दिल्ली में संजय निषाद का शक्ति प्रदर्शन, SC आरक्षण के साथ 2027 चुनाव में BJP से ज्यादा सीटों पर नजर

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले निषाद पार्टी के अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री संजय निषाद ने अपनी राजनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। बुधवार को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में निषाद समाज का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य मछुआरा समुदाय की उपजातियों को अनुसूचित जाति (SC) में शामिल करने की मांग उठाना है। हालांकि, इस आयोजन को आगामी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) से ज्यादा सीटें हासिल करने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
आरक्षण की मांग के साथ समाज को एकजुट करने की कोशिश
संजय निषाद लंबे समय से निषाद समाज को अनुसूचित जाति का दर्जा देने की मांग उठाते रहे हैं। निषाद पार्टी की मांग है कि निषाद, मल्लाह, केवट, बिंद, कश्यप और नदी से जुड़े अन्य समुदायों को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। पार्टी इस कार्यक्रम के जरिए समाज के लोगों को एक मंच पर लाकर अपनी मांग को मजबूत करना चाहती है।
संजय निषाद का कहना है कि बीजेपी के साथ गठबंधन में रहने के बावजूद वह अपने समाज के अधिकारों की लड़ाई जारी रखेंगे। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम को कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और समुदाय की राजनीतिक ताकत दिखाने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।
2027 चुनाव में ज्यादा सीटें चाहती है निषाद पार्टी
निषाद पार्टी बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा है। पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में पहले के मुकाबले ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में निषाद पार्टी को 16 सीटें मिली थीं। इनमें 10 उम्मीदवार पार्टी के चुनाव चिह्न पर और 6 उम्मीदवार बीजेपी के चुनाव चिह्न पर मैदान में उतरे थे। दोनों दलों के चुनाव चिह्न पर लड़ने वाले कुल 11 उम्मीदवार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।
अब संजय निषाद उन सीटों पर अपनी पार्टी की दावेदारी मजबूत करना चाहते हैं, जहां निषाद समाज के वोट निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। उनका मानना है कि जिन क्षेत्रों में बीजेपी को पहले हार का सामना करना पड़ा है और निषाद समुदाय की अच्छी आबादी है, वहां निषाद पार्टी को अधिक अवसर मिलना चाहिए।
यूपी की 160 सीटों पर निषाद वोट का प्रभाव होने का दावा
निषाद समुदाय की मौजूदगी गोरखपुर, गाजीपुर, बलिया, मऊ, संतकबीरनगर, मिर्जापुर, वाराणसी, प्रयागराज, देवरिया और कुशीनगर समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में है। निषाद समाज के नेताओं का दावा है कि प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से करीब 160 सीटों पर समुदाय का प्रभाव है। इनमें 50 से 80 सीटें ऐसी बताई जाती हैं, जहां निषाद वोट चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।
मल्लाह समाज की आबादी करीब 5 से 6 प्रतिशत मानी जाती है, जबकि निषाद, केवट, बिंद, कश्यप, साहनी और अन्य संबंधित समुदायों को मिलाकर इनकी कुल आबादी करीब 9 प्रतिशत तक होने का दावा किया जाता है। ये आंकड़े अलग-अलग राजनीतिक अनुमानों पर आधारित हैं।
NDA में रहकर राजनीतिक हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति
दिल्ली के कार्यक्रम में NDA के सहयोगी नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है। इससे संजय निषाद गठबंधन में रहते हुए अपनी राजनीतिक अहमियत और हिस्सेदारी बढ़ाने का संदेश देना चाहते हैं। फिलहाल पार्टी ने NDA के साथ रहने की बात कही है, लेकिन 2027 के चुनाव में ज्यादा सीटों की मांग भी बरकरार रखी है।
अब इस कार्यक्रम में जुटने वाली भीड़, सहयोगी दलों के नेताओं की भागीदारी और आरक्षण की मांग पर होने वाली चर्चा को आगामी चुनाव की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



