छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला: कर्मचारियों और उनके परिवारों को मिलेगा कैशलेस इलाज का लाभ
मंत्रिपरिषद ने दी मंजूरी

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के लाखों शासकीय कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों को बड़ी राहत देने की दिशा में अहम फैसला लिया है। राज्य मंत्रिपरिषद ने सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा की मांग को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के बाद अब कर्मचारियों को इलाज के लिए पहले बड़ी रकम जुटाने और बाद में मेडिकल बिलों की प्रतिपूर्ति का इंतजार करने की परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार के इस फैसले से कर्मचारियों में खुशी का माहौल है।
कैशलेस चिकित्सा सुविधा को मंजूरी मिलने के बाद छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात कर सरकार के प्रति आभार जताया। फेडरेशन के पदाधिकारियों ने इस निर्णय को शासकीय कर्मचारियों और उनके परिवारों के स्वास्थ्य हित में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की यह मांग लंबे समय से लंबित थी और मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिलने से अब उन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
लंबे समय से की जा रही थी कैशलेस इलाज की मांग
छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारी लंबे समय से ऐसी स्वास्थ्य सुविधा की मांग कर रहे थे, जिसमें बीमारी या आपात स्थिति में अस्पताल में भर्ती होने के दौरान इलाज के लिए अपनी जेब से बड़ी रकम खर्च न करनी पड़े। कई बार गंभीर बीमारी, दुर्घटना या अचानक अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इलाज के खर्च की व्यवस्था करना होता है।
विशेषकर उस समय परेशानी और बढ़ जाती है, जब मरीज को तत्काल उपचार की जरूरत होती है और परिवार के पास तुरंत बड़ी रकम उपलब्ध नहीं होती। ऐसी परिस्थितियों में कर्मचारियों को अपनी जमा पूंजी खर्च करनी पड़ती है या फिर दूसरे स्रोतों से पैसों की व्यवस्था करनी पड़ती है। इसके बाद इलाज पर हुए खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए विभागीय प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू होने से इस तरह की परेशानियों में कमी आने की उम्मीद है। इससे पात्र कर्मचारियों और उनके आश्रितों को निर्धारित नियमों के तहत इलाज की सुविधा मिल सकेगी।
इलाज के खर्च की चिंता होगी कम
कैशलेस इलाज की व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पात्र मरीजों को अस्पताल में उपचार के दौरान पहले से बड़ी रकम जमा करने की जरूरत कम हो सकती है। गंभीर बीमारी या मेडिकल इमरजेंसी में समय पर इलाज मिलना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में आर्थिक व्यवस्था की चिंता कई बार मरीज और उसके परिवार के लिए अतिरिक्त तनाव पैदा कर देती है।
नई सुविधा से कर्मचारियों को स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों में आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही उनके परिवार के आश्रित सदस्यों को भी इसका लाभ मिल सकेगा। इससे कर्मचारियों को यह भरोसा मिलेगा कि बीमारी या अचानक अस्पताल में भर्ती होने जैसी स्थिति में उन्हें अकेले इलाज के खर्च की व्यवस्था करने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।
हालांकि, इस सुविधा का वास्तविक लाभ किन कर्मचारियों और आश्रितों को मिलेगा, कौन-कौन से अस्पताल इसमें शामिल होंगे और किन बीमारियों या उपचारों को कवर किया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी सरकार की ओर से जारी होने वाले दिशा-निर्देशों के बाद ही स्पष्ट होगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिला कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन का प्रतिनिधिमंडल
मंत्रिपरिषद से कैशलेस चिकित्सा सुविधा को मंजूरी मिलने के बाद छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संगठन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने किया।
इस दौरान फेडरेशन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को इस निर्णय के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि यह फैसला प्रदेश के लाखों शासकीय कर्मचारियों तथा उनके आश्रित परिवारों के हित में महत्वपूर्ण साबित होगा। प्रतिनिधियों ने इसे कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही अपेक्षा पूरी करने वाला निर्णय बताया।
फेडरेशन के सदस्यों का कहना था कि स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें कभी भी सामने आ सकती हैं। ऐसे में कैशलेस चिकित्सा सुविधा कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देने में मददगार होगी। इस व्यवस्था से इलाज के दौरान होने वाली आर्थिक परेशानियों को कम करने में सहायता मिल सकती है।
मुख्यमंत्री को अभिनंदन समारोह में शामिल होने का आमंत्रण
मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान फेडरेशन ने उनके प्रति आभार व्यक्त करने के साथ ही सम्मान में आयोजित होने वाले अभिनंदन समारोह में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया। प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के इस फैसले को कर्मचारी हित में सकारात्मक पहल बताते हुए मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया।
इस अवसर पर पंकज पाण्डेय, सत्येंद्र देवांगन, अश्वनी चेलक, जय कुमार साहू, पीतांबर पटेल, आलोक मिश्रा और संतोष कुमार वर्मा सहित फेडरेशन के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
दिशा-निर्देश जारी होने के बाद स्पष्ट होगी पूरी व्यवस्था
कैशलेस चिकित्सा सुविधा को मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिलने के बाद अब कर्मचारियों की नजर इसके क्रियान्वयन पर रहेगी। योजना के तहत पात्रता, अस्पतालों की सूची, इलाज की सीमा, आश्रित परिवार के सदस्यों से जुड़े नियम और आवेदन की प्रक्रिया जैसी जानकारियां सरकार के विस्तृत आदेश के बाद सामने आएंगी।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ सरकार का यह फैसला प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। यदि व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो बीमारी या आपात स्थिति में इलाज के लिए पैसों की तत्काल व्यवस्था करने का दबाव कम होगा और कर्मचारियों को बड़ी राहत मिल सकती है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस सुविधा को कब से और किस प्रक्रिया के तहत लागू करती है।



