रायपुर में रजिस्ट्री के बाद भी नामांतरण में देरी, 250 से ज्यादा मामले लंबित; 5 साल से भटक रहे लोग

रायपुर– छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद भी लोगों को नामांतरण के लिए तहसील कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जिले की विभिन्न तहसीलों में नामांतरण के 250 से अधिक मामले लंबित बताए जा रहे हैं। इनमें कई प्रकरण दो साल से लेकर पांच साल तक पुराने हैं। नियमानुसार सामान्य नामांतरण प्रकरणों का निराकरण 45 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए, लेकिन लंबित मामलों की स्थिति ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार की ओर से भू-अभिलेख और नामांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाने के प्रयासों के बावजूद लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। वहीं, कलेक्टर की ओर से लंबित राजस्व प्रकरणों के जल्द निराकरण के निर्देश दिए जाने के बाद भी मामलों के अटके रहने की बात सामने आई है।
रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए काटने पड़ रहे चक्कर
जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया जमीन के नए मालिक के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने के लिए महत्वपूर्ण होती है। इससे जमीन के स्वामित्व से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड को अपडेट किया जाता है। सामान्य तौर पर इस प्रक्रिया का समय पर पूरा होना जरूरी है, ताकि लोगों को आगे के राजस्व संबंधी कार्यों में परेशानी न हो।
लेकिन रायपुर जिले की तहसीलों में नामांतरण के सैकड़ों मामले लंबित होने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि कई आवेदक महीनों से अपने प्रकरणों के निराकरण का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कुछ मामले कई साल से अटके हुए हैं। ऐसे में जमीन खरीदने वाले लोगों और किसानों को अपने काम के लिए बार-बार तहसील कार्यालय पहुंचना पड़ रहा है।
आवेदकों की परेशानी इसलिए भी बढ़ जाती है, क्योंकि नामांतरण में देरी होने से जमीन से जुड़े अन्य राजस्व कार्य प्रभावित हो सकते हैं। लोगों को उम्मीद रहती है कि रजिस्ट्री के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत रिकॉर्ड अपडेट हो जाएगा, लेकिन लंबित प्रकरणों के कारण उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है।
45 दिन में निराकरण का नियम, फिर भी सालों से लंबित मामले
नामांतरण के सामान्य प्रकरणों का निराकरण निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जाना चाहिए। दी गई जानकारी के अनुसार, ऐसे मामलों के लिए 45 दिन की समय-सीमा तय है। इसके बावजूद रायपुर जिले में 250 से अधिक प्रकरण लंबित बताए जा रहे हैं।
इनमें दो साल से लेकर पांच साल तक पुराने मामले भी शामिल हैं। इतनी लंबी अवधि तक प्रकरणों का लंबित रहना राजस्व व्यवस्था में देरी की ओर इशारा करता है। हालांकि, सभी मामलों में देरी के कारण एक जैसे हों, यह जरूरी नहीं है। दस्तावेजों की कमी, आपत्तियां, विवाद या न्यायालय में मामला विचाराधीन होने जैसी परिस्थितियां किसी प्रकरण की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं।
ऐसे में जरूरी है कि प्रत्येक लंबित मामले की स्थिति की समीक्षा की जाए और जिन प्रकरणों में कोई कानूनी बाधा नहीं है, उनका समय पर निराकरण किया जाए।
कलेक्टर की समीक्षा और निर्देशों के बाद भी देरी
राजस्व से जुड़े लंबित मामलों को लेकर कलेक्टर की ओर से समीक्षा किए जाने और अधिकारियों को जल्द निराकरण के निर्देश देने की जानकारी दी गई है। इन निर्देशों का उद्देश्य लोगों को समय पर राहत दिलाना और तहसील कार्यालयों में लंबित प्रकरणों की संख्या कम करना है।
इसके बावजूद नामांतरण के मामलों के लंबित रहने से प्रशासनिक निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। यदि समय-सीमा निर्धारित है, तो उसके पालन की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होती है। ऐसे में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा और देरी के कारणों की पहचान करना जरूरी है।
नामांतरण के लिए तहसील पहुंचने वाले आवेदकों को यदि बार-बार अगली तारीख दी जाती है, तो इससे उनका समय और मेहनत दोनों खर्च होते हैं। इसलिए प्रशासन से अपेक्षा है कि लंबित मामलों की वास्तविक स्थिति सामने लाकर उनके निराकरण के लिए ठोस कदम उठाए।
कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या कम, फिर भी नहीं हो रहा निराकरण
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नामांतरण के लंबित मामलों में अपेक्षाकृत कम प्रकरण ऐसे बताए जा रहे हैं, जो सिविल कोर्ट या अन्य न्यायालयों में विचाराधीन हैं। न्यायालय में विचाराधीन मामलों में कानूनी स्थिति के अनुसार कार्रवाई स्थगित रखनी पड़ सकती है। लेकिन जिन मामलों में ऐसी कोई बाधा नहीं है, उनके निराकरण में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
इस स्थिति में जरूरी है कि राजस्व विभाग लंबित प्रकरणों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उनकी समीक्षा करे। जिन मामलों में दस्तावेज पूरे हैं और कोई विवाद नहीं है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जा सकता है। वहीं, जिन प्रकरणों में आपत्ति या कानूनी अड़चन है, उनके संबंध में आवेदकों को स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए।
इससे न केवल तहसील कार्यालयों में अनावश्यक चक्कर कम होंगे, बल्कि लोगों को अपने आवेदन की वास्तविक स्थिति जानने में भी आसानी होगी।
अधिकारियों ने मांगी जानकारी, निराकरण पर टिकी निगाहें
लंबित नामांतरण प्रकरणों को लेकर दिए गए आधिकारिक पक्ष के अनुसार, कलेक्टर ने मामलों के निराकरण के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। हालांकि, भू-अभिलेख के प्रकरण लंबित क्यों हैं, इसकी जानकारी संबंधित विभाग से विवरण लेने के बाद ही दी जा सकेगी।
अब सवाल यह है कि रायपुर जिले की तहसीलों में सालों से अटके नामांतरण प्रकरणों का निराकरण कब तक होगा। जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद राजस्व रिकॉर्ड अपडेट होने का इंतजार कर रहे लोगों को राहत देने के लिए जरूरी है कि लंबित मामलों की संख्या, उनकी स्थिति और देरी के कारण सार्वजनिक किए जाएं।
फिलहाल, 250 से अधिक लंबित प्रकरणों और पांच साल तक पुराने मामलों की जानकारी ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि अधिकारियों के निर्देशों के बाद इन मामलों के निराकरण में कितनी तेजी आती है।



