दुनिया में तेजी से बढ़ रहा ड्रग्स का इस्तेमाल, 2024 में 33.1 करोड़ लोगों ने किया नशा; एक दशक में 34% की वृद्धि

नई दिल्ली। दुनिया भर में नशीले पदार्थों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र की ड्रग्स और अपराध से जुड़ी संस्था UNODC की वर्ल्ड ड्रग्स रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, वर्ष 2024 में दुनियाभर में करीब 33.1 करोड़ लोगों ने ड्रग्स का इस्तेमाल किया। पिछले एक दशक में यह संख्या 34 फीसदी बढ़ी है। रिपोर्ट के अनुसार, 15 से 64 वर्ष की उम्र के लोगों में नशीले पदार्थों का सेवन एक गंभीर स्वास्थ्य और सामाजिक चुनौती बनता जा रहा है।
कैनाबिस सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला नशीला पदार्थ
रिपोर्ट के मुताबिक, कैनाबिस दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला नशीला पदार्थ बना हुआ है। वर्ष 2024 में करीब 25.6 करोड़ लोगों ने इसका सेवन किया। इसके अलावा लगभग 6.3 करोड़ लोगों ने ओपिओइड, 3.2 करोड़ ने एम्फेटामाइन, 2.5 करोड़ ने कोकीन और 2.1 करोड़ लोगों ने एक्स्टेसी का इस्तेमाल किया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि बाजार में नशीले पदार्थों के नए प्रकार सामने आ रहे हैं। इनमें कुछ सिंथेटिक ड्रग्स भी शामिल हैं, जिनकी ताकत और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करना मुश्किल हो सकता है।
नशे से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे 6.3 करोड़ लोग
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में दुनिया भर में करीब 6.3 करोड़ लोग ड्रग्स के इस्तेमाल से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे थे। हालांकि, इनमें से बहुत कम लोगों को इलाज मिल पा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, नशे से जुड़ी समस्याओं वाले हर 12 में से केवल एक व्यक्ति को उपचार मिल रहा था।
महिलाओं के लिए इलाज तक पहुंच की स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण रही। नशे से जुड़ी समस्या वाली हर 23 महिलाओं में से केवल एक को इलाज मिला, जबकि पुरुषों में हर नौ में से एक व्यक्ति को उपचार मिल पाया।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वर्ष 2023 में ड्रग्स से जुड़ी समस्याओं के कारण दुनियाभर में लगभग पांच लाख लोगों की मौत हुई, जो एक दशक पहले के मुकाबले 29 फीसदी अधिक थी।
इंजेक्शन से ड्रग्स लेने वालों में संक्रमण का खतरा
वर्ष 2024 में करीब 1.4 करोड़ लोग इंजेक्शन के जरिए नशीले पदार्थों का इस्तेमाल कर रहे थे। इनमें लगभग 69 लाख लोग हेपेटाइटिस C और 17 लाख लोग HIV से संक्रमित थे, जबकि करीब 15 लाख लोग दोनों संक्रमणों से प्रभावित थे।
विशेषज्ञों के अनुसार, नशीले पदार्थों का इस्तेमाल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा परिवार, रोजगार और सामाजिक जीवन पर भी इसका गंभीर असर पड़ सकता है।
कोकीन उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में दुनियाभर में करीब 4,100 टन शुद्ध कोकीन का उत्पादन हुआ। यह आंकड़ा एक दशक पहले के मुकाबले तीन गुने से भी अधिक है। कोकीन के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली कोका की खेती का क्षेत्र भी 2023 की तुलना में दो फीसदी बढ़कर 3,85,100 हेक्टेयर हो गया।
वहीं, वर्ष 2025 में अफीम की खेती करीब 1,13,800 हेक्टेयर क्षेत्र में हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में पांच फीसदी अधिक थी।
नए सिंथेटिक ड्रग्स बढ़ा रहे चिंता
रिपोर्ट में नए साइकोएक्टिव पदार्थों (NPS) की बढ़ती संख्या को लेकर भी चिंता जताई गई है। वर्ष 2010 में ऐसे 162 पदार्थों की पहचान हुई थी, जबकि 2024 में दुनिया भर में 755 नए साइकोएक्टिव पदार्थ रिपोर्ट किए गए। इनमें से 118 पदार्थ पहली बार सामने आए थे।
रिपोर्ट के अनुसार, सिंथेटिक ओपिओइड की हिस्सेदारी 2015 के तीन फीसदी से बढ़कर 2024 में 20 फीसदी हो गई, जो इन पदार्थों की बढ़ती मौजूदगी को दर्शाती है।
ड्रग्स की तस्करी और जब्ती के आंकड़े
वर्ष 2024 में दुनिया भर में पुलिस ने 9,033 टन गांजा, 2,439 टन कोकीन, 1,082 टन चरस, 487 टन मेथामफेटामाइन और 51 टन हेरोइन जब्त की। इसी वर्ष ड्रग्स से जुड़े अपराधों के मामलों में करीब 59 लाख लोग पुलिस के संपर्क में आए।
इनमें लगभग 37 लाख लोग नशीले पदार्थ रखने या इस्तेमाल करने से जुड़े मामलों में, जबकि करीब 16 लाख लोग तस्करी के मामलों में शामिल थे।
नशे की लत से बचाव में परिवार और इलाज की अहम भूमिका
नशे की लत के पीछे मानसिक तनाव, कम उम्र में नशे की शुरुआत, नशीले पदार्थों की आसान उपलब्धता, गरीबी और प्रतिकूल सामाजिक परिस्थितियां जैसे कई कारक हो सकते हैं। परिवार का सहयोग, शिक्षा, रोजगार, सुरक्षित वातावरण और समय पर चिकित्सकीय मदद नशे की समस्या से बचाव और उससे उबरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
नशे और अपराध के बीच भी कई तरह के संबंध हो सकते हैं। नशीले पदार्थों के प्रभाव से व्यवहार में बदलाव, दुर्घटनाओं और हिंसा का जोखिम बढ़ सकता है। वहीं, नशे की लत पूरी करने के लिए पैसों की जरूरत कुछ लोगों को अपराध की ओर धकेल सकती है। हालांकि, नशे का सेवन करने वाला हर व्यक्ति अपराध में शामिल नहीं होता।
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि नशीले पदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल से निपटने के लिए रोकथाम, जागरूकता, प्रभावी उपचार और अवैध तस्करी पर नियंत्रण की जरूरत लगातार बढ़ रही है।



