महानदी जल विवाद के समाधान की दिशा में बड़ी पहल, अमित शाह की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़-ओडिशा के मुख्यमंत्रियों की बैठक

रायपुर। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद के समाधान की दिशा में गुरुवार को नई दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक हुई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने महानदी जल बंटवारे और उससे जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल समेत दोनों राज्यों और केंद्रीय जल आयोग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
बैठक का उद्देश्य दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से लंबित विवाद का आपसी सहमति और तकनीकी विमर्श के जरिए समाधान तलाशना रहा। इससे पहले 30 जुलाई को भी केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक हुई थी, जिसमें सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए बातचीत आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया था।
महानदी दोनों राज्यों को जोड़ने वाली नदी : CM साय
बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ का पक्ष रखते हुए कहा कि महानदी केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि दोनों राज्यों की सभ्यता, संस्कृति, कृषि और जनजीवन से जुड़ी जीवनधारा है। उन्होंने कहा कि महानदी को दोनों राज्यों के बीच विवाद की वजह के बजाय सहयोग और विकास का माध्यम बनाया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ न्यायपूर्ण, निष्पक्ष, वैज्ञानिक, पारदर्शी और दीर्घकालिक समाधान का पक्षधर है। ऐसा समाधान तैयार होना चाहिए, जिसमें दोनों राज्यों के किसानों, आम नागरिकों और आने वाली पीढ़ियों के हितों का ध्यान रखा जाए।
साय ने कहा कि महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ में होता है और इसके जलग्रहण क्षेत्र का बड़ा हिस्सा राज्य में है। कृषि, सिंचाई, पेयजल और ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की विकास आवश्यकताएं महानदी से जुड़ी हैं। इसलिए स्थायी समाधान में छत्तीसगढ़ की इन आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
ओडिशा के हितों का भी सम्मान : साय
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपने हितों की बात करते हुए ओडिशा की जरूरतों और हितों का भी पूरा सम्मान करता है। उन्होंने हीराकुंड जलाशय को ओडिशा की महत्वपूर्ण जीवनरेखा बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ उसके महत्व को समझता है और जलाशय के सुचारू संचालन के लिए सहयोग की भावना से आगे बढ़ने को तैयार है।
साय ने जल उपलब्धता, आवश्यकता और उपयोग से संबंधित आंकड़ों को पारदर्शी तरीके से साझा करने तथा वैज्ञानिक आधार पर निर्णय लेने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
केंद्रीय मध्यस्थता से समाधान की उम्मीद
मुख्यमंत्री साय ने महानदी जल विवाद के समाधान के लिए केंद्र सरकार की पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि केंद्र की मध्यस्थता में दोनों राज्यों के बीच सकारात्मक संवाद से आपसी सहमति का रास्ता मजबूत हुआ है।
उन्होंने कहा कि जल जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन को साझा समृद्धि का माध्यम बनाया जाना चाहिए। तकनीकी स्तर पर केंद्रीय जल आयोग के आकलन और राजनीतिक स्तर पर निरंतर संवाद के जरिए ऐसा समाधान तलाशा जा सकता है, जो दोनों राज्यों के लिए स्वीकार्य हो।
वर्षों से लंबित है महानदी जल विवाद
महानदी जल बंटवारे का विवाद कई वर्षों से लंबित है। ओडिशा ने 2016 में केंद्र के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद केंद्र सरकार ने 12 मार्च 2018 को महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया। मामला फिलहाल न्यायाधिकरण के समक्ष विचाराधीन है।
हाल के महीनों में केंद्र की पहल पर दोनों राज्यों के बीच बातचीत और तकनीकी स्तर पर विचार-विमर्श तेज हुआ है। 20 सितंबर को भी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के बीच भुवनेश्वर में बैठक हुई थी। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने को लेकर सकारात्मक संकेत दिए गए थे।
बैठक में दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों, केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में आगे की प्रक्रिया और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की गई।


