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71 साल पुराने विरासत विवाद में पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बेटियों के हक को बताया कानूनी अधिकार

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने 71 साल पुराने विरासत विवाद में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि बेटियां भी पिता की संपत्ति में कानूनी रूप से बराबर की वारिस हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि महिलाओं को विरासत से किसी भी बहाने, सामाजिक दबाव या फर्जी दस्तावेजों के जरिए वंचित नहीं किया जा सकता।

यह मामला 1955 में रोशन नामक व्यक्ति की मौत के बाद शुरू हुआ था। आरोप था कि उनकी बेटियों के हिस्से की संपत्ति कथित तौर पर फर्जी गिफ्ट डीड और राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव के जरिए उनके भाइयों के नाम कर दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने लाहौर हाईकोर्ट के 2017 के फैसले को रद्द करते हुए बेटियों की अपील स्वीकार कर ली। अदालत ने संबंधित म्यूटेशन को अवैध घोषित किया और राजस्व अधिकारियों को रिकॉर्ड में सुधार कर कानून के अनुसार सभी वारिसों का हिस्सा तय करने का निर्देश दिया।

फैसला सुनाते हुए जस्टिस शाहिद बिलाल हसन ने कहा कि विरासत महिलाओं को दिया जाने वाला कोई उपहार नहीं, बल्कि उनका शरिया और कानून से मिला अधिकार है। अदालत ने यह भी कहा कि महिलाओं को विरासत से बाहर रखने वाले मामलों की बेहद सावधानी से जांच की जानी चाहिए।

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