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होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की तैयारी, फंसे जहाजों के लिए अमेरिका लाएगा ‘वीआईपी पास’ व्यवस्था

ईरान और अमेरिका के बीच हुए अस्थायी समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी बीच अमेरिका ने फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों और तेल टैंकरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एक विशेष ‘वीआईपी पास’ व्यवस्था शुरू करने की योजना बनाई है।

रिपोर्टों के अनुसार, फारस की खाड़ी में करीब 500 जहाज और 200 तेल टैंकर फंसे हुए हैं। अमेरिकी योजना के तहत वीआईपी पास रखने वाले जहाजों को अमेरिकी सैन्य सुरक्षा के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकाला जाएगा। बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र में अमेरिका ने लगभग 10 हजार सैनिक तैनात कर रखे हैं।

वीआईपी पास व्यवस्था क्यों?

पहला कारण:
अमेरिका का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित और सामान्य बनाने में दो महीने से अधिक समय लग सकता है। पेंटागन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि क्षेत्र में बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री मौजूद है, जिसकी सफाई में लंबा समय लग सकता है।

दूसरा कारण:
बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के चलते बीमा कंपनियों ने जहाजों का बीमा महंगा कर दिया है। अमेरिका का दावा है कि वीआईपी पास के जरिए वह जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराएगा, जिससे जहाज मालिकों को राहत मिलेगी।

तीसरा कारण:
अमेरिका क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखना चाहता है ताकि ईरान समझौते की शर्तों का पालन करता रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि समझौते के उल्लंघन की स्थिति में कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

चौथा कारण:
रिपोर्टों के मुताबिक ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की योजना बना सकता है। अमेरिका इस तरह की किसी व्यवस्था का विरोध कर रहा है और चाहता है कि समुद्री व्यापार निर्बाध रूप से जारी रहे।

समझौते में क्या है?

अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय अस्थायी समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का प्रावधान शामिल है। इसके तहत ईरान जलमार्ग को पूरी तरह खोलने पर सहमत हुआ है, जबकि ओमान की खाड़ी में मौजूद अमेरिकी बल भी अपनी नाकाबंदी हटाएंगे।

क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, कतर, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देश इसी मार्ग से निर्यात करते हैं।

यदि जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल जाता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत मिल सकती है और तेल आपूर्ति की स्थिति सामान्य होने की उम्मीद बढ़ेगी।

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