रोटी का ये आसान उपाय, मान्यता है कि घर में बनी रहती है सुख-समृद्धि
रसोई का ये नियम बदल सकता है घर का माहौल,जानिए क्या कहती हैं मान्यताएं

नई दिल्ली | भारतीय सनातन परंपरा में रसोईघर को केवल भोजन बनाने का स्थान नहीं, बल्कि घर की सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा पवित्र स्थान माना जाता है। इसी कारण भोजन बनाने और परोसने से जुड़े कई नियम और मान्यताएं प्रचलित हैं। इनमें सबसे प्रमुख परंपरा पहली रोटी(Bread) गाय और आखिरी रोटी कुत्ते को देने की मानी जाती है।
पहली रोटी को ‘गोग्रास’ कहा जाता है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पहली रोटी(Bread) को ‘गोग्रास’ कहा जाता है और इसे गाय को अर्पित करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है तथा मां अन्नपूर्णा की कृपा बनी रहती है। कुछ लोग इसे वास्तु दोषों को कम करने से भी जोड़कर देखते हैं।
कुत्तों को रोटी देने से राहु केतु दोष होते हैं कम
वहीं, आखिरी रोटी(Bread) कुत्ते को खिलाने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में कुत्ते को भगवान भैरव से जोड़ा जाता है। ऐसी मान्यता है कि कुत्ते को भोजन कराने से राहु-केतु और शनि से जुड़े नकारात्मक प्रभावों को शांत करने में मदद मिलती है। हालांकि, इन मान्यताओं के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
धर्म और परंपरा से जुड़े इन नियमों का पालन करना या न करना व्यक्ति की आस्था और विश्वास पर निर्भर करता है, लेकिन पशुओं के प्रति दया और उन्हें भोजन कराना भारतीय संस्कृति में सेवा और पुण्य का कार्य माना गया है।

