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Chhattisgarh

Balod Sugar Mill Crisis: 4 साल में 1215 हेक्टेयर घटा गन्ने का रकबा, 95 लाख बोनस लंबित

बालोद : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले की एकमात्र सहकारी शक्कर मिल इन दिनों गन्ने की कमी के संकट से जूझ रही है। जिले में लगातार गन्ने का रकबा घटने से आने वाले पेराई सत्र में मिल के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। पिछले चार साल में जिले में गन्ने की खेती का क्षेत्रफल करीब 1215 हेक्टेयर कम हो गया है। वहीं किसानों की संख्या में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। भुगतान में देरी और करीब 95 लाख रुपए बोनस की राशि लंबित होने से किसानों का भरोसा गन्ने की खेती से उठता जा रहा है।

दिसंबर से शक्कर मिल का नया पेराई सत्र शुरू होना प्रस्तावित है। मिल प्रबंधन की ओर से मेंटेनेंस की तैयारी की जा रही है, लेकिन पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध नहीं होने के कारण मिल को लंबे समय तक संचालित करना मुश्किल नजर आ रहा है। प्रबंधन के अनुसार मिल को लगातार पांच महीने चलाने के लिए करीब 3500 हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती और लगभग दो लाख मीट्रिक टन गन्ने की जरूरत होती है। मौजूदा स्थिति में मिल को तीन महीने तक नियमित रूप से चलाना भी चुनौती बन गया है।

चार साल में 1215 हेक्टेयर घटा गन्ने का रकबा

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार खरीफ 2026 में जिले में 730 हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ना लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। हालांकि अब तक केवल 585 हेक्टेयर में ही गन्ने की बुवाई हो सकी है। इससे साफ है कि निर्धारित लक्ष्य की तुलना में भी गन्ने का रकबा काफी पीछे है।

गन्ना उत्पादक किसान संघ के अनुसार वर्ष 2010 से 2022-23 तक जिले में करीब 1500 से 2000 किसान गन्ने की खेती करते थे। उस समय गन्ने का रकबा लगभग 1800 हेक्टेयर तक पहुंच गया था। लेकिन वर्ष 2023 के बाद किसानों की संख्या लगातार कम होती गई। अब औसतन करीब 700 किसान ही गन्ने की खेती कर रहे हैं और खेती का क्षेत्रफल लगभग 500 से 600 हेक्टेयर के आसपास सिमट गया है।

मिल को पांच महीने चलाने के लिए 3500 हेक्टेयर गन्ना जरूरी

कारखाना प्रबंधन के मुताबिक मिल को लगातार पांच महीने चलाने के लिए करीब 3500 हेक्टेयर क्षेत्र से गन्ने की जरूरत होगी। इसकी पेराई क्षमता को देखते हुए लगभग दो लाख मीट्रिक टन गन्ने की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन वर्तमान में जिले में गन्ने का उत्पादन इस जरूरत के मुकाबले काफी कम है।

गन्ने की उपलब्धता कम होने के कारण मिल को पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल नहीं मिल पाता। इसका असर पेराई सत्र पर भी पड़ता है और मिल लंबे समय तक नियमित रूप से संचालित नहीं हो पाती। गन्ने की कमी के चलते बीच-बीच में मिल के संचालन में रुकावट और ब्रेकडाउन जैसी स्थिति भी सामने आती है।

95 लाख रुपए बोनस की राशि अब भी लंबित

गन्ना किसानों की सबसे बड़ी नाराजगी भुगतान को लेकर है। किसानों का कहना है कि गन्ने का भुगतान समय पर नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है। पिछले सप्ताह भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने कलेक्ट्रेट गेट के सामने धरना भी दिया था। प्रशासन की ओर से किसानों को एक सप्ताह के भीतर भुगतान कराने का आश्वासन दिया गया था।

मिल प्रबंधन का कहना है कि किसानों की गन्ने की मूल राशि का भुगतान किया जा चुका है, लेकिन करीब 95 लाख रुपए की बोनस राशि अभी लंबित है। बोनस भुगतान की प्रक्रिया जारी होने की बात प्रबंधन की ओर से कही जा रही है। किसानों का कहना है कि भुगतान में बार-बार देरी होने के कारण गन्ने की खेती उनके लिए आर्थिक रूप से जोखिम भरी होती जा रही है।

