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रायपुर में बिना बताए कट रहे ई-चालान! ऐप पर खुला हजारों के जुर्माने का राज, वाहन मालिकों को लगा झटका

रायपुर-छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ई-चालान को लेकर वाहन मालिकों की परेशानी बढ़ रही है। कई लोगों का दावा है कि मोबाइल पर मैसेज या घर पर नोटिस मिले बिना ही उनकी गाड़ियों पर हजारों रुपये के चालान पेंडिंग हैं। परिवहन विभाग के ऐप पर स्टेटस चेक करने के बाद उन्हें बकाया जुर्माने की जानकारी मिल रही है। वहीं, RTI से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से अगस्त 2026 तक रायपुर कमिश्नरेट क्षेत्र में 8.94 करोड़ रुपये से अधिक के समन शुल्क जारी किए गए।

रायपुर में ई-चालान की जानकारी नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी

राजधानी रायपुर की सड़कों पर यातायात नियमों के उल्लंघन पर नजर रखने के लिए ITMS कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन कैमरों के माध्यम से नियम तोड़ने वाले वाहनों की पहचान कर ई-चालान की कार्रवाई की जाती है। इसका उद्देश्य यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पारदर्शी तरीके से कार्रवाई करना है।

हालांकि, अब कुछ वाहन मालिकों ने शिकायत की है कि उनके वाहनों पर चालान दर्ज होने के बावजूद उन्हें समय पर इसकी जानकारी नहीं मिल रही है। न तो मोबाइल पर मैसेज आ रहा है और न ही घर पर कोई नोटिस मिलने का दावा किया जा रहा है।

ऐसे में वाहन मालिकों को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता कि उनकी गाड़ी पर कोई चालान लंबित है। बाद में जब वे परिवहन विभाग के मोबाइल ऐप पर अपने वाहन का स्टेटस चेक करते हैं, तब उन्हें बकाया जुर्माने की जानकारी मिलती है। कुछ मामलों में चालान की कुल राशि 20 हजार रुपये तक होने का दावा भी सामने आया है।

ऐप पर दिखा 10,300 रुपये का चालान, नहीं मिला मैसेज

पुरानी बस्ती के बंधवापारा निवासी शशांक शर्मा ने अपनी कार पर चालान दर्ज होने की जानकारी साझा की है। उनके मुताबिक, उनकी कार पर कुल 10,300 रुपये के तीन चालान पेंडिंग दिखाई दे रहे हैं।

शशांक का कहना है कि उन्हें पहले इन चालानों की जानकारी नहीं थी। उनके मोबाइल पर कोई मैसेज नहीं आया था। जब उन्होंने परिवहन विभाग के ऐप पर अपनी गाड़ी का स्टेटस चेक किया, तब उन्हें बकाया चालान के बारे में पता चला।

इस मामले ने ई-चालान की सूचना वाहन मालिकों तक पहुंचाने की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। यदि वाहन चालक को समय पर जानकारी नहीं मिलती, तो उसके लिए चालान की स्थिति समझना और समय रहते जरूरी कार्रवाई करना मुश्किल हो सकता है।

पांच चालान के साथ 4,900 रुपये का जुर्माना

इसी तरह न्यू राजेंद्र नगर निवासी विवेक डागा ने भी अपनी कार पर चालान लंबित होने की बात कही है। उनके अनुसार, उन्हें पहले इसकी जानकारी नहीं थी। ऐप पर स्टेटस चेक करने के बाद पता चला कि उनकी कार पर कुल 4,900 रुपये के पांच चालान दिखाई दे रहे हैं।

इन मामलों से स्पष्ट है कि वाहन मालिकों के बीच ई-चालान की सूचना समय पर मिलने को लेकर चिंता बढ़ रही है। हालांकि, इन शिकायतों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी मामलों में विभाग की ओर से सूचना भेजने में ही चूक हुई है। संबंधित चालानों और सूचना भेजे जाने के रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

आठ महीने में 8.94 करोड़ रुपये से अधिक के समन शुल्क

ई-चालान की कार्रवाई के बीच रायपुर कमिश्नरेट से जुड़े आंकड़े भी सामने आए हैं। RTI से मिली जानकारी के मुताबिक, जनवरी से अगस्त 2026 तक आठ महीनों में कुल 8 करोड़ 94 लाख 32 हजार 350 रुपये के समन शुल्क का आंकड़ा दर्ज किया गया है।

महीनेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो मार्च में सबसे ज्यादा 1 करोड़ 93 लाख 94 हजार 500 रुपये के समन शुल्क दर्ज किए गए। इसके बाद मई में 1 करोड़ 75 लाख 42 हजार 50 रुपये और अप्रैल में 1 करोड़ 52 लाख 500 रुपये का आंकड़ा सामने आया।

