दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान 19 मौतें: कहीं करंट तो कहीं सड़क हादसे ने छीनी जिंदगी, गोरखपुर में तीन भाइयों की मौत

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन और दशहरा मेले के दौरान हुए अलग-अलग हादसों ( HADSA) में 19 लोगों की मौत हो गई।
कहीं नदी और तालाब में डूबने से लोगों की जान चली गई, तो कहीं सड़क हादसे और बिजली के करंट ने खुशियां मातम में बदल दीं। सबसे दर्दनाक घटना गोरखपुर में हुई, जहां दुर्गा प्रतिमा लेकर जा रही ट्रैक्टर-ट्रॉली हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गई। हादसे में दो सगे भाइयों और उनके मौसेरे भाई की मौत हो गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में हुए हादसों में 11 लोगों की डूबने से, पांच लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में और तीन लोगों की करंट लगने से जान गई। हादसों के बाद कई परिवारों में शोक का माहौल है। अलग-अलग घटनाओं में कई लोग घायल भी हुए हैं, जिनका अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
गोरखपुर में हाईटेंशन लाइन की चपेट में आई ट्रैक्टर-ट्रॉली
गोरखपुर के जंगल अयोध्या प्रसाद इलाके में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए ले जाई जा रही ट्रैक्टर-ट्रॉली हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आ गई। इससे प्रतिमा में करंट उतर आया और तीन युवकों की मौत हो गई।
मृतकों की पहचान 17 वर्षीय लकी, 18 वर्षीय विक्की और 21 वर्षीय चंदन के रूप में हुई है। इनमें लकी और विक्की सगे भाई थे, जबकि चंदन उनका मौसेरा भाई था। त्योहार के दौरान हुए इस हादसे से इलाके में शोक फैल गया।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई। आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर हंगामा किया। मामले में कार्रवाई करते हुए विसर्जन यात्रा में ड्यूटी पर तैनात दो सिपाहियों और बिजली निगम के एक जूनियर इंजीनियर (जेई) को निलंबित कर दिया गया। वहीं, दो लाइनमैनों को बर्खास्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।
गोंडा और सोनभद्र में सड़क हादसों में पांच की मौत
गोंडा जिले के वजीरगंज में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन से लौट रहे लोगों की ट्रैक्टर-ट्रॉली ट्रक से टकरा ( HADSA) गई। हादसे में कई लोग घायल हुए। घायलों में शामिल संजय कोरी और आशीष गौतम ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। दुर्घटना में आठ अन्य लोग घायल हुए हैं, जिनका उपचार किया जा रहा है।
वहीं, सोनभद्र जिले में रेणुकूट-बीजपुर रोड पर दशहरा मेले में जा रहे लोगों से भरा टेंपो एक कार से टकरा गया। हादसे में 12 वर्षीय अंकुश, 23 वर्षीय अंजलि और 30 वर्षीय सुनील की इलाज के दौरान मौत हो गई। दुर्घटना में 16 लोग घायल हुए हैं।
दोनों घटनाओं में त्योहार के दौरान सड़क सुरक्षा और वाहनों में क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने जैसे सवाल भी उठते हैं। हालांकि, इन हादसों के कारणों की विस्तृत पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
नदी और तालाब में डूबने से 11 लोगों की मौत
प्रदेश के अलग-अलग जिलों में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान नदी और तालाब में डूबने से 11 लोगों की जान चली गई। विसर्जन के समय पानी की गहराई, तेज बहाव और सुरक्षा इंतजामों की कमी कई बार जानलेवा साबित हो सकती है।
प्रयागराज में चाचा-भतीजे की मौत
प्रयागराज जिले के कौंधियारा क्षेत्र में दीवान का पूरा निवासी 22 वर्षीय अमित और उनका 20 वर्षीय भतीजा राहुल टोंस नदी में डूब गए। दोनों की मौत हो गई। एक ही परिवार के दो सदस्यों की मौत से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
गोंडा में चार लोगों की डूबने से मौत
गोंडा जिले में डूबने की अलग-अलग घटनाओं में चार लोगों की जान चली गई। तरबगंज क्षेत्र में लक्ष्मणपुर के पास टेढ़ी नदी में डूबने से भैरमपुर निवासी 20 वर्षीय सुमित, 18 वर्षीय अभिषेक तिवारी और 20 वर्षीय रामविलास की मौत हो गई।
वहीं, धानेपुर क्षेत्र के भैसहवा घाट पर कुआनो नदी में डूबने से शिवबक्शपुरवा निवासी तुलाराम शुक्ला की मौत हो गई।
बाराबंकी में तालाब में डूबा युवक
बाराबंकी जिले के फतेहपुर क्षेत्र के नंदरासी में तालाब में उतरे निजामपुर निवासी 40 वर्षीय अंबर प्रसाद डूब गए। ग्रामीणों ने उन्हें बाहर निकालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
फतेहपुर में चार लोगों की जान गई
फतेहपुर जिले के खागा क्षेत्र के कुशियारीपुर में तालाब में डूबने से 20 वर्षीय आदित्य, 18 वर्षीय राजा और 16 वर्षीय अभिमन्यु की मौत हो गई। वहीं, जहानाबाद क्षेत्र में तेजानगर के पास रिंद नदी में डूबने से कुशियारीपुर निवासी अभिषेक की जान ( HADSA) चली गई।
त्योहारों पर सुरक्षा इंतजामों की जरूरत
दुर्गा प्रतिमा विसर्जन और दशहरा मेले जैसे आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। ऐसे में बिजली की लाइनों से सुरक्षित दूरी, ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण, नदी-तालाबों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन सहायता बेहद जरूरी है।
उत्तर प्रदेश में हुए इन हादसों ने एक बार फिर त्योहारों के दौरान सुरक्षा इंतजामों की अहमियत उजागर की है। प्रशासन और आयोजन समितियों के लिए जरूरी है कि विसर्जन मार्गों का पहले से निरीक्षण किया जाए, खतरनाक बिजली लाइनों के आसपास विशेष सावधानी बरती जाए और जलाशयों के पास प्रशिक्षित बचावकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।



