BJP का चुनावी खर्च: एक विधानसभा सीट जीतने के लिए कितने करोड़ खर्च? तमिलनाडु सबसे महंगा, UP में सबसे कम

विधानसभा चुनाव में एक-एक सीट पर जीत हासिल करने के लिए राजनीतिक दलों को बड़े पैमाने पर पैसा खर्च करना पड़ता है। प्रचार, विज्ञापन, रैलियां, स्टार प्रचारकों की यात्राएं, पार्टी संगठन और उम्मीदवारों पर होने वाला खर्च चुनावी बजट का हिस्सा होता है। चुनाव आयोग के सामने जमा किए गए खर्च के आंकड़ों के आधार पर अलग-अलग राज्यों में BJP के चुनावी खर्च की तुलना की गई है।
इस तुलना में उत्तर प्रदेश (2022), महाराष्ट्र (2024), दिल्ली (2025), बिहार (2025), असम (2026), तमिलनाडु (2026) और पुडुचेरी (2026) के विधानसभा चुनाव शामिल हैं।
यूपी में BJP ने 376 सीटों पर खर्च किए ₹221 करोड़ से ज्यादा
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में BJP ने कुल 403 में से 376 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। पार्टी ने चुनावी अभियान पर ₹221 करोड़ से ज्यादा खर्च किए।
इस हिसाब से BJP का प्रति लड़ी गई सीट औसत खर्च करीब ₹59 लाख रहा। यूपी देश का सबसे बड़ा विधानसभा चुनाव था और यहां विधानसभा सीटों की संख्या भी अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है।
BJP ने इस चुनाव में 255 सीटें जीती थीं। उसके सहयोगी अपना दल (S) और निषाद पार्टी ने भी अलग-अलग सीटों पर चुनाव लड़ा था।
महाराष्ट्र में प्रति सीट करीब ₹99 लाख खर्च
2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में BJP ने 288 में से 149 सीटों पर चुनाव लड़ा और 132 सीटें जीतीं।
पार्टी का चुनावी खर्च करीब ₹147 करोड़ रहा। इसके आधार पर प्रति सीट औसत खर्च लगभग ₹99 लाख बैठता है। यानी महाराष्ट्र में BJP का प्रति सीट खर्च उत्तर प्रदेश के मुकाबले करीब 1.7 गुना रहा।
BJP महायुति गठबंधन का सबसे बड़ा घटक थी और गठबंधन के तहत उसने 149 सीटों पर उम्मीदवार उतारे।
दिल्ली में 68 सीटों पर ₹57.65 करोड़ खर्च
2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में कुल 70 सीटें थीं। BJP ने इनमें से 68 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और दो सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ीं।
BJP ने चुनाव में ₹57.65 करोड़ खर्च किए। इस हिसाब से प्रति सीट औसत खर्च करीब ₹84.8 लाख यानी लगभग ₹85 लाख रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक, BJP ने अपने 68 उम्मीदवारों पर करीब ₹18.5 करोड़ खर्च किए थे। चुनाव में पार्टी ने 48 सीटें जीतकर दिल्ली में 27 साल बाद सरकार बनाई।
बिहार में प्रति सीट खर्च ₹1.45 करोड़
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में NDA के सीट बंटवारे के तहत BJP ने 243 में से 101 सीटों पर चुनाव लड़ा।
पार्टी ने चुनाव में ₹146.71 करोड़ खर्च किए। इस हिसाब से प्रति लड़ी गई सीट औसत खर्च करीब ₹1.45 करोड़ रहा।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि BJP ने बिहार की सभी 243 सीटों पर अकेले चुनाव नहीं लड़ा था। NDA में सीटें अलग-अलग सहयोगी दलों के बीच बांटी गई थीं।
असम में भी ₹1 करोड़ से ज्यादा प्रति सीट खर्च
2026 के असम विधानसभा चुनाव में BJP ने 89 सीटों पर चुनाव लड़ा। चुनाव के बाद सामने आए खर्च के आंकड़ों के मुताबिक BJP और उसकी संबंधित इकाइयों का कुल खर्च करीब ₹96.3 करोड़ रहा।
इसके आधार पर एक सीट पर औसत खर्च करीब ₹1.08 करोड़ बैठता है।
तमिलनाडु में सबसे ज्यादा ₹1.91 करोड़ प्रति सीट
2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कुल 234 सीटें थीं। BJP ने इनमें से 27 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन सिर्फ 1 सीट जीत सकी।
पार्टी ने तमिलनाडु में ₹51.56 करोड़ खर्च किए। इस हिसाब से प्रति लड़ी गई सीट औसत खर्च करीब ₹1.91 करोड़ रहा।
वहीं, पुडुचेरी में BJP ने 30 में से 10 सीटों पर चुनाव लड़ा और 4 सीटें जीतीं। पार्टी का खर्च ₹11.90 करोड़ रहा। यानी यहां प्रति सीट औसत खर्च करीब ₹1.19 करोड़ रहा।
तो सबसे महंगा चुनाव कहां?
सात राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में BJP के प्रति लड़ी गई सीट औसत खर्च की तुलना करें तो तस्वीर इस तरह है:
राज्य| चुनाव वर्ष| BJP ने लड़ी सीटें| कुल खर्च| प्रति सीट औसत खर्च
तमिलनाडु| 2026| 27| ₹51.56 करोड़| ₹1.91 करोड़
बिहार| 2025| 101| ₹146.71 करोड़| ₹1.45 करोड़
पुडुचेरी| 2026| 10| ₹11.90 करोड़| ₹1.19 करोड़
असम| 2026| 89| ₹96.3 करोड़| ₹1.08 करोड़
महाराष्ट्र| 2024| 149| करीब ₹147 करोड़| ₹99 लाख
दिल्ली| 2025| 68| ₹57.65 करोड़| ₹85 लाख
उत्तर प्रदेश| 2022| 376| ₹221 करोड़+| ₹59 लाख
औसत खर्च का मतलब क्या है?
यह समझना जरूरी है कि प्रति सीट दिए गए ये आंकड़े औसत हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि BJP ने हर विधानसभा सीट पर बिल्कुल इतनी ही रकम खर्च की।
किसी सीट पर खर्च इससे काफी कम या ज्यादा हो सकता है। इसके अलावा पार्टी का सामान्य प्रचार, केंद्रीय नेतृत्व की रैलियां, मीडिया विज्ञापन और स्टार प्रचारकों से जुड़े खर्च कई विधानसभा क्षेत्रों को एक साथ प्रभावित कर सकते हैं।
इन आंकड़ों से इतना जरूर पता चलता है कि इन सात चुनावों में BJP की एक विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ने की औसत लागत करीब ₹59 लाख से ₹1.91 करोड़ के बीच रही। इनमें तमिलनाडु में प्रति सीट खर्च सबसे ज्यादा और उत्तर प्रदेश में सबसे कम रहा।



