वोटिंग से पहले RJD प्रत्याशी के घर पहुंची पुलिस, तेजस्वी बोले- हम डरने वाले नहीं
बिहार MLC चुनाव में 8 सीटों पर मतदान आज, डॉ. संजीव सिंह के घर देर रात पहुंचा पुलिस का काफिला

दिल्ली। बिहार विधान परिषद की 8 सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान हो रहा है। वोटिंग से पहले पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रत्याशी डॉ. संजीव सिंह के घर देर रात पुलिस पहुंच गई। इस घटना के बाद बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो शेयर कर राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले पुलिस भेजकर उनके प्रत्याशी को परेशान करने की कोशिश की गई है। तेजस्वी ने कहा कि लालू प्रसाद यादव, आरजेडी के नेता और कार्यकर्ता डरने वाले नहीं हैं।
देर रात 7 गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंची पुलिस
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार देर रात पुलिस की टीम करीब 7 गाड़ियों के काफिले के साथ डॉ. संजीव सिंह के आवास पर पहुंची थी। उस समय प्रत्याशी घर पर मौजूद थे। पुलिस के पहुंचने के बाद वहां बातचीत हुई। इस दौरान डॉ. संजीव सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने और उनके घर की तलाशी लेने के इरादे से पहुंची थी।
प्रत्याशी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उनके घर पर बिना सर्च वारंट के तलाशी लेने का दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतदान से ठीक पहले उन्हें परेशान करने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, टीम को सूचना मिली थी कि आवास पर ठहरे कुछ लोग चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं। इसी सूचना के आधार पर पुलिस वहां पहुंची थी। कुछ देर बातचीत के बाद पुलिस टीम वापस लौट गई।

तेजस्वी यादव ने सरकार पर साधा निशाना
RJD नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस घटना का वीडियो एक्स पर शेयर किया। उन्होंने राज्य सरकार पर चुनाव से पहले विपक्षी प्रत्याशी को परेशान करने का आरोप लगाया।
तेजस्वी यादव ने अपनी पोस्ट में कहा कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव से पहले उनके उम्मीदवार के घर रात करीब एक बजे पुलिस भेजी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना सर्च वारंट के पुलिस भेजकर प्रत्याशी को हतोत्साहित करने की कोशिश की गई।
तेजस्वी ने अपने संदेश में कहा कि लालू प्रसाद यादव और आरजेडी के नेता तथा कार्यकर्ता इस तरह की कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं। उनके बयान के बाद चुनाव से ठीक पहले पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
आरजेडी की ओर से इस घटना को चुनावी प्रक्रिया के दौरान दबाव बनाने की कोशिश के रूप में पेश किया जा रहा है। वहीं, पुलिस ने आवास पर मौजूद लोगों के चुनाव प्रभावित करने की आशंका से जुड़ी सूचना मिलने की बात कही है। दोनों पक्षों के दावों के बीच इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और उसके आधार को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
डॉ. संजीव सिंह ने क्या आरोप लगाए?
पटना स्नातक सीट से RJD प्रत्याशी डॉ. संजीव सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस उनके आवास पर बिना सर्च वारंट पहुंची थी। उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की कार्रवाई से उन्हें परेशान करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने अपनी बातचीत में नवल किशोर यादव और राज्य सरकार के इशारे पर कार्रवाई किए जाने का आरोप भी लगाया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी ओर, मौके पर पहुंचे थाना प्रभारी की ओर से बताया गया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि वहां ठहरे कुछ लोग मतदान को प्रभावित कर सकते हैं। इसी सूचना की जांच के सिलसिले में टीम पहुंची थी। इसके बाद पुलिस बिना किसी गिरफ्तारी के वहां से लौट गई।
इस घटना को लेकर चुनावी माहौल में राजनीतिक बयानबाजी बढ़ गई है। हालांकि, पुलिस की ओर से दी गई सूचना और प्रत्याशी की ओर से लगाए गए आरोपों के बीच वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए आधिकारिक तथ्यों और संबंधित पक्षों के बयानों का महत्व रहेगा।
8 सीटों के लिए 150 उम्मीदवार मैदान में
बिहार विधान परिषद की 8 सीटों के लिए शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान कराया जा रहा है। इन चुनावों में कुल 150 उम्मीदवार मैदान में हैं। मतदान को लेकर निर्वाचन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 335 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में 598 केंद्रों पर वोट डाले जाएंगे। इन केंद्रों पर कुल 5,32,547 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे।
मतदाताओं में करीब 4.92 लाख स्नातक और 40 हजार शिक्षक मतदाता शामिल हैं। इन निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान के बाद मतगणना 27 अक्टूबर को होगी।
चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
मतदान से ठीक पहले RJD प्रत्याशी के आवास पर पुलिस के पहुंचने की घटना ने बिहार की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। तेजस्वी यादव ने इसे विपक्षी उम्मीदवार को हतोत्साहित करने की कोशिश बताया है, जबकि पुलिस की ओर से चुनाव प्रभावित होने की आशंका से जुड़ी सूचना का हवाला दिया गया है।
अब चुनावी प्रक्रिया के बीच इस घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावों पर नजर रहेगी। फिलहाल, मतदान और 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना पर सभी की निगाहें टिकी हैं।



