छत्तीसगढ़ से मानसून की विदाई, 1155 मिमी बारिश ने कहीं दी राहत तो कहीं बरपाया कहर

रायपुर। चार महीने के लंबे सफर के बाद छत्तीसगढ़ से मानसून की विदाई हो गई है। इस साल प्रदेश में मानसून का असर मिला-जुला रहा। कहीं झमाझम बारिश ने जलसंकट की चिंता दूर की, तो कहीं लगातार बारिश और बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया। इस मानसून सीजन में छत्तीसगढ़ में औसतन 1155.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य बारिश के मुकाबले 102.1 फीसदी यानी करीब 2.1 फीसदी अधिक है।
मानसून की अच्छी बारिश से प्रदेश के अधिकांश जलाशय भर गए हैं। इससे आने वाले समय में पेयजल और रबी फसलों के लिए पानी की उपलब्धता को लेकर राहत मिली है। हालांकि, दूसरी ओर अत्यधिक बारिश ने कई जिलों में धान की फसल को नुकसान पहुंचाया। बस्तर और बिलासपुर समेत कई क्षेत्रों में बाढ़ के हालात बने, जबकि कुछ जिलों में मानसून के अंत तक अपेक्षाकृत कम बारिश दर्ज की गई।
यानी इस बार मानसून ने छत्तीसगढ़ को कहीं खुशी तो कहीं गम दिया।
1155.3 मिमी बारिश, लेकिन हर जिले में अलग तस्वीर
पूरे प्रदेश की औसत बारिश सामान्य से अधिक रही, लेकिन जिलेवार आंकड़ों में काफी अंतर दिखाई दिया। बलरामपुर इस मानसून में सबसे अधिक बारिश वाले जिलों में रहा। यहां औसत बारिश 1556.6 मिलीमीटर दर्ज की गई, जो सामान्य का करीब 165.3 फीसदी है।
इसके उलट बेमेतरा में सबसे कम बारिश दर्ज की गई। यहां कुल बारिश 674.9 मिलीमीटर रही, जो सामान्य का केवल 80.4 फीसदी है।
इससे साफ है कि प्रदेश में औसत बारिश भले ही सामान्य से ज्यादा रही हो, लेकिन कई इलाकों में बारिश का वितरण एक समान नहीं रहा।
बिलासपुर में रिकॉर्ड बारिश से बने बाढ़ जैसे हालात
मानसून के दौरान बिलासपुर में एक ही दिन में रिकॉर्ड बारिश ने शहर की व्यवस्थाओं की परीक्षा ले ली। कुछ ही घंटों की मूसलाधार बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में पानी भर गया।
निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई और लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा। कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गईं और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।
अचानक हुई तेज बारिश ने शहरी जल निकासी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए।
बस्तर में बारिश बनी आफत
बस्तर संभाग में भी इस मानसून के दौरान भारी बारिश का असर देखने को मिला। लगातार बारिश के कारण नदियां और नाले उफान पर आ गए। कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात बने और ग्रामीण इलाकों का संपर्क प्रभावित हुआ।
कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा। भारी बारिश ने आवागमन के साथ-साथ खेती और स्थानीय जनजीवन को भी प्रभावित किया।
इस क्षेत्र में मानसून की बारिश ने जहां जलस्रोतों को भरने का काम किया, वहीं अत्यधिक बारिश कई लोगों के लिए परेशानी का कारण भी बनी।
प्रदेश के बड़े जलाशयों में भरपूर पानी
मानसून की विदाई के समय प्रदेश के जलाशयों की स्थिति राहत देने वाली है। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य के 12 प्रमुख बड़े जलाशय 92.54 फीसदी तक भर चुके हैं।
वहीं प्रदेश के 34 मध्यम जलाशयों में 95.78 फीसदी जलभराव दर्ज किया गया है।
मणियारी, तांदुला, मुरुमसिल्ली, खारंग और रविशंकर सागर यानी गंगरेल जैसे प्रमुख जलाशयों में पर्याप्त पानी है।
जलाशयों में पानी की अच्छी उपलब्धता से आने वाले महीनों में पेयजल आपूर्ति के साथ रबी सीजन की खेती के लिए भी राहत मिलने की उम्मीद है।
रायपुर में भी बारिश ने दिखाया अपना असर
राजधानी रायपुर में इस मानसून सीजन में 1307.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य का करीब 135.4 फीसदी है।
मानसून के दौरान राजधानी में कई बार तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी। सड़कें और कॉलोनियां पानी से प्रभावित हुईं। कई जगह नालों के उफान पर आने से लोगों को परेशानी हुई और यातायात भी प्रभावित हुआ।
राजधानी में हुई भारी बारिश ने शहर की ड्रेनेज और जल निकासी व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े किए।
धान की फसल पर भी पड़ा असर
मानसून की अधिक बारिश का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ा। प्रदेश में धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है। ऐसे में जहां सामान्य बारिश किसानों के लिए फायदेमंद रही, वहीं कुछ क्षेत्रों में जरूरत से ज्यादा बारिश ने फसलों को नुकसान पहुंचाया।
विशेषकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में खेतों में पानी भरने और फसल खराब होने की समस्या सामने आई। यानी अच्छी औसत बारिश के बावजूद हर किसान के लिए मानसून राहत लेकर नहीं आया।
इन जिलों में सामान्य रही बारिश
प्रदेश के कई जिलों में मानसून के दौरान सामान्य बारिश दर्ज की गई। इनमें सूरजपुर, बलौदाबाजार, महासमुंद, धमतरी, मुंगेली, दुर्ग, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कोंडागांव और दंतेवाड़ा शामिल हैं।
इन जिलों में बारिश का आंकड़ा अपेक्षाकृत संतुलित रहा, जिससे अत्यधिक बारिश से होने वाले नुकसान और कम बारिश से पैदा होने वाली चिंता दोनों से काफी हद तक राहत मिली।
मानसून की विदाई के बाद क्या?
अब मानसून की विदाई के साथ प्रदेश में मौसम का मिजाज धीरे-धीरे बदलने की उम्मीद है। बारिश का दौर कम होने के साथ तापमान में भी बदलाव देखने को मिलेगा।
इस बार अच्छी बारिश से जलाशयों में पर्याप्त पानी जमा हुआ है, जो आने वाले समय में प्रदेश के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। हालांकि, मानसून के दौरान हुई बाढ़, जलभराव और फसल नुकसान ने यह भी दिखाया कि सिर्फ ज्यादा बारिश होना पर्याप्त नहीं है। बारिश के पानी की निकासी, बाढ़ प्रबंधन और शहरी ड्रेनेज व्यवस्था को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है।
कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ में इस साल मानसून औसत से ज्यादा बारिश देकर विदा हुआ। कहीं इस बारिश ने सूखे और जलसंकट से राहत दी, तो कहीं यही बारिश बाढ़ और फसल नुकसान की वजह बन गई। अब प्रदेश की नजर इस बात पर है कि मानसून के बाद का मौसम और आगामी रबी सीजन किस तरह रहता है।
बारिश के प्रमुख आंकड़े
प्रदेश की औसत बारिश: 1155.3 मिमी
सामान्य के मुकाबले: 102.1%
सबसे ज्यादा बारिश: बलरामपुर — 1556.6 मिमी
बलरामपुर में सामान्य: 165.3%
सबसे कम बारिश: बेमेतरा — 674.9 मिमी
बेमेतरा में सामान्य: 80.4%
रायपुर: 1307.4 मिमी
रायपुर में सामान्य: 135.4%
12 बड़े जलाशय: 92.54% भरे
34 मध्यम जलाशय: 95.78% भरे



