गोवा में 97 मतदाताओं के नाम अंतिम सूची से बाहर, सात दिन में भेजे गए आठ ई-मेल

गोवा में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 97 ऐसे मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके, जिन्हें स्थानीय निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) ने दस्तावेजों और आपत्तियों की जांच के बाद योग्य माना था। मामले को लेकर गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने सात दिनों के भीतर आठ बार ई-मेल भेजकर पुराने फैसलों को पलटने के लिए सॉफ्टवेयर में जरूरी सुविधा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। यह जानकारी 24 सितंबर 2026 को प्रकाशित एक जांच रिपोर्ट में सामने आई है।
क्या है पूरा मामला
मामला फरवरी 2026 का है। गोवा में SIR के तहत अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले 17 फरवरी को मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने 97 मतदाताओं की सूची के साथ निर्वाचन आयोग को पत्र भेजा था। इन मतदाताओं को स्थानीय ERO ने सुनवाई के बाद दस्तावेजों और आपत्तियों की जांच कर मतदाता सूची में शामिल किए जाने के योग्य माना था।
रिपोर्ट के मुताबिक, पहले इन मतदाताओं के नामों में कुछ ‘लॉजिकल विसंगतियां’ चिन्हित की गई थीं। बाद में दस्तावेज और आपत्तियां मिलने के बाद अधिकारियों ने पुराने फैसले को बदलने की जरूरत बताई। हालांकि, चुनावी सॉफ्टवेयर ECINet में ERO स्तर पर पुराने फैसले को वापस लेने यानी रोलबैक करने की सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
सात दिनों में भेजे गए आठ ई-मेल
गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर से 11 से 17 फरवरी के बीच लगातार ई-मेल भेजकर रोलबैक सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई। रिपोर्ट के अनुसार, 17 फरवरी को भेजा गया ई-मेल सात दिनों में आठवां अनुरोध था। इसमें कहा गया था कि जिन 97 मतदाताओं को जांच के बाद योग्य पाया गया है, उनके नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए पहले लिए गए फैसलों को बदला जाना जरूरी है।
18 फरवरी को उप निर्वाचन आयुक्त की ओर से आईटी विभाग को भेजे गए संदेश में भी कहा गया कि तकनीकी व्यवस्था की वजह से सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप जरूरी कार्रवाई बाधित नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद 21 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने पर ये 97 नाम उसमें शामिल नहीं थे। रिपोर्ट के अनुसार, 20 सितंबर तक भी सभी 97 नाम अंतिम सूची में नहीं पाए गए।
मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर उठे सवाल
कानून के तहत विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची तैयार और संशोधित करने की जिम्मेदारी ERO की होती है। ERO दावों और आपत्तियों की सुनवाई कर नामों को शामिल करने या हटाने पर निर्णय लेता है। इसी प्रक्रिया के दौरान ECINet पर तकनीकी अधिकारों और स्थानीय अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठे हैं।
मामले की रिपोर्टिंग में यह भी सामने आया कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में चुनावी प्रक्रिया और ECINet के केंद्रीकृत संचालन से जुड़े मुद्दों पर कई बार आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग ने दूसरी ओर निर्णयों को सामूहिक रूप से लिए जाने की बात कही है। इन दावों और आयोग की स्थिति के बीच यह मामला मतदाता सूची के प्रबंधन में तकनीकी व्यवस्था और स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों के अधिकारों को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।



