शेयर बाजार पर रहेगी इन 5 बड़े फैक्टर्स की नजर, RBI की बैठक से वैश्विक घटनाक्रम तक बढ़ाएंगे हलचल

भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले सप्ताह बाजार में मजबूत तेजी दर्ज की गई, जिसमें विदेशी निवेश, बेहतर तिमाही नतीजों और वैश्विक तनाव में नरमी का बड़ा योगदान रहा। अब निवेशकों की नजर भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति, कंपनियों के तिमाही नतीजों, अमेरिका-ईरान के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। इन सभी कारकों का असर बाजार की दिशा तय करने में अहम हो सकता है।
RBI की मौद्रिक नीति और कंपनियों के नतीजों पर फोकस
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 3 से 5 अगस्त तक आयोजित होगी और 5 अगस्त को ब्याज दरों सहित अन्य नीतिगत फैसलों की घोषणा की जाएगी। बाजार को फिलहाल रेपो रेट में किसी बदलाव की उम्मीद नहीं है, लेकिन निवेशकों की नजर आगे की ब्याज दर नीति और लिक्विडिटी से जुड़े संकेतों पर रहेगी।
इसके साथ ही कई बड़ी कंपनियां अप्रैल-जून तिमाही के वित्तीय परिणाम जारी करेंगी। इनमें एसबीआई, एलआईसी, भारती एयरटेल, ओएनजीसी, नायका, आईआरईडीए और डेल्हीवरी जैसी कंपनियां शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल मुनाफे के आंकड़े ही नहीं बल्कि कंपनियों का भविष्य का दृष्टिकोण, मांग, मार्जिन और निवेश योजनाएं भी बाजार की चाल तय करेंगी।
वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में कमी के संकेतों पर वैश्विक बाजार की नजर बनी हुई है। यदि दोनों देशों के बीच समझौते की दिशा में प्रगति होती है तो इसका सकारात्मक असर वैश्विक निवेशकों के भरोसे और शेयर बाजारों पर पड़ सकता है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति सामान्य होने की संभावना भी कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
हाल के महीनों में ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यदि तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो भारत में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, जबकि कीमतों में नरमी बाजार के लिए राहत लेकर आ सकती है।
विदेशी निवेशकों की गतिविधियां रहेंगी अहम
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने पिछले सप्ताह लगातार खरीदारी जारी रखी, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने भी बाजार में मजबूत निवेश किया। विश्लेषकों का मानना है कि यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी का रुख आगे भी बना रहता है तो भारतीय शेयर बाजार को अतिरिक्त मजबूती मिल सकती है। ऐसे में घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर होने वाले घटनाक्रम आगामी सप्ताह में निवेशकों की रणनीति और बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

