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छत्तीसगढ़ के सहकारी बैंकों में स्टाफ का बड़ा संकट! 1,000 से घटकर सिर्फ 400 कर्मचारी बचे, किसानों और ग्राहकों की बढ़ी परेशानी

रायपुर: छत्तीसगढ़ के सहकारी बैंकों में कर्मचारियों की भारी कमी से बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। कभी करीब 1,000 अधिकारी-कर्मचारियों के भरोसे चलने वाले सहकारी बैंकों में अब केवल 400 कर्मचारी बचे हैं। इसका सीधा असर बैंक आने वाले ग्राहकों और किसानों पर पड़ रहा है। केवाईसी, एटीएम कार्ड वितरण, कृषि ऋण और लोन संबंधी कामों में देरी हो रही है। ऐसे में नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी के दौरान बैंकिंग व्यवस्था पर दबाव और बढ़ने की आशंका है।

सहकारी बैंकों में कर्मचारियों की कमी से बिगड़ी व्यवस्था

छत्तीसगढ़ के सहकारी बैंकों में स्टाफ की कमी अब बड़ी समस्या बनती जा रही है। कर्मचारियों की संख्या लगातार घटने के कारण बैंक शाखाओं में कामकाज का बोझ बढ़ गया है। इसका असर न केवल कर्मचारियों पर पड़ रहा है, बल्कि बैंकिंग सेवाओं के लिए पहुंचने वाले आम लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

जानकारी के मुताबिक, सहकारी बैंकों की कुल 70 शाखाएं हैं। सामान्य रूप से एक शाखा में कम से कम सात कर्मचारियों की जरूरत बताई जा रही है, लेकिन वर्तमान में अधिकांश शाखाएं केवल दो से तीन कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रही हैं। ऐसे में सीमित स्टाफ को ही ग्राहकों से जुड़े कई तरह के काम निपटाने पड़ रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार, पहले सहकारी बैंकों में लगभग 1,000 अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत थे। अब यह संख्या घटकर करीब 400 रह गई है। कर्मचारियों की कमी के चलते रोजमर्रा के बैंकिंग कार्यों को पूरा करने में अधिक समय लग रहा है और ग्राहकों को बार-बार बैंक के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

केवाईसी, एटीएम कार्ड और बैंकिंग सेवाओं में देरी

कर्मचारियों की कमी का सबसे ज्यादा असर उन ग्राहकों पर पड़ रहा है, जिन्हें अपने खाते से जुड़े जरूरी काम कराने होते हैं। केवाईसी अपडेट कराने, एटीएम कार्ड प्राप्त करने और बीमा संबंधी औपचारिकताएं पूरी कराने में पहले की तुलना में अधिक समय लग रहा है।

इसके अलावा, नकद जमा करने और निकालने, पासबुक अपडेट कराने, खाते की जानकारी लेने और चेक भुगतान जैसे कामों के लिए भी ग्राहकों को इंतजार करना पड़ रहा है। शाखाओं में सीमित कर्मचारी होने के कारण एक साथ कई कामों को संभालना मुश्किल हो रहा है।

जो काम सामान्य परिस्थितियों में उसी दिन पूरा हो सकता है, उसमें भी एक से दो दिन या उससे अधिक समय लगने की स्थिति बन रही है। इससे खासकर उन लोगों को परेशानी होती है, जिन्हें किसी जरूरी भुगतान या अन्य वित्तीय काम के लिए समय पर बैंकिंग सेवा की आवश्यकता होती है।

कृषि ऋण और लोन वितरण में लग रहा एक सप्ताह तक का समय

सहकारी बैंक किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड यानी केसीसी और अन्य ऋण संबंधी कामों के लिए बड़ी संख्या में किसान इन बैंकों पर निर्भर रहते हैं। लेकिन कर्मचारियों की कमी के चलते ऋण प्रक्रिया पूरी होने में देरी हो रही है।

जानकारी के मुताबिक, जिस लोन प्रक्रिया को पहले दो से तीन दिनों में पूरा कर लिया जाता था, उसमें अब एक सप्ताह से लेकर डेढ़ सप्ताह तक का समय लग रहा है। दस्तावेजों की जांच, खाते से जुड़ी औपचारिकताओं और अन्य प्रक्रियाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी सीमित कर्मचारियों पर होने के कारण कामकाज की रफ्तार प्रभावित हो रही है।

