रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बदली दुनिया की सुरक्षा सोच, छोटे देश भी परमाणु रणनीति पर कर रहे नए फैसले

रूस-यूक्रेन युद्ध और बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच दुनिया के कई छोटे देश अपनी सुरक्षा नीति में बड़े बदलाव कर रहे हैं। जो देश पहले परमाणु हथियारों को अपनी रणनीति का हिस्सा नहीं मानते थे, अब वे बदलते हालात को देखते हुए पुराने कानूनों और नीतियों की समीक्षा कर रहे हैं। रूस से बढ़ते खतरे, उत्तर कोरिया के लगातार मिसाइल परीक्षण और यूरोप में बढ़ती असुरक्षा ने कई देशों को भविष्य के सभी विकल्प खुले रखने पर मजबूर कर दिया है।
सबसे ताजा उदाहरण लिथुआनिया का है। अब तक वहां के संविधान में देश की जमीन पर परमाणु हथियार रखने पर रोक थी, लेकिन सरकार और प्रमुख राजनीतिक दल इस प्रतिबंध को हटाने पर सहमत हो गए हैं। सरकार का कहना है कि रूस से बढ़ते सुरक्षा खतरे को देखते हुए भविष्य में जरूरत पड़ने पर NATO सहयोगियों के परमाणु हथियार तैनात करने का विकल्प खुला रहना चाहिए। हालांकि फिलहाल ऐसी कोई तैनाती प्रस्तावित नहीं है।
दक्षिण कोरिया भी उत्तर कोरिया के बढ़ते परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को लेकर लगातार चिंतित है। इसी वजह से वहां समय-समय पर अपने परमाणु हथियार विकसित करने पर बहस होती रहती है। हालांकि सरकार ने अब तक ऐसा कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया है और देश अभी भी परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का पालन कर रहा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पोलैंड ने भी अपनी सुरक्षा रणनीति को मजबूत किया है। पोलैंड कई बार NATO के परमाणु हथियार अपने क्षेत्र में तैनात करने की इच्छा जता चुका है। हालांकि उसने खुद परमाणु हथियार विकसित करने की कोई घोषणा नहीं की है और वह पश्चिमी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के पक्ष में है।
वहीं, बेलारूस ने रूस के सामरिक (टैक्टिकल) परमाणु हथियार अपने क्षेत्र में तैनात करने की अनुमति दे दी है। हालांकि इन हथियारों का नियंत्रण रूस के पास ही माना जाता है। दूसरी ओर, जापान आज भी परमाणु हथियार विकसित करने की नीति से दूर है। परमाणु हमले का दर्द झेल चुके इस देश में चीन और उत्तर कोरिया से बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस जरूर होती है, लेकिन सरकार आधिकारिक तौर पर NPT के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए हुए है।
इन घटनाओं से साफ है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में कई देश अपनी रक्षा नीतियों पर नए सिरे से विचार कर रहे हैं। हालांकि अधिकांश देश अभी परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में नहीं बढ़े हैं, लेकिन भविष्य के विकल्प खुले रखने की कोशिशें यह संकेत जरूर देती हैं कि दुनिया की रणनीतिक सोच तेजी से बदल रही है।

