RBI की FCNR योजना को बड़ी सफलता, 31 जुलाई तक भारत में आए 40.81 अरब डॉलर

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए शुरू की गई विशेष योजनाओं को बड़ी सफलता मिली है। केंद्रीय बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक इन योजनाओं के जरिए भारत में 40.81 अरब डॉलर (करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये) की विदेशी मुद्रा आ चुकी है। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
FCNR योजना का सबसे बड़ा योगदान
विदेशी मुद्रा जुटाने में सबसे बड़ा योगदान FCNR (फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट) जमा योजना का रहा है। इस योजना के तहत अब तक 36.72 अरब डॉलर जमा हुए हैं। यह आंकड़ा 2013 में बने 26 अरब डॉलर के पिछले रिकॉर्ड से भी अधिक है।
क्या है FCNR योजना?
FCNR योजना के तहत विदेशों में रहने वाले भारतीय (NRI) अमेरिकी डॉलर समेत अन्य विदेशी मुद्राओं में भारत के बैंकों में जमा कर सकते हैं। इस जमा पर उन्हें आकर्षक ब्याज मिलता है और विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का जोखिम भी कम रहता है। RBI ने बैंकों को सितंबर के अंत तक इन जमाओं को शून्य-लागत हेजिंग के तहत स्वैप करने की भी सुविधा दी है।
दो सप्ताह में तेज बढ़ोतरी
17 जुलाई तक FCNR योजना के तहत 20.72 अरब डॉलर जमा हुए थे, लेकिन सिर्फ दो सप्ताह में यह आंकड़ा बढ़कर 36.72 अरब डॉलर पहुंच गया। यानी इस अवधि में करीब 77 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
इसके अलावा:
- एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) के जरिए 1.51 अरब डॉलर आए।
- ओवरसीज फॉरेन करेंसी बॉरोइंग (OFCB) के तहत 2.57 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा भारत पहुंची।
सितंबर तक और बढ़ सकता है निवेश
विशेषज्ञों का मानना है कि अगस्त और सितंबर में परिपक्व होने वाली पुरानी FCNR जमा का बड़ा हिस्सा नई योजना में दोबारा निवेश किया जा सकता है। ऊंची ब्याज दरें भी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं।
SBI का अनुमान है कि सितंबर के अंत तक FCNR जमा 70 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है, जबकि इन योजनाओं के जरिए कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह 85 अरब डॉलर तक होने की संभावना है।
UAE से सबसे ज्यादा निवेश
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रहने वाले भारतीयों ने FCNR योजना में सबसे अधिक निवेश किया है। अनुमान है कि अब तक जुटाई गई कुल राशि में 10 अरब डॉलर से अधिक सिर्फ UAE से आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि योजना की कुल जमा राशि में आधे से ज्यादा योगदान अकेले UAE का हो सकता है।

