दिवाली तक प्रदर्शन नहीं करेगी CJP, अभिजीत दिपके की समर्थकों से अपील- परिवार के साथ रहें, जेल में बंद सौरव और आशुतोष को न भूलें

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिवाली तक कोई प्रदर्शन आयोजित नहीं करने का ऐलान किया है। उन्होंने आंदोलन में शामिल समर्थकों से अपील की कि वे त्योहार के दौरान अपने परिवार के साथ समय बिताएं। साथ ही उन्होंने जेल में बंद पार्टी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को याद रखने की भावुक अपील की। दिपके ने दोनों को अपना भाई और परिवार का हिस्सा बताते हुए कहा कि उनकी गिरफ्तारी का उन पर गहरा भावनात्मक असर पड़ा है।
दिपके बोले- सौरव और आशुतोष ही आंदोलन के असली नेता
अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि पिछले कुछ दिनों से प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर और अपनी निजी जिंदगी में काफी संघर्ष किया है। इस आंदोलन का असर उनके परिवारों पर भी पड़ा है। इसलिए उन्होंने समर्थकों से कुछ दिनों तक अपने परिवार के साथ समय बिताने की अपील की।
दिपके ने कहा कि जब समर्थक अपने परिजनों के साथ दिवाली मनाएं, तो सौरव दास और आशुतोष रांका को भी याद रखें, क्योंकि वे इस समय अपने परिवारों से दूर जेल में हैं। उन्होंने दोनों नेताओं को अपना भाई बताते हुए कहा कि वे उनकी चिंता करते हैं और इस वजह से भावुक हैं।
दिपके के मुताबिक, आंदोलन को आगे बढ़ाने में सौरव और आशुतोष की सबसे अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि दोनों की निर्णय लेने की क्षमता उनसे बेहतर है और वे उनके निर्देशों का पालन करते रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि तीनों का एक व्हाट्सऐप ग्रुप था, जहां वे मीम्स साझा करते थे। अब भी उस ग्रुप को खोलने पर उन्हें ऐसा महसूस होता है, जैसे दोनों नेता वहीं मौजूद हों।
सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत बढ़ी
सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की कोशिश के मामले में गिरफ्तार किया गया था। दोनों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। 19 अक्टूबर को दिल्ली की मजिस्ट्रेट अदालत ने उनकी हिरासत दो दिन के लिए और बढ़ा दी थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दोनों ने कानून के प्रति सम्मान नहीं दिखाया।
CJP और उसके समर्थक मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहा है। 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद अगले दिन CJP के कार्यकर्ता वहां पहुंचे थे, जिसके बाद दोनों नेताओं को गिरफ्तार किया गया।
दिपके ने आंदोलन की तुलना हिंसक प्रदर्शनों से करने पर जताई आपत्ति
दिपके ने CJP के आंदोलन की तुलना फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश में हुए प्रदर्शनों से किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका ने महात्मा गांधी के सत्याग्रह के रास्ते पर चलते हुए शांति और अहिंसा को चुना।
उन्होंने दावा किया कि जेल जाने के बावजूद दोनों नेताओं ने गुस्से और नफरत के बजाय करुणा का रास्ता अपनाया। दिपके ने उम्मीद जताई कि जेल से बाहर आने के बाद भी सौरव और आशुतोष शांति और अहिंसा के रास्ते पर चलकर आंदोलन जारी रखेंगे।



