संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, मुल्ला अफरोज की NSA हिरासत रद्द; सरकार पर 10 लाख का जुर्माना

संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत को रद्द कर दिया है। अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को भी निरस्त कर दिया, जिसमें हिरासत को बरकरार रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने कहा कि पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे के आधार पर NSA के तहत हिरासत का आदेश नहीं दिया जा सकता।
पुलिस हिरासत में कबूलनामे को लेकर उठे सवाल
मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान मुल्ला अफरोज की ओर से दलील दी गई कि उसके खिलाफ की गई कार्रवाई में पुलिस हिरासत के दौरान दर्ज कथित कबूलनामे को आधार बनाया गया था। याचिका में यह भी कहा गया कि केवल कई आपराधिक मामलों में आरोपी होना अपने आप में एहतियाती हिरासत का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता।
सरकार ने सार्वजनिक व्यवस्था का दिया हवाला
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर यह आशंका थी कि मुल्ला अफरोज भविष्य में हिंसा या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। सरकार ने इसी आधार पर NSA के तहत हिरासत को उचित बताया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे को एहतियाती हिरासत का वैध आधार मानने से इनकार कर दिया।
हाई कोर्ट का फैसला भी हुआ निरस्त
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुल्ला अफरोज की NSA के तहत हिरासत समाप्त हो गई है। इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हिरासत के आदेश को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस फैसले को भी निरस्त कर दिया। अदालत के फैसले के साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। (indiankanoon.org)