महीनेवार आंकड़े इस प्रकार हैं:

जनवरी: 1 करोड़ 8 लाख 41 हजार 200 रुपये

फरवरी: 95 लाख 36 हजार 900 रुपये

मार्च: 1 करोड़ 93 लाख 94 हजार 500 रुपये

अप्रैल: 1 करोड़ 52 लाख 500 रुपये

मई: 1 करोड़ 75 लाख 42 हजार 50 रुपये

जून: 44 लाख 47 हजार 600 रुपये

जुलाई: 63 लाख 77 हजार 700 रुपये

अगस्त: 60 लाख 91 हजार 900 रुपये

कुल राशि: 8 करोड़ 94 लाख 32 हजार 350 रुपये।

यह आंकड़ा रायपुर कमिश्नरेट क्षेत्र में ई-चालान से संबंधित समन शुल्क का है। इसे वाहन मालिकों की शिकायतों से जोड़कर देखने के बजाय चालान की कार्रवाई और सूचना पहुंचाने की व्यवस्था को अलग-अलग समझना जरूरी है।

ई-चालान के मामले में क्या हैं जरूरी नियम?

लंबित ई-चालान को नजरअंदाज करना वाहन मालिकों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। लागू नियमों और चालान की स्थिति के अनुसार, समय पर निपटारा नहीं होने पर मामला आगे की कार्रवाई के लिए भेजा जा सकता है।

  1. चालान के निपटारे की समय-सीमा: केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के नियम 167 के तहत चालान के निपटारे और संबंधित प्रक्रिया के प्रावधान हैं। वाहन मालिकों को चालान की स्थिति देखकर निर्धारित समय-सीमा और भुगतान संबंधी निर्देशों की पुष्टि करनी चाहिए।
  2. वाहन और लाइसेंस से जुड़े काम: कुछ परिस्थितियों में लंबित चालान वाहन के रजिस्ट्रेशन या ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं। यह संबंधित नियमों और मामले की स्थिति पर निर्भर करता है।
  3. कोर्ट में जा सकता है मामला: नियमानुसार कुछ चालान वर्चुअल कोर्ट या संबंधित न्यायालय में भेजे जा सकते हैं। ऐसे मामलों में आगे की प्रक्रिया और निपटारा न्यायालय के निर्देशों के अनुसार होता है।
परिवहन विभाग ने क्या कहा?

परिवहन विभाग के अपर आयुक्त डी. रविशंकर के मुताबिक, कई बार वाहन मालिकों का मोबाइल नंबर या घर का पता बदल जाने के कारण चालान से संबंधित सूचना उन तक नहीं पहुंच पाती। उन्होंने कहा है कि सामने आए मामले की जांच कराई जाएगी।

उन्होंने वाहन मालिकों को सलाह दी है कि चालान की पुष्टि के लिए नजदीकी ट्रैफिक थाने में संपर्क करें। इससे वाहन मालिक अपने वाहन पर दर्ज चालान की स्थिति की जानकारी ले सकते हैं और जरूरत के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकते हैं।

वाहन मालिक क्या करें?

यदि आपकी गाड़ी पर चालान दर्ज होने की जानकारी नहीं मिली है, तो समय-समय पर अपने वाहन का स्टेटस चेक करना उपयोगी हो सकता है। इसके लिए परिवहन विभाग के आधिकारिक ऐप या ई-चालान पोर्टल का इस्तेमाल करें। चालान दिखाई देने पर उसकी तारीख, राशि और उल्लंघन से संबंधित विवरण की जांच करें।

यदि चालान गलत लगता है या उसकी सूचना नहीं मिली है, तो संबंधित ट्रैफिक थाने या अधिकृत विभागीय माध्यम से जानकारी लें। साथ ही, वाहन से जुड़े दस्तावेजों में मोबाइल नंबर और पते की जानकारी सही रखना भी जरूरी है।

फिलहाल, रायपुर में सामने आए मामलों ने ई-चालान की सूचना प्रणाली को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि परिवहन विभाग की जांच में क्या सामने आता है और वाहन मालिकों तक चालान की जानकारी समय पर पहुंचाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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Shruti Jangde

With over 6 years of experience in the media industry, I specialize in news anchoring, copywriting, and digital journalism. I cover a wide range of news, delivering accurate, unbiased, and fact-based reporting. Passionate about bringing the truth to the public, I am committed to ethical journalism and credible storytelling. My goal is to inform, inspire, and make a meaningful impact through responsible reporting.

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