संतरा बेचकर पद्म श्री पाने वाले हजब्बा को चुनाव आयोग का नोटिस: 2002 की वोटर लिस्ट में सिर्फ ‘हजब्बा’ नाम, 11 सितंबर को सुनवाई

बेंगलुरु। संतरे बेचकर अपने गांव में स्कूल बनाने वाले और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित हरेकला हजब्बा (Hajabba) को अब चुनाव आयोग के एक नोटिस का सामना करना पड़ रहा है।
कर्नाटक में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के तहत उन्हें सोमवार को नोटिस जारी किया गया। इसकी वजह पुरानी मतदाता सूची में उनके नाम को लेकर सामने आई विसंगति बताई गई है।
हरेकला हजब्बा को 2020 में देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। उनका नाम शिक्षा के क्षेत्र में किए गए असाधारण काम के कारण देशभर में चर्चित रहा है। हालांकि, अब मतदाता सूची के सत्यापन के दौरान उनके नाम को लेकर रिकॉर्ड में अंतर सामने आया है।
2002 की वोटर लिस्ट में सिर्फ ‘हजब्बा’
सूत्रों के मुताबिक, 2002 की पुरानी मतदाता सूची में हरेकला हजब्बा (Hajabba) का नाम केवल ‘हजब्बा’ के तौर पर दर्ज है। जबकि बाद के सरकारी दस्तावेजों में उनका पूरा नाम ‘हरेकला हजब्बा’ दर्ज है।
उनके आधार कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट और नए वोटर आईडी कार्ड समेत पद्म श्री पुरस्कार और अन्य सम्मानों से जुड़े दस्तावेजों में भी नाम हरेकला हजब्बा ही दर्ज है। ऐसे में पुराने और नए रिकॉर्ड में नाम अलग होने के कारण चुनाव आयोग की ओर से सत्यापन के लिए नोटिस दिया गया है।
11 सितंबर को ग्राम पंचायत में सुनवाई
चुनाव आयोग का नोटिस आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के जरिए साक्षरता कार्यकर्ता तक पहुंचाया गया। इसके बाद कार्यकर्ता हजब्बा के घर पहुंचे और उन्हें नोटिस सौंपा।
नोटिस में उन्हें 11 सितंबर को ग्राम पंचायत के सामने पेश होने और अपने नाम से जुड़े सभी जरूरी मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। सुनवाई के दौरान ग्राम पंचायत का अकाउंटेंट भी मौजूद रहेगा। दस्तावेजों की जांच और सत्यापन के बाद रिकॉर्ड में मौजूद गड़बड़ी को दूर करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
हजब्बा को उम्मीद है कि उनके पास मौजूद दस्तावेजों के आधार पर नाम से जुड़ी यह समस्या आसानी से दूर हो जाएगी। उनके सभी प्रमुख सरकारी और पुरस्कार संबंधी दस्तावेजों में उनका पूरा नाम दर्ज है।
संतरे बेचकर शुरू किया शिक्षा का अभियान
हरेकला हजब्बा की कहानी बेहद प्रेरणादायक रही है। वे कर्नाटक के मंगलुरु में सड़कों और बस स्टैंड के आसपास संतरे बेचकर अपनी आजीविका चलाते थे। फल बेचने से होने वाली आमदनी सीमित थी, लेकिन शिक्षा को लेकर उनका जुनून लगातार बढ़ता गया।
उन्होंने अपने गांव नेवपाडापु में बच्चों के लिए एक प्राथमिक स्कूल बनाने का सपना देखा। इसके लिए उन्होंने संतरे बेचकर होने वाले रोज के मुनाफे से पैसे बचाने शुरू किए। धीरे-धीरे उनकी बचत जमा हुई और उन्होंने गांव में स्कूल के निर्माण की दिशा में काम शुरू किया।
उनकी इस पहल ने उन्हें स्थानीय स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक पहचान दिलाई। शिक्षा के लिए किए गए उनके योगदान को देखते हुए उन्हें वर्ष 2020 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
SIR के तहत लाखों लोगों को नोटिस
कर्नाटक में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा रहा है। हरेकला हजब्बा भी उन करीब 44 लाख लोगों में शामिल हैं, जिन्हें दावों और आपत्तियों के निपटारे के चरण के दौरान नोटिस मिलने हैं।
यह प्रक्रिया 24 अगस्त से 22 अक्टूबर तक चलने वाली है। इसके तहत पुराने मतदाता रिकॉर्ड और मौजूदा दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है। नाम, पता और अन्य विवरणों में अंतर मिलने पर संबंधित मतदाताओं को दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जा रहा है।
दस्तावेजों के आधार पर दूर होगी गड़बड़ी
हरेकला हजब्बा (Hajabba) के मामले में मुख्य अंतर पुराने मतदाता रिकॉर्ड में दर्ज नाम और वर्तमान सरकारी दस्तावेजों में दर्ज नाम को लेकर है। 2002 की सूची में जहां केवल ‘हजब्बा’ लिखा गया है, वहीं वर्तमान रिकॉर्ड में उनका पूरा नाम ‘हरेकला हजब्बा’ है।
अब 11 सितंबर की सुनवाई में उनके दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद चुनावी रिकॉर्ड में आवश्यक सुधार की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।
एक ओर जहां हजब्बा ने सीमित साधनों के बावजूद अपने गांव के बच्चों के लिए स्कूल बनाकर शिक्षा की मिसाल कायम की, वहीं दूसरी ओर मतदाता सूची में नाम के अंतर ने उन्हें SIR प्रक्रिया के तहत नोटिस पाने वालों की सूची में ला दिया है। अब उनकी नजर 11 सितंबर की सुनवाई पर है, जहां दस्तावेजों के आधार पर इस रिकॉर्ड संबंधी गड़बड़ी का समाधान होने की उम्मीद है।