90 प्रतिशत सब्सिडी के बावजूद नहीं बढ़ा रकबा

गन्ने की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग किसानों को बीज पर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी देने की बात कह रहा है। इसके जरिए किसानों को दोबारा गन्ने की खेती की ओर लाने की कोशिश की जा रही है। वहीं शक्कर मिल प्रबंधन भी किसानों से अधिक से अधिक क्षेत्र में गन्ना लगाने की अपील कर रहा है।

हालांकि किसानों का कहना है कि सिर्फ सब्सिडी देने से गन्ने का रकबा बढ़ाना आसान नहीं होगा। किसानों के लिए समय पर भुगतान, बोनस का नियमित भुगतान और गन्ने का उचित मूल्य ज्यादा महत्वपूर्ण है। जब किसान को उसकी फसल की राशि समय पर मिलती है, तभी वह अगले सीजन में उसी फसल को दोबारा लगाने का निर्णय लेता है।

गन्ने की जगह धान को प्राथमिकता दे रहे किसान

गन्ने की खेती से किसानों के दूर होने की एक बड़ी वजह धान को माना जा रहा है। किसानों का कहना है कि धान का समर्थन मूल्य लगातार बढ़ रहा है और भुगतान की व्यवस्था भी अपेक्षाकृत स्पष्ट है। इसके मुकाबले गन्ने की राशि के भुगतान में देरी होने से किसानों को लंबे समय तक अपनी रकम का इंतजार करना पड़ता है।

ग्राम सुंदरा के किसान छगन देशमुख ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2010 से 2025 तक करीब 20 एकड़ क्षेत्र में गन्ने की खेती की। अब उन्होंने गन्ने की जगह धान की खेती करना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि धान का समर्थन मूल्य बढ़ रहा है, जबकि गन्ने की राशि के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में किसानों के लिए धान ज्यादा भरोसेमंद विकल्प बनता जा रहा है।

दिसंबर में शुरू होना है नया पेराई सत्र

बालोद की सहकारी शक्कर मिल में दिसंबर से नए पेराई सत्र की तैयारी की जा रही है। मिल प्रबंधन के अनुसार दिसंबर से पहले मेंटेनेंस का काम पूरा कर लिया जाएगा। साथ ही किसानों को गन्ने की खेती के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है।

प्रबंधन की कोशिश है कि जिले के किसानों द्वारा उत्पादित गन्ने से ही मिल का संचालन किया जाए। लेकिन इसके लिए सबसे बड़ी जरूरत गन्ने का रकबा बढ़ाने की है। यदि किसानों की संख्या और गन्ने का क्षेत्रफल इसी तरह कम होता रहा तो आने वाले वर्षों में मिल के संचालन पर और बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

किसानों का भरोसा जीतना होगी सबसे बड़ी चुनौती

बालोद शुगर मिल के सामने सिर्फ गन्ने की उपलब्धता बढ़ाने की चुनौती नहीं है, बल्कि किसानों का भरोसा वापस हासिल करना भी जरूरी है। चार साल में गन्ने के रकबे में आई बड़ी गिरावट और किसानों की घटती संख्या यह संकेत दे रही है कि मौजूदा व्यवस्था से किसान संतुष्ट नहीं हैं।

ऐसे में समय पर भुगतान, लंबित बोनस का निपटारा, उचित मूल्य और बेहतर प्रोत्साहन व्यवस्था के जरिए ही किसानों को दोबारा गन्ने की खेती की ओर लाया जा सकता है। दिसंबर में शुरू होने वाले पेराई सत्र से पहले यदि पर्याप्त गन्ने की व्यवस्था नहीं होती है तो सहकारी शक्कर मिल के सामने संचालन से जुड़ी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

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Shruti Jangde

With over 6 years of experience in the media industry, I specialize in news anchoring, copywriting, and digital journalism. I cover a wide range of news, delivering accurate, unbiased, and fact-based reporting. Passionate about bringing the truth to the public, I am committed to ethical journalism and credible storytelling. My goal is to inform, inspire, and make a meaningful impact through responsible reporting.

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