रायगढ़ में ‘30 दिन-30 सेवा अभियान’ का तीसरा दिन बेजुबान जानवरों के नाम, अलीशा अंसारी ने बेसहारा कुत्तों को कराया भोजन

रायगढ़। समाजसेवा को निरंतरता और नए उद्देश्य के साथ आगे बढ़ाने के संकल्प के तहत युवा समाजसेविका एवं राष्ट्रपति अवॉर्डी अलीशा अंसारी द्वारा चलाए जा रहे ‘30 दिन-30 अलग-अलग सामाजिक सेवा अभियान’ के तीसरे दिन की सेवा बेजुबान जानवरों के नाम रही।
अभियान के तहत ‘एक निवाला बेजुबान के नाम’ पहल की शुरुआत की गई। इसके माध्यम से अलीशा अंसारी ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में घूम-घूमकर बेसहारा कुत्तों को भोजन कराया।
‘बेजुबान अपनी तकलीफ बता नहीं सकते, लेकिन उन्हें भी भूख-प्यास लगती है’
अलीशा अंसारी ने कहा कि बेजुबान जानवर अपनी जरूरत और तकलीफ शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते, लेकिन उन्हें भी भूख और प्यास लगती है। समाज में अक्सर इंसानों की मदद को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि बेजुबान जीवों की जरूरतें नजरअंदाज हो जाती हैं।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार थोड़ा सा भोजन किसी जरूरतमंद बेजुबान के लिए निकाल दे, तो यह उसके लिए बड़ी मदद साबित हो सकती है।
शहरवासियों से पानी और भोजन रखने की अपील
अलीशा अंसारी ने शहरवासियों से अपील की कि लोग अपने घरों के बाहर एक बर्तन में स्वच्छ पानी और अपनी क्षमता के अनुसार थोड़ा भोजन जरूर रखें। इससे गर्मी, बारिश या किसी भी मौसम में बेसहारा जानवरों को भूखे-प्यासे रहने से बचाया जा सकता है।
जन्माष्टमी से शुरू हुआ 30 दिवसीय सेवा संकल्प
अलीशा अंसारी ने जन्माष्टमी के अवसर पर ‘30 दिन-30 अलग-अलग सामाजिक सेवा अभियान’ का संकल्प लिया है। अभियान के तहत हर दिन समाज के अलग-अलग वर्गों और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सेवा कार्य किए जा रहे हैं।
अभियान के Day-1 में वृद्धाश्रम में निःशुल्क फिजियोथेरेपी शिविर आयोजित किया गया था। वहीं Day-2 में शिक्षक दिवस के अवसर पर ‘शिक्षा मित्र’ कार्यक्रम को पूरे जिले में विस्तार देने की पहल की गई।
अब Day-3 में ‘एक निवाला बेजुबान के नाम’ पहल के जरिए बेसहारा कुत्तों को भोजन कराया गया। अभियान का समन्वय सुश्री आयला अंसारी द्वारा किया जा रहा है। आगामी दिनों में भी विभिन्न सामाजिक सरोकारों से जुड़े सेवा कार्य किए जाने की जानकारी दी गई है।



