
बिलासपुर। NTPC सीपत परियोजना से प्रभावित किसानों ने मुआवजे में अनियमितता और खेतों में दलदल की समस्या को लेकर नाराजगी जताई है। किसानों(Farmers) का आरोप है कि उन्हें हर वर्ष मुआवजे के लिए आवेदन करना पड़ता है, इसके बावजूद समय पर भुगतान नहीं किया जाता। किसानों का दावा है कि इस बार करीब 30 प्रभावित किसानों का मुआवजा काट दिया गया है।
दलदल में फंसी खेती, प्रभावित किसानों ने प्रशासनिक कार्रवाई पर उठाए सवाल
प्रभावित किसानों(Farmers) ने परियोजना प्रबंधन पर राजस्व अधिकारियों को वास्तविक स्थिति से अवगत नहीं कराने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि गर्मी के मौसम में सर्वे कराकर खेतों की मौजूदा स्थिति को छिपाने की कोशिश की गई। किसानों के अनुसार, खेतों में दलदल, गड्ढे और खरपतवार के कारण खेती करना लगभग असंभव हो गया है। एक किसान ने ट्रैक्टर फंसने के कारण अतिरिक्त पांच हजार रुपये खर्च होने की बात भी कही।
निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारी, किसानों ने कहा- खेत में उतरे बिना लौट गए
कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम और तहसीलदार ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। हालांकि किसानों(Farmers) का आरोप है कि अधिकारियों ने खेतों के अंदर जाकर स्थिति का जायजा लेने के बजाय बाहर से ही निरीक्षण कर लौट गए। इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रभावित जमीन को दोबारा खेती योग्य बनाने अथवा स्थायी मुआवजा निर्धारित करने की मांग उठाई।
प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को नियमानुसार कार्रवाई और मामले की जांच का आश्वासन दिया है। वहीं प्रभावित किसानों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

