नेपाल में जेन-जी आंदोलन के मामलों पर सरकार का बड़ा फैसला, 1700 में से सिर्फ 300 केस होंगे वापस

नेपाल में जेन-जी आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को लेकर सरकार की ओर से बड़ा फैसला सामने आया है। आंदोलन के दौरान करीब 1700 लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे, लेकिन अब इनमें से सिर्फ 300 आरोपियों के खिलाफ दर्ज केस वापस लेने की सिफारिश की गई है। इस फैसले के बाद आंदोलन से जुड़े लोगों में नाराजगी बढ़ गई है और इसे सरकार के पुराने आश्वासन से अलग बताया जा रहा है।
सिर्फ सामान्य प्रदर्शन से जुड़े मामलों में राहत
रिटायर्ड न्यायाधीश बाबूराम रेगमी की अध्यक्षता में गठित समिति ने मामलों की समीक्षा के बाद केस वापस लेने को लेकर सिफारिश की है। समिति का कहना है कि सामान्य प्रदर्शन से जुड़े मामलों को वापस लिया जा सकता है, लेकिन पुलिसकर्मियों पर हमले और सरकारी संपत्ति को नुकसान या लूट से जुड़े मामलों में कार्रवाई जारी रहनी चाहिए।
आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों में 1400 से अधिक लोगों पर सरकारी संपत्ति की लूट और पुलिसकर्मियों पर हमले जैसे गंभीर आरोप हैं। इनमें से 53 लोगों के मामलों में अदालत की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। ऐसे मामलों को वापस लेना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।
सरकार ने सभी केस वापस लेने का किया था वादा
नेपाल में तत्कालीन सरकार के खिलाफ जेन-जी आंदोलन के बाद अंतरिम सरकार के गठन के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ मामलों को वापस लेने का समझौता किया गया था। बाद में सरकार की ओर से भी कहा गया था कि आंदोलन में भाग लेने के कारण दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
अब समिति की सिफारिश में केवल 300 मामलों को वापस लेने की बात सामने आने के बाद प्रदर्शनकारी इसे पुराने समझौते की भावना के खिलाफ बता रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने जताई नाराजगी
जेन-जी आंदोलन से जुड़ी नेता सरिश्मा थापा ने इस फैसले पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ एकतरफा तरीके से आपराधिक आरोप लगाए थे। उन्होंने आश्चर्य जताया कि क्या समिति ने सभी मामलों की पूरी तरह जांच की है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार और जेन-जी के बीच हुए समझौते के मुताबिक आंदोलन से जुड़े सभी मामलों पर राहत मिलनी चाहिए थी। अब केवल कुछ मामलों को वापस लेने की सिफारिश से सरकार और आंदोलनकारियों के बीच फिर से विवाद बढ़ने की संभावना है।



