बेटे के हत्यारे को गले लगाने वाले पिता की कहानी, गुस्से से आगे इंसानियत का बड़ा सबक

अमेरिका के केंटकी में अप्रैल 2015 में 22 वर्षीय एक युवक की लूट के दौरान चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। करीब दो साल बाद मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सजा के दौरान मृतक के पिता अदालत में मौजूद थे। बेटे की हत्या के बाद उनके भीतर गुस्सा और दर्द होना स्वाभाविक था, लेकिन उन्होंने बदले या नफरत की जगह एक अलग रास्ता चुना।
पिता ने हत्यारे को गले लगाया
सजा सुनाए जाने के दौरान पिता ने कहा कि उनका गुस्सा उस व्यक्ति से ज्यादा उस अंधेरे से है, जिसने उसे किसी दूसरे इंसान की जिंदगी की कीमत न समझने पर मजबूर किया। इसके बाद वह दोषी ठहराए गए युवक के पास गए और उसे गले लगा लिया। उनका यह कदम माफी से कहीं आगे की भावना को दिखाता है।
उन्होंने अपराध को छोटा नहीं माना और न ही यह कहा कि जो हुआ उसे भुला दिया जाए। उनका बेटा वापस नहीं आ सकता था, लेकिन वह यह तय करना चाहते थे कि उस घटना का असर उनकी बाकी जिंदगी पर किस तरह होगा।
गुस्सा किस तरह सोच को बदल देता है
इंसान के मन में कई तरह के विचार आते हैं। हर विचार को रोक पाना संभव नहीं होता, लेकिन किसी विचार को बार-बार दोहराना और उसे अपने व्यवहार का हिस्सा बना लेना हमारे हाथ में होता है। कई बार गुस्सा हमें ऐसी कहानी पर विश्वास करने के लिए मजबूर कर देता है, जिसमें हम हमेशा सही और दूसरा व्यक्ति हमेशा गलत दिखाई देता है।
छोटी-छोटी घटनाओं में भी यही स्थिति देखने को मिलती है। किसी पुराने विवाद की बात वर्षों तक याद रह सकती है। किसी रिश्ते में कही गई एक बात लंबे समय तक मन में बनी रह सकती है। कई बार घटना खत्म हो जाती है, लेकिन इंसान उसके बारे में सोचता रहता है और उस पुराने गुस्से को अपने साथ लेकर चलता रहता है।
विचार और व्यवहार के बीच फैसला
हर विचार को नियंत्रित करना संभव नहीं है, लेकिन यह तय करना संभव है कि किस विचार को महत्व देना है। गुस्से में अक्सर एक आवाज बदला लेने और जवाब देने के लिए उकसाती है, जबकि दूसरी आवाज कुछ देर रुककर परिणाम के बारे में सोचने को कहती है।
ऐसे समय में खुद से यह सवाल करना मददगार हो सकता है कि अगर इसी गुस्से और विचार को लंबे समय तक अपने भीतर रखा गया, तो इसका असर हमारे व्यक्तित्व और जीवन पर क्या होगा। भावना और प्रतिक्रिया के बीच मिला छोटा-सा समय कई बार बड़े फैसले को बदल सकता है।
अपराध और इंसान को अलग नजर से देखना
उस पिता का फैसला इस बात को दिखाता है कि किसी अपराध के परिणाम और अपराध करने वाले व्यक्ति में बदलाव की संभावना को अलग-अलग देखा जा सकता है। किसी गलत काम की जिम्मेदारी तय होना जरूरी है, लेकिन इसके साथ यह संभावना भी बनी रहती है कि इंसान अपने किए पर विचार करे और भविष्य में बदलने की कोशिश करे।
इस घटना का संदेश यह भी है कि किसी दूसरे व्यक्ति के गलत काम को अपने पूरे जीवन की पहचान बनने से रोका जा सकता है। बीती घटना को बदला नहीं जा सकता, लेकिन उसके बाद अपने जीवन को किस दिशा में ले जाना है, इसका फैसला इंसान खुद कर सकता है।



