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बाबरी मस्जिद मुद्दे से चर्चा में आए हुमायूं कबीर फूट-फूटकर रोए, बोले- राजनीति से ले रहा हूं संन्यास

दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपने बयानों और बाबरी मस्जिद जैसे मुद्दों को लेकर सुर्खियों में रहे आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख और नौदा विधायक हुमायूं कबीर ( Humayun Kabir) ने चुनावी राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया है।

रेजीनगर उपचुनाव के बाद बुधवार को मीडिया के सामने हुमायूं कबीर भावुक हो गए और फूट-फूटकर रोने लगे। पुलिस हिरासत से रिहा होने के एक दिन बाद उन्होंने कहा कि वह स्वेच्छा से राजनीति से पीछे हटने का फैसला कर रहे हैं।

हुमायूं कबीर ने रेजीनगर उपचुनाव को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी जीत सकती है, लेकिन यह जीत जनता का वास्तविक जनादेश नहीं होगी। उन्होंने मतदान के दौरान पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री रहते विधानसभा नहीं जाऊंगा

हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को लेकर भी तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जब तक शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री रहेंगे, तब तक वह विधानसभा नहीं जाएंगे। उन्होंने अपने क्षेत्र के लोगों से माफी मांगने की बात भी कही है।

हुमायूं के मुताबिक, वह दुर्गा पूजा के बाद अपने क्षेत्र में सार्वजनिक बैठक करेंगे। इस बैठक में जनता से माफी मांगने के बाद राजनीति से संन्यास लेने की औपचारिक घोषणा करेंगे। हालांकि, उन्होंने फिलहाल विधायक पद से इस्तीफा देने की घोषणा नहीं की है। इस संबंध में अंतिम फैसला क्षेत्र के लोगों से चर्चा के बाद लेने की बात कही है।

रेजीनगर में बेटे को बनाया था उम्मीदवार

रेजीनगर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में हुमायूं कबीर ने अपने बेटे गोलाम नबी आजाद को आम जनता उन्नयन पार्टी का उम्मीदवार बनाया था। हुमायूं कबीर ने इससे पहले रेजीनगर सीट छोड़कर नौदा विधानसभा सीट अपने पास रखी थी। इसके बाद रेजीनगर में उपचुनाव कराया गया।

चुनाव प्रचार के दौरान हुमायूं लगातार सक्रिय रहे। मतदान के दिन भी वह क्षेत्र में घूमते नजर आए। इसी दौरान पुलिस के साथ उनका विवाद हो गया। 6 अक्टूबर को पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था।

मतदान के दिन पुलिस से हुई थी तीखी बहस

रेजीनगर उपचुनाव के दौरान हुमायूं कबीर ( Humayun Kabir)  की पुलिसकर्मियों से तीखी बहस हुई थी। इसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया। पुलिस का आरोप था कि मतदान केंद्र से बाहर निकलने के बाद हुमायूं ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की और मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की।

दूसरी ओर हुमायूं कबीर ने पुलिस और प्रशासन पर ही चुनाव में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि पुलिस मतदाताओं को प्रभावित कर रही है और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। बाद में उन्हें पुलिस हिरासत से रिहा कर दिया गया।

रिहाई के अगले दिन जब वह मीडिया के सामने आए तो काफी भावुक नजर आए। इसी दौरान उन्होंने चुनावी राजनीति छोड़ने का फैसला सार्वजनिक किया।

बाबरी मस्जिद के मुद्दे से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए

हुमायूं कबीर वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव के दौरान उस समय देशभर में चर्चा में आए थे, जब उन्होंने अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मस्जिद बनाने की घोषणा की थी। रेजीनगर में उनके राजनीतिक अभियान के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से सामने आया था।

उनकी इस घोषणा ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में काफी विवाद खड़ा किया था। चुनाव के दौरान बाबरी मस्जिद के मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई थी। हालांकि, रेजीनगर उपचुनाव के दौरान मस्जिद के मुद्दे की तुलना में विकास, रोजगार और स्थानीय समस्याएं ज्यादा प्रमुख चुनावी मुद्दे बनकर सामने आईं।

हुमायूं कबीर का राजनीतिक सफर पहले भी विवादों से जुड़ा रहा है। वह अपने बयानों और आक्रामक राजनीतिक शैली के कारण लगातार चर्चा में रहे हैं। रेजीनगर उपचुनाव के दौरान पुलिस के साथ हुए विवाद ने एक बार फिर उन्हें सुर्खियों में ला दिया।

BJP की जीत का दावा, लेकिन जनादेश पर सवाल

हुमायूं कबीर ( Humayun Kabir)  ने रेजीनगर उपचुनाव के संभावित नतीजे को लेकर कहा कि BJP इस सीट पर जीत दर्ज कर सकती है। हालांकि, उन्होंने इसके साथ ही चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी जीत को जनता का वास्तविक जनादेश नहीं माना जा सकता।

उनके बयान के बाद बंगाल की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। एक तरफ उनके राजनीति से संन्यास के ऐलान को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगाए गए उनके आरोप भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गए हैं।

हालांकि, हुमायूं कबीर ने अभी विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया है। इसलिए उनके राजनीतिक संन्यास की अंतिम स्थिति उनकी आगामी सार्वजनिक बैठक और औपचारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

दुर्गा पूजा के बाद करेंगे औपचारिक घोषणा

हुमायूं कबीर ने कहा है कि दुर्गा पूजा के बाद वह अपने क्षेत्र के लोगों के साथ सार्वजनिक बैठक करेंगे। इसी दौरान वह लोगों से माफी मांगेंगे और राजनीति से संन्यास लेने की औपचारिक घोषणा करेंगे।

रेजीनगर उपचुनाव, पुलिस हिरासत और चुनावी प्रक्रिया पर आरोपों के बीच उनका भावुक होकर राजनीति छोड़ने का ऐलान पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। अब नजर इस बात पर है कि दुर्गा पूजा के बाद होने वाली बैठक में हुमायूं कबीर क्या फैसला लेते हैं और क्या वह विधायक पद से भी इस्तीफा देते हैं।

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