिया का अध्ययन किया। उनके अनुसार, खिलाड़ियों की सफलता असफलताओं, चोटों, संघर्ष और मेहनत से बने अनुभवों का परिणाम होती है।
मेडल का डिजाइन इन बिखरे हुए पलों के एक साथ जुड़ने का प्रतीक है। इसके जरिए एशिया की अलग-अलग संस्कृतियों और भाषाओं के खिलाड़ियों के एक मंच पर आने को दर्शाया गया है।
एशियन गेम्स 2026 के मेडल की 5 खासियतें
- पुनर्चक्रित ई-कचरे का इस्तेमाल: मेडल तैयार करने के लिए जापान के नगर निगमों द्वारा एकत्र किए गए पुराने और छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से धातु निकाली गई है। इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना है।
- काकित्सुबाता फूल से प्रेरित रिबन: मेडल के रिबन पर आइची प्रांत के आधिकारिक फूल काकित्सुबाता का सिल्हूट बनाया गया है। इसके घुमावदार पैटर्न खिलाड़ियों के लचीलेपन और शक्ति को दर्शाते हैं।
- हिनोकी लकड़ी का बॉक्स: मेडल रखने के लिए तैयार किया गया बॉक्स आइची की प्रसिद्ध हिनोकी लकड़ी से बनाया गया है। इसका डिजाइन जापान की पारंपरिक चाय संस्कृति से प्रेरित है।
- मेडल का आकार: सभी मेडल गोलाकार हैं। इनका व्यास 8 सेंटीमीटर और मोटाई 5 मिलीमीटर रखी गई है।
- मेडल का वजन और धातु: स्वर्ण पदक का वजन लगभग 265 ग्राम है। इसमें शुद्ध चांदी पर कम से कम 1 ग्राम सोने की परत चढ़ाई गई है। रजत पदक का वजन करीब 264 ग्राम है और यह शुद्ध चांदी से बना है। कांस्य पदक का वजन लगभग 222 ग्राम है, जिसमें 95 प्रतिशत तांबा और 5 प्रतिशत जिंक का इस्तेमाल किया गया है।



