नकटी विस्थापितों का मुख्यमंत्री आवास का घेराव, मुआवजे और जमीन वापसी की मांग तेज

नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई से प्रभावित ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ कांग्रेस कार्यकर्ता भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और पुलिस बल की तैनाती की गई।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीण सड़क पर बैठकर भोजन करने लगे। इस दौरान पुलिस ने उन्हें हटाने का प्रयास किया, जिस पर प्रदर्शनकारियों ने विरोध जताते हुए कहा कि पहले उनके घर तोड़े गए और अब उन्हें भोजन करने से भी रोका जा रहा है। इससे पहले प्रभावित ग्रामीण मंत्री ओपी चौधरी के सरकारी आवास का घेराव कर चुके हैं। बुलडोजर कार्रवाई के बाद कई परिवार बारिश और कीचड़ के बीच अपने टूटे मकानों के पास धरने पर बैठे रहे थे। इससे पहले वे रायपुर कलेक्ट्रेट के सामने भी प्रदर्शन कर चुके हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखते हुए जमीन वापस करने, तोड़े गए मकानों का उचित मुआवजा देने और प्रभावित लोगों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग की। इस दौरान कलेक्टर ने प्रतिनिधिमंडल की दस महिलाओं से मुलाकात कर उनकी बातें सुनीं और मांगों को शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि पांच दिनों के भीतर मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो पहले राज्यपाल से मुलाकात की जाएगी और उसके बाद भी समाधान नहीं होने पर प्रदेश बंद का आह्वान किया जाएगा। मांगों को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन को पांच दिन का अल्टीमेटम दिया है।
गौरतलब है कि तीन दिन पहले नकटी गांव में प्रशासन ने करीब 85 मकानों पर बुलडोजर कार्रवाई की थी। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों के लिए ईडब्ल्यूएस आवास उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि हाउसिंग बोर्ड का दावा है कि 77 लोगों ने करीब 15 हेक्टेयर सरकारी भूमि पर कब्जा किया था। हालांकि प्रभावितों का कहना है कि सभी परिवारों को वैकल्पिक आवास नहीं मिला है।
इस बीच कार्रवाई से पहले ग्रामीणों को आश्वासन देने वाले रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल की मुख्यमंत्री को लिखी एक वर्ष पुरानी चिट्ठी भी चर्चा में है। पत्र में उन्होंने विधायक कॉलोनी के लिए नकटी गांव की जमीन के चयन पर आपत्ति जताते हुए गरीब परिवारों को विस्थापित नहीं करने का आग्रह किया था।
वहीं, सरायपाली से कांग्रेस विधायक चातुरीनंद ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विधायक कॉलोनी की योजना को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों को उजाड़कर जनप्रतिनिधियों के लिए आवास बनाना उचित नहीं है और यदि नई कॉलोनी बनानी ही है तो नवा रायपुर में उपलब्ध सरकारी भूमि का उपयोग किया जाना चाहिए।

