हादसे में गंवाया दाहिना हाथ, हौसले से जीता गोल्ड मेडल; दिलीप गावित ने एशियाई पैरा खेलों में रचा इतिहास

रायपुर। कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों, तो मुश्किल से मुश्किल हालात भी इंसान की राह नहीं रोक सकते। महाराष्ट्र के पैरा एथलीट दिलीप गावित ने इस बात को सच कर दिखाया है। बचपन में एक दुर्घटना में अपना दाहिना हाथ गंवाने वाले दिलीप ने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर एशियाई पैरा खेलों में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है।
जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में दिलीप गावित ने पुरुषों की 100 मीटर T47 स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने 10.69 सेकेंड में रेस पूरी की। भारत के ही मोहम्मद मोरसिंगनाकाथ ने 10.72 सेकेंड के समय के साथ रजत पदक हासिल किया, जबकि चीन के खिलाड़ी को कांस्य पदक मिला।
पांच साल की उम्र में गंवाया दाहिना हाथ
दिलीप गावित का जन्म 21 अप्रैल 2003 को महाराष्ट्र के नासिक के पास स्थित तोरण डोंगरी गांव में एक आदिवासी परिवार में हुआ था। जब वह महज पांच साल के थे, तब पेड़ से गिरने के कारण उनके दाहिने हाथ में गंभीर चोट लग गई। गांव में समय पर उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के कारण घाव में गैंग्रीन हो गया। आखिरकार, उनकी कोहनी के नीचे से हाथ काटना पड़ा।
इस हादसे ने दिलीप की जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार खेती पर निर्भर था और बारिश कम होने पर परिवार के सदस्यों को मजदूरी भी करनी पड़ती थी। शारीरिक परेशानी और आर्थिक चुनौतियों के बीच दिलीप के लिए आगे बढ़ना आसान नहीं था।
स्कूल के कोच ने पहचानी प्रतिभा
दिलीप की जिंदगी में उनके स्कूल के कोच वैजनाथ काले ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने दिलीप की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें बेहतर प्रशिक्षण दिलाने के लिए नासिक लेकर गए। शुरुआती दिनों में कोच ने उनके रहने और खाने का खर्च भी उठाया। दिलीप ने सामान्य खिलाड़ियों के साथ अभ्यास करते हुए अपनी गति और क्षमता को लगातार बेहतर बनाया।
कांस्य से गोल्ड तक का सफर
दिलीप की मेहनत का परिणाम 2019 में देखने को मिला, जब उन्होंने खेलो इंडिया यूथ गेम्स में 4×400 मीटर रिले टीम के साथ कांस्य पदक जीता। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2023 के एशियाई पैरा खेलों में उन्होंने 400 मीटर स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया था।
अब 100 मीटर T47 स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर दिलीप ने एक बार फिर साबित कर दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ संकल्प और निरंतर मेहनत से सफलता हासिल की जा सकती है।
दिलीप गावित की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन की ताकत का उदाहरण है। बचपन में एक दुर्घटना के कारण उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय खेल को अपनी पहचान बनाया और आज देश के लिए गौरव का प्रतीक बन गए हैं।



