मणिपुर में कुकी-नगा समुदायों के बीच गोलीबारी, 1 की मौत; 4 घायल, 15 घरों में आगजनी

दिल्ली। मणिपुर के कामजोंग जिले में कुकी (KUKI) और नगा समुदायों के बीच हिंसा का नया मामला सामने आया है। चसाद गांव में शनिवार दोपहर हथियारबंद समूहों के बीच गोलीबारी हुई, जो शाम तक जारी रही। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हुए हैं। हिंसा के बाद कुकी समुदाय के 15 घरों में आग लगा दी गई। घटना के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है और लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाते देखा गया।
स्थानीय लोगों ने हमले के पीछे नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-इसाक मुइवा (NSCN-IM) और म्यांमार के तांगखुल उग्रवादियों का हाथ होने का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस और सुरक्षा बल घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
दोपहर 2:30 बजे शुरू हुई गोलीबारी
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, चसाद गांव में शनिवार दोपहर करीब 2:30 बजे दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी (KUKI) शुरू हुई। संघर्ष शाम तक चलता रहा। इस दौरान गांव के मुखिया थंगजाहौ हाओकिप समेत खाइलुन हाओकिप, सेइखोहौ हाओकिप, हेगिन हाओकिप और सेइपाओ हाओकिप घायल हो गए।
असम राइफल्स के जवानों ने घायलों को सुरक्षित निकालकर अर्धसैनिक बल के अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान सेइखोहौ हाओकिप की मौत हो गई। बाकी चार घायलों की स्थिति और उपचार को लेकर स्थानीय स्तर पर जानकारी सामने आई है। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है।
गोलीबारी के बाद कुकी समुदाय के 15 घरों में आगजनी की गई। कई घरों को नुकसान पहुंचने से प्रभावित परिवारों के सामने रहने और जरूरी सामान की व्यवस्था करने की चुनौती खड़ी हो गई है। सामने आई तस्वीरों में लोग अपने घर छोड़कर जाते दिखाई दे रहे हैं। एक महिला अपनी बच्ची को पीठ पर बैठाकर सुरक्षित स्थान की ओर जाती नजर आई।
कामजोंग मुख्यालय में तीन नागरिकों को लगी गोली
हिंसा के बीच कामजोंग जिला मुख्यालय में भी गोलीबारी की एक अलग घटना सामने आई। नगा समुदाय के तीन नागरिकों को गोली लगी। नगा विलेज गार्ड की ईस्टर्न कमांड के मुताबिक, घायलों की पहचान टी. चिथुंग, एस. मालुंग और एम. शिथुंग के रूप में हुई है। तीनों नागरिक रक्षा स्वयंसेवक बताए गए हैं।
घायलों को कामजोंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई गई। संगठन ने आरोप लगाया कि कुकी हथियारबंद समूहों ने तांगखुल नगा समुदाय के लोगों को निशाना बनाया। संगठन ने चसाद में तैनात असम राइफल्स के जवानों पर हमलावरों की मदद करने और नागरिक इलाकों में स्टन बमों का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया है। संगठन के अनुसार, इससे संपत्ति को नुकसान पहुंचा। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सुरक्षा बलों की तैनाती की मांग
कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (CoTU) ने चसाद गांव में हुई हिंसा की निंदा की है। संगठन ने राज्य सरकार से इलाके में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती करने की मांग की है, ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और हिंसा को आगे फैलने से रोका जा सके।
मणिपुर की उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने 17 अक्टूबर को जारी बयान में चसाद की घटना पर दुख जताया। उन्होंने सेइखोहाओ हाओकिप की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए घायलों और विस्थापित परिवारों के प्रति चिंता जताई। उन्होंने घरों को जलाए जाने को अस्वीकार्य अपराध बताया।
घटना को लेकर राज्य सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में हिंसा के कारणों और अलग-अलग पक्षों की भूमिका को लेकर जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फरवरी से कई जिलों में फैल रहा संघर्ष
मणिपुर में कुकी और नगा समुदायों के बीच तनाव की घटनाएं पिछले कई महीनों से सामने आ रही हैं। पहले यह संघर्ष मुख्य रूप से उखरुल जिले तक सीमित बताया जा रहा था, लेकिन अब कामजोंग, सेनापति, तामेंगलांग और अन्य जिलों में भी हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं।
दोनों समुदायों की ओर से एक-दूसरे पर उग्रवादियों को संरक्षण देने और क्षेत्र में वर्चस्व स्थापित करने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। फरवरी में हिंसा दोबारा शुरू होने के बाद उखरुल, कामजोंग, कांगपोकपी, तामेंगलांग और नोनी सहित कई इलाकों में घटनाएं हुई हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, फरवरी से अब तक 50 से अधिक आम नागरिकों की मौत हो चुकी है। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए गए हैं।
लगातार हो रही घटनाओं से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और विस्थापन की समस्या गंभीर बनी हुई है। घरों में आगजनी और गोलीबारी के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है। स्थानीय संगठनों की मांग है कि संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए और नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
पहले भी जातीय हिंसा में हुई थीं सैकड़ों मौतें
मणिपुर (KUKI) इससे पहले भी बड़े पैमाने पर जातीय हिंसा का सामना कर चुका है। मैतेई और कुकी समुदायों के बीच मई 2023 में शुरू हुई हिंसा में सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी और हजारों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े थे। उस संघर्ष में घरों, धार्मिक स्थलों और संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा था।
ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर राज्य के संवेदनशील क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा बहाल करने की चुनौती बढ़ा दी है। फिलहाल चसाद गांव में हुई गोलीबारी, आगजनी और जिला मुख्यालय में नागरिकों के घायल होने की घटनाओं को लेकर सभी पक्षों के आरोपों की पुष्टि और हिंसा की वजहों का स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है। स्थानीय लोगों को राहत और सुरक्षा उपलब्ध कराना भी प्रशासन के सामने तत्काल चुनौती है।



