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ChhattisgarhRaipur

स्कूल फीस के अलावा 1500 रुपए और! आत्मानंद स्कूलों में कॉशन मनी-विकास शुल्क पर सवाल

DEO बोले- पर्सनल अकाउंट में पैसे लेना गलत

रायपुर-छत्तीसगढ़ के स्वामी आत्मानंद स्कूलों में विद्यार्थियों से स्कूल फीस के अलावा अतिरिक्त राशि लिए जाने का मामला सामने आया है। कुछ स्कूलों में कॉशन मनी और स्कूल विकास शुल्क के नाम पर विद्यार्थियों से करीब 1000 से 1500 रुपए तक लिए जाने की बात सामने आई है। इस मामले को लेकर अभिभावकों ने सवाल उठाए हैं। अभिभावकों का आरोप है कि अतिरिक्त राशि जमा कराने के लिए कुछ विद्यार्थियों को स्कैनर या QR कोड भेजे गए और शिक्षकों के निजी बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने को कहा गया।

मामले में सबसे अहम बात यह है कि रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षकों के निजी बैंक खातों में स्कूल शुल्क के नाम पर राशि मंगाने को गलत बताया है। DEO ने कहा है कि यदि ऐसा मामला सामने आता है तो कार्रवाई की जाएगी।

आत्मानंद स्कूलों में अतिरिक्त शुल्क को लेकर विवाद

छत्तीसगढ़ में संचालित स्वामी आत्मानंद स्कूलों को बेहतर शिक्षा और सुविधाओं के लिए जाना जाता है। इन स्कूलों में विद्यार्थियों से निर्धारित शुल्क के अलावा अतिरिक्त राशि लिए जाने की बात सामने आने के बाद अब व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

अभिभावकों का आरोप है कि कुछ स्कूलों में कॉशन मनी और स्कूल विकास शुल्क के नाम पर अतिरिक्त पैसे मांगे जा रहे हैं। यह राशि अलग-अलग स्कूलों में अलग हो सकती है और कुछ मामलों में करीब 1500 रुपए तक राशि लिए जाने की बात कही जा रही है।

अभिभावकों का यह भी आरोप है कि अतिरिक्त राशि जमा नहीं करने वाले विद्यार्थियों से जल्द पैसा जमा करने को कहा जा रहा है। कुछ अभिभावकों के मुताबिक उन्हें यह भी बताया गया कि राशि जमा नहीं करने पर आगे परेशानी हो सकती है।

स्कूल विकास समिति की बैठक का हवाला

अतिरिक्त शुल्क को लेकर स्कूल प्रबंधन की ओर से अलग तर्क दिया गया है। प्रबंधन का कहना है कि स्कूल विकास शुल्क लेने का निर्णय स्कूल विकास समिति की बैठक में लिया गया है।

रायपुर के पं. आरडी तिवारी शासकीय अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय, आमापारा के स्कूल विकास समिति के सचिव एवं प्राचार्य राकेश गुप्ता के अनुसार, समिति की बैठक में शुल्क लेने की स्वीकृति दी गई थी। बैठक में समिति के सदस्यों के हस्ताक्षर होने की बात भी कही गई है।

प्राचार्य के मुताबिक, स्कूल में प्रति विद्यार्थी करीब 1000 रुपए लेने का निर्णय किया गया है। प्रबंधन का तर्क है कि शासन से मिलने वाली राशि से स्कूल के रोजमर्रा के सभी जरूरी खर्च पूरे नहीं हो पाते। बिजली बिल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए अतिरिक्त राशि की जरूरत पड़ती है।

हालांकि, अभिभावक इस व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि यह शासन की ओर से निर्धारित स्कूल फीस नहीं है तो विद्यार्थियों से यह राशि किस नियम या प्रावधान के तहत ली जा रही है।

निजी बैंक अकाउंट में पैसे लेने का आरोप

मामले का सबसे संवेदनशील पहलू शिक्षकों के निजी बैंक खातों में राशि जमा कराने का आरोप है।

अभिभावकों का दावा है कि कुछ शिक्षकों की ओर से विद्यार्थियों को स्कैनर या QR कोड भेजे गए और उसी के जरिए राशि शिक्षकों के व्यक्तिगत बैंक खातों में ट्रांसफर करने को कहा गया।

बताया जा रहा है कि शिक्षकों की ओर से कथित तौर पर यह कहा गया कि राशि प्राचार्य के निर्देश पर ली जा रही है और बाद में स्कूल के लिए ट्रांसफर कर दी जाएगी।

हालांकि, किसी शिक्षक के निजी खाते में स्कूल के नाम पर राशि जमा कराने की व्यवस्था को लेकर अब सवाल खड़े हो गए हैं।

शिक्षा विभाग ने क्या कहा?

