भारतीय नौसेना खरीदेगी मिनी पनडुब्बियां, MARCOS कमांडो की समुद्री अभियानों में बढ़ेगी ताकत

भारतीय नौसेना अपनी विशेष समुद्री अभियान क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए दो मिनी पनडुब्बियों (मिजेट सबमरीन) की खरीद की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके लिए नौसेना ने कई यूरोपीय रक्षा कंपनियों और देश की प्रमुख शिपबिल्डिंग कंपनियों के साथ बातचीत शुरू कर दी है।
‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत प्रस्तावित ये मिनी पनडुब्बियां तटीय क्षेत्रों, द्वीपीय इलाकों और संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में विशेष अभियानों के लिए नौसेना को महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त प्रदान करेंगी। शुरुआती चरण में दो पनडुब्बियों की खरीद की योजना है, जबकि भविष्य में इनकी संख्या पांच या उससे अधिक हो सकती है।
इन पनडुब्बियों का उपयोग नौसेना के विशेष बल MARCOS (मरीन कमांडो) गुप्त अभियान, टोही मिशन और दुश्मन के इलाके में विशेष कार्रवाई के लिए करेंगे। ये पनडुब्बियां स्विमर डिलीवरी व्हीकल (SDV) या स्पेशल ऑपरेशंस वेसल (SOV) के रूप में कार्य करेंगी, जिससे कमांडो समुद्र के भीतर से गुप्त रूप से लक्ष्य तक पहुंचकर मिशन पूरा कर सकेंगे और सुरक्षित लौट सकेंगे।
परियोजना के लिए नौसेना ने मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) से भी चर्चा शुरू की है। MDL ने “अरोवाना” नामक प्रोटोटाइप विकसित किया है, जबकि L&T ने SOV-400 डिजाइन तैयार किया है। इसके अलावा इटली की कंपनियों फिनकैंटियरी और ड्रास समेत कई यूरोपीय विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
मिनी पनडुब्बियां सामान्य युद्धक पनडुब्बियों की तुलना में आकार में छोटी होती हैं। इनका वजन लगभग 150 से 550 टन तक हो सकता है और ये 8 से 20 कमांडो को ले जाने में सक्षम होती हैं। इनमें कम ध्वनि उत्पन्न करने वाली तकनीक, आधुनिक सेंसर और उथले समुद्री क्षेत्रों में संचालन की विशेष क्षमता होती है।
गौरतलब है कि भारत में ऐसी पनडुब्बियों की आवश्यकता 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद महसूस की गई थी। हालांकि 2009 में शुरू हुई खरीद प्रक्रिया तकनीकी और साझेदारी संबंधी कारणों से आगे नहीं बढ़ सकी थी। अब नौसेना इस परियोजना को फिर से आगे बढ़ा रही है, जिससे समुद्री सुरक्षा और विशेष अभियानों की क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि होने की उम्मीद है।

