वन विभाग में शत-प्रतिशत लागू होगा ‘ई-ऑफिस’ सिस्टम

रायपुर। छत्तीसगढ़ के वन विभाग की कार्यप्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और गतिशील बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने विभाग में बरसों से चली आ रही ‘मनमर्जी’ और लेटलतीफी पर पूरी तरह नकेल कस दी है। मंत्री कश्यप ने कड़ा रुख अपनाते हुए वन विभाग के सभी कार्यालयों में ‘ई-ऑफिस’ (e-Office) व्यवस्था को शत-प्रतिशत अनिवार्य करने के निर्देश जारी किए हैं।
इस नए आदेश के बाद अब वन विभाग के मुख्यालय से लेकर सुदूर जंगलों में बने फील्ड दफ्तरों तक, फाइलों का सारा कामकाज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ही किया जाएगा। सबसे बड़ा फैसला यह है कि अब विभाग प्रमुख (Head of Department) की लिखित अनुमति के बिना किसी भी स्तर पर ‘फिजिकल’ यानी कागजी फाइलें नहीं चलाई जा सकेंगी।
दफ्तरों के चक्करों और फाइलों के ‘अटकने’ के दिन खत्म
अक्सर देखा जाता है कि सरकारी विभागों में महत्वपूर्ण फाइलें हफ्तों या महीनों तक किसी न किसी टेबल पर दबी रह जाती हैं, जिससे विकास कार्य और आम नागरिकों के मामले लटके रहते हैं। वन विभाग में इसी लेटलतीफी को खत्म करने के लिए मंत्री केदार कश्यप ने साफ कर दिया है कि विभाग के मुख्यालय, वृत्त (Circles), वनमंडल (Divisions) और सभी फील्ड कार्यालयों (Field Offices) में अब कार्यालयीन फाइलों और सरकारी डाक का संचालन अनिवार्य रूप से ई-ऑफिस प्रणाली के जरिए ही होगा।
मंत्री ने कड़े शब्दों में हिदायत दी है कि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी पुरानी कार्यशैली के तहत कागजी फाइलों पर काम नहीं करेगा। सभी को ई-ऑफिस सॉफ्टवेयर के माध्यम से ही अपने दैनिक कार्यों का संपादन और निपटारा करना होगा।
आखिर क्यों जरूरी हुआ यह सख्त कदम?
डिजिटल कार्यप्रणाली को पूरी तरह लागू करने के पीछे शासन की मंशा व्यवस्था को पूरी तरह साफ-सुथरा बनाना है। ई-ऑफिस व्यवस्था अनिवार्य होने से विभाग को कई बड़े फायदे होंगे:
फाइलों के निपटारे में तेजी: क्लिक करते ही फाइल एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी तक पहुंच जाएगी, जिससे समय की भारी बचत होगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही: ई-ऑफिस में यह साफ तौर पर दर्ज रहता है कि कौन सी फाइल किस अधिकारी के पास किस तारीख और समय से लंबित है। इससे किसी भी स्तर पर लापरवाही होने पर जवाबदेही तय करना आसान हो जाएगा।
ऑनलाइन निगरानी (Online Monitoring): वरिष्ठ अधिकारी और खुद मंत्री भी किसी भी फाइल की लाइव स्थिति को ऑनलाइन देख सकेंगे।
कागज की बचत (Eco-friendly): वन विभाग, जो खुद पर्यावरण के संरक्षण का संदेश देता है, कागजों का उपयोग बंद कर पर्यावरण संरक्षण में एक मिसाल पेश करेगा।
मुख्यमंत्री के ‘सुशासन’ के संकल्प को आगे बढ़ाना उद्देश्य
फैसले की जानकारी देते हुए वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में सुशासन, पारदर्शिता और तकनीक आधारित प्रशासन (Technology-driven Governance) को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। वन विभाग में ई-ऑफिस व्यवस्था का पूर्ण क्रियान्वयन इसी दिशा में उठाया गया एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम है।
उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि विभाग की कार्यप्रणाली अधिक तेज, प्रभावी और पूरी तरह डिजिटल बने, ताकि आम जनता और किसानों से जुड़े मामलों का समय सीमा के भीतर निराकरण सुनिश्चित किया जा सके।”
लापरवाही करने वाले अफसरों पर रहेगी नजर
इस आदेश को केवल कागजों (या कंप्यूटरों) तक सीमित न रखकर धरातल पर उतारने के लिए मंत्री ने सीनियर अफसरों को भी जिम्मेदारी सौंपी है। सभी वरिष्ठ अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीनस्थ (Subordinate) कार्यालयों का लगातार निरीक्षण करें। उन्हें नियमित रूप से समीक्षा (Review) करनी होगी कि ई-ऑफिस व्यवस्था का शत-प्रतिशत पालन हो रहा है या नहीं। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी शासन के इन निर्देशों का उल्लंघन करता पाया गया या बिना अनुमति के फिजिकल फाइल चलाता मिला, तो उसके खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।
छत्तीसगढ़ वन विभाग की यह डिजिटल क्रांति आने वाले दिनों में राज्य के अन्य विभागों के लिए भी एक रोल मॉडल साबित हो सकती है, जिससे सरकारी कामकाज में ‘बाबू संस्कृति’ और फाइलों को लटकाए रखने की प्रवृत्ति पर हमेशा के लिए लगाम लग जाएगी।

