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Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ का पहला कार्बन न्यूट्रल गांव बनेगा जोरातराई नवीन, AWD तकनीक से धान की खेती में बचेगा पानी

धमतरी। छत्तीसगढ़ में पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। धमतरी जिले के ग्राम जोरातराई नवीन को प्रदेश का पहला कार्बन न्यूट्रल गांव बनाने की तैयारी है। इसके तहत धान की खेती में पानी की खपत कम करने के लिए अल्टरनेट वेटिंग एंड ड्राइंग (AWD) तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही जिले में दलहन और तिलहन फसलों का रकबा दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस पहल का उद्देश्य कृषि क्षेत्र से होने वाले ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना और किसानों को खेती के नए विकल्प उपलब्ध कराना है।

AWD तकनीक से पानी और मीथेन उत्सर्जन में आएगी कमी

धान की खेती में पानी बचाने के लिए AWD तकनीक अपनाई जा रही है। इस पद्धति में खेतों को लगातार पानी से भरा रखने के बजाय फसल की जरूरत के अनुसार अंतराल पर सिंचाई की जाती है। इससे पानी की खपत कम करने के साथ धान के खेतों से होने वाले मीथेन उत्सर्जन को घटाने में भी मदद मिल सकती है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले में इस तकनीक को अपनाने के लिए पात्र किसानों की लगभग 95 प्रतिशत ऑनबोर्डिंग, प्रशिक्षण और क्रियान्वयन संबंधी कार्य पूरे हो चुके हैं। इस पहल के जरिए जोरातराई नवीन को पर्यावरण अनुकूल खेती के मॉडल के रूप में विकसित करने की योजना है।

दलहन-तिलहन का रकबा दोगुना करने की तैयारी

कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए कलेक्टर ने जिले में दलहन और तिलहन फसलों का रकबा दोगुना करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए ग्रामवार कार्ययोजना तैयार की जा रही है। किसानों को उन्नत बीज और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।

इसके अलावा सहकारी समितियों और खरीदी संस्थाओं की सुविधाओं का विस्तार करने की दिशा में काम किया जाएगा, ताकि किसानों को स्थानीय स्तर पर बेहतर बाजार मिल सके और उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने में मदद मिले।

कार्बन क्रेडिट से बढ़ सकती है किसानों की आय

जोरातराई नवीन को कार्बन न्यूट्रल गांव बनाने की योजना के तहत उत्सर्जन कम करने वाली कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके साथ ही पात्र किसानों को कार्बन क्रेडिट के माध्यम से अतिरिक्त आर्थिक लाभ दिलाने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। हालांकि, वास्तविक लाभ संबंधित व्यवस्था, पात्रता और उत्सर्जन में कमी के सत्यापन पर निर्भर करेगा।

समयसीमा में काम पूरा करने के निर्देश

कलेक्टर ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समयसीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं। योजना के तहत जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देकर टिकाऊ कृषि व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

यदि यह मॉडल सफल होता है, तो छत्तीसगढ़ के अन्य गांवों में भी पानी बचाने वाली कृषि तकनीकों और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने का रास्ता खुल सकता है।

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