लोक शिक्षण संचालनालय के एक अधिकारी के अनुसार, स्वामी आत्मानंद स्कूलों के लिए 5 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। इसमें से फिलहाल ढाई लाख रुपए जारी किए जाने की जानकारी दी गई है, जबकि शेष ढाई लाख रुपए भी जल्द जारी किए जाने की बात कही गई है।

अधिकारी के अनुसार, स्कूल शासन की ओर से निर्धारित प्रवेश शुल्क के अलावा विद्यार्थियों से कोई अन्य शुल्क नहीं ले सकते। वहीं कॉशन मनी और स्कूल विकास शुल्क के संबंध में विभागीय स्तर पर कोई अलग प्रावधान नहीं होने की बात कही गई है।

यही वजह है कि अतिरिक्त शुल्क लिए जाने को लेकर अब स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग के नियमों के बीच स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

DEO बोले- पर्सनल अकाउंट में पैसा लेना गलत

रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी एमजी सतीश कुमार ने कहा कि स्कूल विकास समिति के निर्णय के बाद आवश्यकता होने पर शुल्क लिए जाने का मामला समिति के स्तर पर देखा जा सकता है।

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी शिक्षक के निजी बैंक खाते में राशि मंगाना गलत है।

DEO के मुताबिक, इस संबंध में फिलहाल उनके पास कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। लेकिन यदि ऐसा मामला सामने आता है तो इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

अभिभावकों ने उठाए ये सवाल

अतिरिक्त शुल्क को लेकर अभिभावकों के सामने कई सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि राशि सरकारी फीस का हिस्सा नहीं है तो इसे किस प्रावधान के तहत विद्यार्थियों से लिया जा रहा है।

दूसरा सवाल भुगतान की प्रक्रिया को लेकर है। यदि स्कूल के विकास या अन्य आवश्यक खर्चों के लिए राशि ली जा रही है तो उसका भुगतान स्कूल के आधिकारिक खाते में क्यों नहीं कराया जा रहा?

अभिभावकों का यह भी कहना है कि स्कूल प्रबंधन से शुल्क लेने संबंधी आधिकारिक आदेश या पत्र मांगे जाने के बावजूद उन्हें स्पष्ट दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया।

फिलहाल इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग की ओर से जांच या शिकायत के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

क्या है आगे की स्थिति?

स्वामी आत्मानंद स्कूलों में अतिरिक्त शुल्क को लेकर सामने आए इस मामले ने स्कूल प्रबंधन, स्कूल विकास समिति, अभिभावकों और शिक्षा विभाग के बीच शुल्क व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

एक तरफ स्कूल प्रबंधन स्कूल विकास समिति के निर्णय और स्कूल की आवश्यकताओं का हवाला दे रहा है, वहीं दूसरी ओर विभागीय अधिकारी निर्धारित प्रवेश शुल्क के अलावा अतिरिक्त शुल्क को लेकर अलग स्थिति बता रहे हैं।

सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा शिक्षकों के निजी बैंक खातों में राशि जमा कराने का है, जिसे रायपुर DEO ने गलत बताया है।

अब देखना होगा कि यदि इस मामले में औपचारिक शिकायत सामने आती है तो शिक्षा विभाग की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और अतिरिक्त राशि वसूली को लेकर क्या कार्रवाई की जाती है।

फिलहाल अभिभावकों और विद्यार्थियों की नजर शिक्षा विभाग के अगले कदम पर है।

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Shruti Jangde

With over 6 years of experience in the media industry, I specialize in news anchoring, copywriting, and digital journalism. I cover a wide range of news, delivering accurate, unbiased, and fact-based reporting. Passionate about bringing the truth to the public, I am committed to ethical journalism and credible storytelling. My goal is to inform, inspire, and make a meaningful impact through responsible reporting.

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