‘सुशासन’ का ‘बुलडोजर’ अवतार: जहां गरीबों के आशियाने उजाड़कर खड़ी होगी ‘विधायक कॉलोनी’!
नकटी गांव में 'विष्णुदेव सरकार' का बुलडोजर गरजा।

रायपुर। जब सत्ता की हनक और रसूखदारों के ‘विश्राम’ का इंतजाम करना हो, तो फिर गरीबों की ‘छत’ की हैसियत ही क्या रह जाती है? छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सटे नवा रायपुर के नकटी गांव में हाल ही में जो कुछ हुआ, उसने सुशासन के दावों की कलई खोलकर रख दी है। भीषण गर्मी और बदलते मौसम के बीच, जब सरकार को जनता को राहत देनी चाहिए थी, तब नवा रायपुर के नकटी गांव में ‘विष्णुदेव सरकार’ का बुलडोजर गरजा।
एक या दो नहीं, बल्कि 75 से ज्यादा उन आशियानों को देखते ही देखते मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया गया, जिन्हें बड़ी मिन्नत और सालों की जमापूंजी से गरीबों ने खड़ा किया था। सबसे बड़ी विडंबना देखिए—इन टूटे हुए मकानों में खुद सरकारी योजनाओं यानी प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) और इंदिरा आवास योजना के तहत बने वैध घर भी शामिल थे। यानी जिस मकान पर सरकारी मुहर थी, उसे ही सरकार ने रातों-रात ‘अवैध अतिक्रमण’ घोषित कर दिया।
एक हजार से ज्यादा पुलिस बल का पहरा
प्रशासन का यह ‘कल्याणकारी एक्शन’ किसी सुनियोजित सैन्य ऑपरेशन से कम नहीं था। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं दिया गया। देर रात चुपचाप नोटिस चसपा किए गए और सुबह तड़के करीब 1,000 से अधिक हथियारों से लैस पुलिस कर्मियों, वज्र वाहनों और 20 से अधिक जेसीबी मशीनों की फौज गांव में दाखिल हो गई। पूरा नकटी गांव पल भर में पुलिस छावनी में बदल गया।
जब अपने आशियानों को टूटते देख बेबस ग्रामीण और महिलाएं रोते-बिलखते जेसीबी मशीनों के सामने लेट गए, तो उनके साथ धक्का-मुक्की की गई। हल्के बल प्रयोग के साए में कंक्रीट के साथ-साथ गरीबों के अरमान भी ढहते चले गए।
महतारियों के मुंह से निकलीं बद्दुआएं
छत्तीसगढ़ में बीजेपी सरकार ‘महतारी वंदन योजना’ के तहत महिलाओं के सम्मान का ढिंढोरा पीटती है, लेकिन नकटी गांव की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही थी। मलबे के ढेर पर बैठी गांव की बुजुर्ग महिलाओं और महतारियों की आंखों में आंसू थे और जुबान पर सरकार के खिलाफ तीखा आक्रोश। माताओं के मुंह से सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के लिए तीखी बद्दुआएं निकल रही थीं।
ग्रामीणों का सबसे ज्यादा गुस्सा क्षेत्रीय (धरसीवां) विधायक अनुज शर्मा के खिलाफ देखने को मिला। ग्रामीणों ने कहा:
“चुनाव के समय जो नेता छोटे-छोटे ब्याह-शादियों में आकर हाथ जोड़ते थे, वे आज हमारे आशियाने उजड़ने पर हाल चाल जानने तक नहीं आए। गरीबों को बेघर करके यहां ‘विधायक कॉलोनी’ बनाने की तैयारी है। क्या विधायकों के रहने के लिए नया रायपुर में जमीन कम पड़ गई थी, जो हमारे पुरखों की जमीन छीन ली गई?”
“अन्याय नहीं होगा…” का राग
इस पूरे महासंग्राम और चौतरफा घिरने के बाद सिनेस्टार से राजनेता बने विधायक अनुज शर्मा का बयान भी किसी फिल्मी डायलॉग से कम नहीं लगा। उन्होंने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि “विष्णुदेव सुशासन की सरकार है, किसी भी जरूरतमंद के साथ अन्याय नहीं होगा। सभी प्रभावितों को नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस (EWS) आवासों में विस्थापित और पुनर्वासित किया जा रहा है।”
अब सवाल यह उठता है कि अगर किसी के पक्के घर को तोड़कर उसे किसी दूरदराज के टेंपरेरी फ्लैट या सरकारी ब्लॉक में शिफ्ट होने पर मजबूर किया जाए, तो क्या इसे ‘सुशासन’ और ‘न्याय’ कहा जाएगा? जिस जमीन को ग्रामीण अपने दादा-परदादा के जमाने का बता रहे हैं, उसे ‘अतिक्रमण’ बताकर ढहा देना कहां का न्याय है?
जगह छोड़ने को तैयार नहीं ग्रामीण
प्रशासन भले ही दावा कर रहा हो कि उन्होंने पुनर्वास की पर्चियां बांट दी हैं, लेकिन नकटी गांव के लोग अपनी मिट्टी और पुरखों की जमीन छोड़ने की जिद पर अड़े हुए हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि सरकार उन्हें उनके हक से बेदखल कर रही है।
इस पूरी कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार ‘बुलडोजर संस्कृति’ की राह पर चलती है, तो सबसे पहले उसकी चपेट में देश का गरीब और शोषित वर्ग ही आता है। रसूखदारों के आलीशान बंगलों के लिए गरीबों के आशियाने उजाड़ने की यह ‘शानदार’ सुशासन गाथा छत्तीसगढ़ के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी। देखना होगा कि जनता का यह आक्रोश आने वाले समय में सत्ता के गलियारों में क्या रंग दिखाता है।

