पाकिस्तान में बिगड़े हालात, खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन और सेना तैनात; कराची में प्रदर्शनों पर रोक

पाकिस्तान में आतंकवाद और राजनीतिक विरोध के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने का फैसला किया है। इसके साथ ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए सेना की तैनाती का आदेश जारी किया गया है। वहीं, कराची में 20 अक्टूबर तक धारा 144 लागू कर रैलियों, धरनों और सार्वजनिक जमावड़ों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर को सौंपे गए अधिकार
संघीय सरकार ने 11 अक्टूबर को खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने का फैसला किया। इसके तहत प्रांतीय सरकार के अधिकार गवर्नर को सौंप दिए गए हैं। सरकार ने 11 सदस्यीय सलाहकार परिषद बनाने और 12 जिलों के प्रशासनिक कामकाज के लिए अलग सचिवालय स्थापित करने की भी घोषणा की है।
अफगानिस्तान की सीमा से लगा यह प्रांत लंबे समय से आतंकवादी हिंसा का सामना कर रहा है। केंद्र सरकार का आरोप है कि प्रांतीय प्रशासन आतंकवाद से निपटने में पर्याप्त सहयोग नहीं कर रहा है। वहीं, इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने इस फैसले को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए विरोध जताया है।
सेना की तैनाती के पीछे सुरक्षा कारण
पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत 11 अक्टूबर को सेना की तैनाती का आदेश जारी किया। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में खैबर पख्तूनख्वा में करीब 6,200 आतंकवादी घटनाएं हुईं, जिनमें लगभग 1,200 लोगों की मौत हुई।
उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रांत में करीब 1.25 लाख पुलिसकर्मी हैं, लेकिन लगभग 17 हजार पद खाली हैं। सरकार का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और आतंकवाद से निपटने के लिए सेना की मदद जरूरी है।
कराची में 20 अक्टूबर तक धरने और रैलियों पर प्रतिबंध
खैबर पख्तूनख्वा के बाद कराची में भी प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। यहां 11 से 20 अक्टूबर तक धारा 144 लागू की गई है। इसके तहत पांच से अधिक लोगों के एक स्थान पर इकट्ठा होने, रैली निकालने और धरना-प्रदर्शन करने पर रोक लगाई गई है।
प्रशासन के अनुसार, प्रदर्शनों के कारण यातायात प्रभावित हो रहा था। इससे आम लोगों की आवाजाही और अस्पतालों तक पहुंचने में भी परेशानी हो रही थी।
इमरान खान की रिहाई को लेकर पीटीआई का विरोध
इमरान खान की रिहाई, संविधान के पालन और कानून के शासन की मांग को लेकर पीटीआई ने कराची में प्रदर्शन की योजना बनाई थी। उनकी गिरफ्तारी और रिहाई का मुद्दा पाकिस्तान की राजनीति में लगातार तनाव का कारण बना हुआ है। पार्टी समर्थक सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज करा रहे हैं।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
पाकिस्तान सरकार के सामने एक ओर आतंकवाद पर नियंत्रण पाने की चुनौती है, तो दूसरी ओर विपक्ष के विरोध और राजनीतिक असंतोष से निपटना भी जरूरी है। खैबर पख्तूनख्वा में सेना की तैनाती और कराची में प्रदर्शनों पर प्रतिबंध से हालात कितने सुधरते हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल इन फैसलों ने सरकार, सेना और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ने की आशंका को और गहरा कर दिया है।