इसका असर उन किसानों और ग्राहकों पर पड़ सकता है, जिन्हें समय पर ऋण की राशि या बैंक से जुड़ी अन्य वित्तीय सुविधाओं की जरूरत होती है। ऐसे में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना और बैंकिंग प्रक्रिया को सुचारू बनाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अनुकंपा नियुक्ति के 35 मामले लंबित, नई भर्तियों का इंतजार

सहकारी बैंकों में कर्मचारियों की कमी के बीच अनुकंपा नियुक्ति के मामले भी लंबित बताए जा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ऐसे 35 मामले लंबे समय से अटके हुए हैं। संबंधित हितग्राही कई वर्षों से नियुक्ति की उम्मीद में अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक इन मामलों का समाधान नहीं हो पाया है।

इसके साथ ही नई भर्तियां भी कई वर्षों से नहीं होने की बात सामने आई है। लगातार कर्मचारियों की संख्या घटने और नए लोगों की नियुक्ति नहीं होने से मौजूदा स्टाफ पर काम का दबाव बढ़ता जा रहा है।

इन मुद्दों को लेकर कर्मचारी संगठनों में भी नाराजगी बनी हुई है। कर्मचारियों की मांग है कि स्टाफ की कमी दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं और लंबित नियुक्ति मामलों पर भी ध्यान दिया जाए। हालांकि, भर्ती और नियुक्ति को लेकर आगे क्या निर्णय लिया जाएगा, इस पर संबंधित विभाग की आधिकारिक स्थिति महत्वपूर्ण होगी।

धान खरीदी के दौरान बढ़ सकती है परेशानी

नवंबर से शुरू होने वाले धान खरीदी अभियान के दौरान सहकारी बैंकों और समितियों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी। इस अवधि में किसानों से जुड़े भुगतान, बैंक खातों में राशि जमा होने, ऋण वसूली और खरीफ सीजन के लेन-देन जैसे काम बढ़ जाते हैं।

ऐसे में बैंकिंग सेवाओं का समय पर उपलब्ध होना जरूरी है, ताकि किसानों को भुगतान प्राप्त करने और अन्य वित्तीय काम पूरे कराने में परेशानी न हो। लेकिन मौजूदा समय में जब अधिकांश शाखाएं सीमित कर्मचारियों के सहारे चल रही हैं, तब धान खरीदी के दौरान अतिरिक्त काम का बोझ बढ़ने की आशंका है।

यदि कर्मचारियों की कमी दूर नहीं होती, तो भुगतान संबंधी शिकायतों के निराकरण और किसानों को समय पर बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने में चुनौतियां बढ़ सकती हैं। इसका असर बैंक शाखाओं में भीड़ और कामकाज की गति पर भी पड़ सकता है।

कर्मचारियों की कमी दूर करना बड़ी चुनौती

छत्तीसगढ़ के सहकारी बैंकों में कर्मचारियों की संख्या करीब 1,000 से घटकर 400 रह जाना बैंकिंग व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर ग्राहकों को केवाईसी, एटीएम कार्ड और लोन जैसी सेवाओं के लिए इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर किसानों से जुड़े कामों के समय पर पूरा होने को लेकर भी चिंता बनी हुई है।

धान खरीदी का मौसम नजदीक होने के कारण इस समस्या का समाधान और जरूरी हो गया है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग कर्मचारियों की कमी दूर करने, लंबित अनुकंपा नियुक्तियों पर निर्णय लेने और बैंकिंग सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाता है।

फिलहाल, सहकारी बैंकों में पर्याप्त स्टाफ की उपलब्धता किसानों और आम ग्राहकों को समय पर सेवाएं देने के लिहाज से अहम बनी हुई है।

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Shruti Jangde

With over 6 years of experience in the media industry, I specialize in news anchoring, copywriting, and digital journalism. I cover a wide range of news, delivering accurate, unbiased, and fact-based reporting. Passionate about bringing the truth to the public, I am committed to ethical journalism and credible storytelling. My goal is to inform, inspire, and make a meaningful impact through responsible reporting.

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