राम मंदिर चढ़ावा मामला: विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार ने जांच का दायरा बढ़ाने की मांग, चार नेताओं से पूछताछ की उठाई मांग

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा मामले में दर्ज एफआईआर की जांच का दायरा बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने अयोध्या पुलिस के जांच अधिकारी एवं सीओ आशुतोष तिवारी को पत्र लिखकर कहा है कि सार्वजनिक रूप से वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाने वाले प्रमुख नेताओं के बयान भी दर्ज किए जाएं, ताकि मामले की निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच हो सके।
आलोक कुमार ने अपने पत्र में कहा कि राम जन्मभूमि थाने में दर्ज मामले की जांच केवल मौजूदा आरोपों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन नेताओं से भी पूछताछ की जानी चाहिए जिन्होंने सार्वजनिक मंचों, टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर राम मंदिर के चढ़ावे में कथित वित्तीय गड़बड़ी और चोरी के आरोप लगाए हैं।
इन नेताओं के नाम का किया उल्लेख
पत्र में जिन नेताओं का उल्लेख किया गया है, उनमें शामिल हैं:
- प्रो. राम गोपाल यादव
- अरविंद केजरीवाल
- संजय सिंह (सांसद)
- प्रियंका गांधी वाड्रा
पत्र के अनुसार, इन नेताओं ने राम मंदिर में चढ़ावे और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर ₹200 करोड़ से लेकर ₹20,000 करोड़ तक की कथित गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। आलोक कुमार का कहना है कि यदि इतने गंभीर आरोप लगाए गए हैं, तो संभव है कि संबंधित नेताओं के पास इस संबंध में तथ्य, दस्तावेज या अन्य साक्ष्य मौजूद हों।
एसआईटी से क्या मांग की गई?
पत्र में जांच एजेंसी से अनुरोध किया गया है कि संबंधित नेताओं से पूछताछ कर निम्नलिखित बिंदुओं पर जानकारी ली जाए—
- उनके आरोपों का तथ्यात्मक आधार क्या है?
- उन्हें यह जानकारी किस स्रोत से प्राप्त हुई?
- क्या उनके पास आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेज, रिकॉर्ड या अन्य साक्ष्य मौजूद हैं?
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि सांसद संजय सिंह पहले ही एसआईटी के सामने पेश होकर भूमि खरीद से जुड़े कुछ दस्तावेज सौंप चुके हैं। इसलिए उनके भूमि खरीद संबंधी आरोपों पर अलग से कोई टिप्पणी नहीं की गई है।
प्रियंका गांधी के बयान का भी जिक्र
आलोक कुमार ने अपने पत्र में प्रियंका गांधी वाड्रा के उस सार्वजनिक बयान का भी उल्लेख किया है, जिसमें उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या केवल छोटे कर्मचारी सीसीटीवी बंद कर हजारों करोड़ रुपये के चढ़ावे में कथित हेराफेरी कर सकते हैं, या इसके पीछे बड़े लोगों की भी भूमिका हो सकती है।
झूठे आरोप साबित होने पर कार्रवाई की मांग
पत्र में कहा गया है कि यदि संबंधित नेता अपने आरोपों के समर्थन में विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध कराते हैं तो इससे जांच एजेंसियों को सच्चाई तक पहुंचने में मदद मिलेगी। वहीं, यदि जांच में यह पाया जाता है कि आरोप जानबूझकर झूठे, निराधार या बिना किसी तथ्य के लगाए गए थे, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई पर भी विचार किया जाना चाहिए।

