नवरात्र में शाकाहारी परिवार ने मंगवाई पनीर बिरयानी, पैकेट में निकले चिकन के टुकड़े
बिलासपुर में Zomato से 445 रुपए में किया था ऑर्डर; बेटी ने खाना-पीना छोड़ा, परिवार ने होटल ग्रैंड गुलमोहर का लाइसेंस रद्द करने की मांग की

बिलासपुर। नवरात्र के दौरान शुद्ध शाकाहारी भोजन (vegetarian family) की उम्मीद में ऑनलाइन पनीर टिक्का बिरयानी मंगवाने वाले एक परिवार को चौंकाने वाला अनुभव हुआ। परिवार का आरोप है कि Zomato के जरिए होटल ग्रैंड गुलमोहर से मंगवाई गई बिरयानी में पनीर की जगह चिकन के टुकड़े निकले।
खाना खाते समय चावल के बीच मांस के टुकड़े दिखाई देने पर परिवार के सदस्य हैरान रह गए। परिजनों का कहना है कि उनका पूरा परिवार शाकाहारी है और उनकी बेटी ने जीवन में कभी मांसाहार नहीं किया। घटना के बाद से वह मानसिक रूप से परेशान है और उसने खाना-पीना छोड़ दिया है। परिवार ने इसे महज ऑर्डर की गलती नहीं, बल्कि अपनी धार्मिक भावनाओं और खानपान की मान्यताओं से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए होटल का लाइसेंस रद्द करने की मांग की है।
परिवार के मुताबिक, शिकायत के बाद होटल प्रबंधन ने गलती के लिए माफी मांगी। हालांकि, होटल के मैनेजर ने कथित तौर पर इस चूक के लिए डिलीवरी बॉय को जिम्मेदार बताया है। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि गलत बिरयानी होटल में ही पैक की गई थी या डिलीवरी के दौरान ऑर्डर की अदला-बदली हुई। मामले में जिम्मेदारी तय करने के लिए होटल और डिलीवरी से जुड़े तथ्यों की जांच जरूरी है।
445 रुपए में मंगवाई थी पनीर टिक्का बिरयानी
जानकारी के अनुसार, बिलासपुर निवासी प्रज्ञा बैसवाड़े ने शनिवार (vegetarian family) दोपहर करीब 2 बजकर 48 मिनट पर Zomato के माध्यम से होटल ग्रैंड गुलमोहर से पनीर टिक्का बिरयानी का ऑर्डर किया था। इसकी कुल कीमत 445 रुपए बताई गई है। परिवार ने शाकाहारी भोजन समझकर ऑर्डर दिया था। लेकिन घर पहुंचे खाने को परोसने और खाने के दौरान चावल के बीच चिकन के टुकड़े दिखाई देने का आरोप लगाया गया है।
परिवार का कहना है कि उन्होंने स्पष्ट रूप से पनीर टिक्का बिरयानी मंगवाई थी। ऐसे में मांसाहारी भोजन पहुंचना गंभीर लापरवाही है। खासकर नवरात्र के दौरान, जब कई लोग धार्मिक आस्था के चलते खानपान को लेकर विशेष सावधानी बरतते हैं, इस तरह की घटना ने परिवार को आहत किया है।
बेटी ने जीवन में कभी नहीं खाया मांसाहार
युवती के पिता के मुताबिक, उनके परिवार के सभी सदस्य शुद्ध शाकाहारी हैं। उनकी बेटी ने कभी मांसाहारी भोजन नहीं किया। ऐसे में बिरयानी में चिकन के टुकड़े मिलने की घटना से वह बेहद परेशान हो गई। पिता का दावा है कि इसके बाद से बेटी ने खाना-पीना छोड़ दिया है।
परिवार इस घटना को केवल गलत खाद्य सामग्री की डिलीवरी के तौर पर नहीं देख रहा। उसका कहना है कि भोजन की पसंद और धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करना जरूरी है। ग्राहक जब शाकाहारी भोजन का ऑर्डर देता है, तो उसे वही भोजन उपलब्ध कराया जाना चाहिए। गलत ऑर्डर मिलने से न केवल ग्राहक का भरोसा टूटता है, बल्कि उसके लिए मानसिक परेशानी भी पैदा हो सकती है।
बिल और ऑर्डर से जुड़े साक्ष्य सुरक्षित रखे
