बिलासपुर में NTPC के राखड़ बांध से जल रिसाव का आरोप, प्रभावित किसानों ने लगाई मुआवजे की गुहार
17 साल से नुकसान झेल रहे किसानों ने मांगा न्याय

बिलासपुर | छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सीपत क्षेत्र में स्थित NTPC के राखड़ बांध क्रमांक-3 से कथित रूप से हो रहे जल रिसाव को लेकर प्रभावित किसानों(Farmers) ने एक बार फिर प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश के माध्यम से प्रभावित किसान लाकेश पटेल और कलेश्वर पटेल ने कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन सौंपकर फसल और सिंचाई साधनों की क्षति का उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।
रिसाव के कारण कृषि भूमि हुई प्रभावित
किसानों(Farmers) का आरोप है कि वर्ष 2007 से राखड़ बांध क्रमांक-3 से लगातार जल रिसाव हो रहा है। रिसाव के कारण उनकी कृषि भूमि प्रभावित हुई है और कई खेत दलदल में तब्दील हो गए हैं। किसानों का कहना है कि खेतों में लगातार पानी भरने के कारण वे पारंपरिक साग-भाजी और रबी फसलों की खेती नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उन्हें हर साल आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सूखा क्षेत्र घोषित कर मुआवजे की प्रक्रिया से किया बाहर
प्रभावित किसानों के अनुसार, वर्ष 2009 से धान फसल क्षति के लिए उन्हें मुआवजा दिया जाता रहा है, लेकिन कई बार भुगतान में 8 से 10 महीने तक की देरी हुई। किसानों(Farmers) ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी कुछ जमीन को सूखा क्षेत्र बताकर मुआवजे की प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया, जबकि वह भूमि भी जल रिसाव से प्रभावित है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि वर्ष 2009 से अब तक हुई रबी फसल क्षति का आकलन कराया जाए। साथ ही जलभराव के कारण प्रभावित हुए ट्यूबवेल और अन्य सिंचाई साधनों के नुकसान का भी सर्वे कर उचित मुआवजा दिया जाए। उनका कहना है कि पिछले 17 वर्षों से वे इस समस्या का सामना कर रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं मिल पाया है।
कलेक्टर जनदर्शन में दिए गए आवेदन में किसानों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और प्रभावित भूमि का पुनः सर्वे करवाने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि सही तरीके से सर्वे कराया जाए तो उन्हें लंबे समय से हो रहे नुकसान का वास्तविक आकलन मिल सकेगा।

