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भारतीय सेना को मिलेंगी हैमर मिसाइलें, रक्षा खरीद पर आज बड़ा फैसला

दिल्ली। रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में शुक्रवार को होने वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता बढ़ाने से जुड़े कई अहम रक्षा खरीद प्रस्तावों पर मुहर लगने की संभावना है।

बैठक में हैमर प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल, वर्बा एयर डिफेंस सिस्टम, मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपी-एटीजीएम), ड्रोन रोधी प्रणाली और स्यूडो सैटेलाइट जैसी आधुनिक सैन्य परियोजनाओं पर विचार किया जाएगा। इन प्रस्तावों के मंजूर होने से सेना, नौसेना और वायुसेना की मारक क्षमता और निगरानी प्रणाली को नई मजबूती मिलेगी।

बैठक में सबसे अधिक जोर डीआरडीओ द्वारा विकसित स्वदेशी एमपी-एटीजीएम परियोजना पर रहेगा। लगभग 2,600 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत सेना को 100 लॉन्चर, 2,300 मिसाइलें और पांच सिमुलेटर उपलब्ध कराए जाएंगे। इनका निर्माण भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) करेगी, जबकि निजी कंपनियों की भी इसमें भागीदारी होगी।

डीएसी के सामने करीब 600 हैमर प्रिसिजन-गाइडेड मिसाइलों की खरीद का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। लगभग 2,400 करोड़ रुपये की लागत वाली इन मिसाइलों का निर्माण फ्रांस की सैफरन कंपनी और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के सहयोग से भारत में किया जाएगा। इन मिसाइलों से भारतीय वायुसेना के राफेल और एलसीए तेजस लड़ाकू विमान लैस होंगे, जबकि नौसेना इन्हें राफेल-एम विमानों में भी उपयोग करेगी।

बैठक में रूसी मूल के वर्बा वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद पर भी फैसला हो सकता है। यह प्रणाली कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन को प्रभावी ढंग से निशाना बना सकती है। इसके अलावा सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो, कामिकाजी ड्रोन, ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम, स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के उपकरण और फिक्स्ड-विंग स्यूडो सैटेलाइट जैसे प्रस्तावों पर भी विचार होगा। इन परियोजनाओं को मंजूरी मिलने से भारतीय सशस्त्र बलों की रक्षा, निगरानी और आधुनिक युद्ध क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

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