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‘मैं गांधी नहीं हूं, अपना हीरो खुद बनिए’, सोनम वांगचुक की लोगों से भावुक अपील

नई दिल्ली। लद्दाख के शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जंतर-मंतर पर चल रहे अपने अनिश्चितकालीन अनशन के दौरान देशवासियों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वह न तो कोई ‘आधुनिक गांधी’ हैं और न ही कोई हीरो, बल्कि एक आम नागरिक हैं जो अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

14वें दिन भी जारी अनशन, स्वास्थ्य पर असर

परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में शामिल सोनम वांगचुक का अनशन 14वें दिन भी जारी रहा। संगठन की ओर से जारी हेल्थ अपडेट के मुताबिक, अनशन के दौरान उनका करीब 7.5 किलो वजन कम हो चुका है। हालांकि उन्होंने कहा कि वह अभी भी अपने संकल्प पर कायम हैं।

‘किसी और में हीरो मत ढूंढिए’

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक वीडियो में वांगचुक ने कहा कि कई लोग उन्हें 21वीं सदी का गांधी या हीरो बताते हैं, लेकिन वह इससे सहज महसूस नहीं करते। उन्होंने कहा, “मैं गांधी नहीं हूं, मैं सिर्फ एक साधारण नागरिक हूं। किसी और में हीरो मत ढूंढिए, अपने जीवन के हीरो खुद बनिए और एक जिम्मेदार नागरिक की तरह अपनी जिम्मेदारियां निभाइए।”

छात्रों की खुदकुशी पर जताई चिंता

वांगचुक ने कथित परीक्षा धांधली से परेशान होकर छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं पर दुख जताया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे मूकदर्शक न बनें। उन्होंने कहा कि अगर रोज जंतर-मंतर नहीं आ सकते, तो कम से कम एक दिन आंदोलन का समर्थन जरूर करें। जो लोग दिल्ली नहीं पहुंच सकते, वे अपने शहर में शांतिपूर्ण तरीके से उपवास रखकर भी समर्थन जता सकते हैं।

20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल होने की अपील

सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को प्रस्तावित शांतिपूर्ण ‘संसद मार्च’ में बड़ी संख्या में लोगों से शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि सांसदों तक छात्रों की आवाज पहुंचाने के लिए नागरिकों की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा, “आपको हमारी तरह कई दिनों तक भूखा रहने की जरूरत नहीं है, लेकिन 20 जुलाई को एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर अपनी मौजूदगी जरूर दर्ज कराइए।”

‘जबरन हटाया गया तो होगा अधिकारों का उल्लंघन’

वांगचुक ने यह भी कहा कि अगर उन्हें धरना स्थल से जबरन हटाने की कोशिश की गई, तो यह उनके शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन होगा। उन्होंने साफ कहा कि वह अपनी इच्छा से धरने पर बैठे हैं और आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।

 

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