परिजनों का कहना है कि उन्होंने ऑनलाइन ऑर्डर, भुगतान और भोजन से संबंधित साक्ष्य सुरक्षित रखे हैं। इनके जरिए वे यह दिखा सकते हैं कि उन्होंने पनीर टिक्का बिरयानी ही मंगवाई थी। परिवार ने होटल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऑर्डर लेने से लेकर खाना तैयार करने, पैक करने और ग्राहक तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में सावधानी बरतना जरूरी है।
परिवार का मानना है कि शाकाहारी और मांसाहारी भोजन की पहचान स्पष्ट होनी चाहिए। पैकिंग के दौरान ऑर्डर का नाम और उसकी सामग्री जांची जानी चाहिए, ताकि किसी ग्राहक तक गलत भोजन न पहुंचे। परिजनों ने होटल की रसोई और पैकिंग व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
होटल का लाइसेंस रद्द करने की मांग
घटना से नाराज परिवार ने होटल ग्रैंड गुलमोहर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। परिजनों का कहना है कि ऐसी लापरवाही को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और होटल का लाइसेंस रद्द करने पर विचार होना चाहिए। उनका तर्क है कि खाद्य प्रतिष्ठानों की जिम्मेदारी केवल भोजन तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सही ऑर्डर सही ग्राहक तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
हालांकि, होटल का लाइसेंस रद्द करने की मांग पर किसी आधिकारिक कार्रवाई या जांच के निष्कर्ष की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी अभी नहीं हुई है।
होटल ने मांगी माफी, डिलीवरी बॉय पर डाली जिम्मेदारी
परिवार के अनुसार, शिकायत मिलने पर होटल प्रबंधन ने गलती के लिए माफी मांगी। वहीं, होटल के मैनेजर ने कथित तौर पर डिलीवरी बॉय की चूक को इसकी वजह बताया। लेकिन उपलब्ध जानकारी से यह साफ नहीं है कि बिरयानी होटल में गलत पैक हुई थी या रास्ते में किसी दूसरे ऑर्डर से बदल गई।
इस मामले में Zomato की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया और किसी आधिकारिक जांच के निष्कर्ष की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में फिलहाल किसी एक पक्ष की गलती तय करना संभव नहीं है। ऑर्डर की जानकारी, पैकिंग और डिलीवरी से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चूक कहां हुई।
ऑनलाइन फूड डिलीवरी की व्यवस्था पर सवाल
इस घटना ने ऑनलाइन भोजन की डिलीवरी में ऑर्डर (vegetarian family) की पहचान और पैकिंग की जांच को लेकर सवाल खड़े किए हैं। ग्राहक ऐप पर अपनी पसंद का भोजन चुनता है और उसी के अनुसार भुगतान करता है। ऐसे में रेस्तरां की जिम्मेदारी है कि पैकेट भेजने से पहले ऑर्डर की सही पहचान और सामग्री की जांच करे। डिलीवरी के दौरान भी यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सही पैकेट संबंधित ग्राहक तक पहुंचे।
शाकाहारी और मांसाहारी भोजन के ऑर्डर में विशेष सावधानी जरूरी है, क्योंकि कई ग्राहक धार्मिक, व्यक्तिगत या खानपान संबंधी कारणों से मांसाहार से पूरी तरह परहेज करते हैं। बिलासपुर के इस मामले में परिवार कार्रवाई की मांग कर रहा है। अब यह देखना होगा कि शिकायत पर संबंधित पक्ष क्या कदम उठाते हैं और गलत बिरयानी पहुंचने के पीछे वास्तविक चूक किस स्तर पर हुई।



