मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला : छत्तीसगढ़ को रेलवे की बड़ी सौगात, बिलासपुर-कटनी रेल सेक्शन होगा 4-लेन; 5 राज्यों में बढ़ेगी कनेक्टिविट

रायपुर। रेलवे कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने देश के 7 हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर को 4-लेन करने की योजना को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं से यात्रियों की आवाजाही बेहतर होने के साथ माल परिवहन और कनेक्टिविटी को भी गति मिलने की उम्मीद है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि हाई-डेंसिटी रेलवे रूटों को 4-लेन करने की योजना शुरू हो गई है। इसके तहत करीब 4,000 किलोमीटर रेल नेटवर्क के लिए DPR तैयार की जा रही है।
बिलासपुर-कटनी रेल सेक्शन को भी मंजूरी
इस योजना में बिलासपुर-कटनी रेल सेक्शन को भी 4-लेन करने की मंजूरी दी गई है। बिलासपुर से पेंड्रा और आगे कटनी की ओर कुछ हिस्सों में पहले से तीन रेल लाइनें हैं, जबकि कई हिस्सों में दोहरी लाइन मौजूद है। अब पूरे सेक्शन को चार-लेन रेल नेटवर्क में विकसित करने की दिशा में काम होगा।
5 राज्यों के 14 जिलों को मिलेगा फायदा
बिलासपुर-कटनी समेत संबंधित परियोजनाओं से पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में रेलवे नेटवर्क करीब 656 किलोमीटर तक बढ़ने की जानकारी दी गई है।
इससे अमरकंटक, अचनकमार टाइगर रिजर्व, खुटाघाट बांध, रतनपुर महामाया मंदिर और विराटेश्वर मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।
मुंबई-हावड़ा रूट पर भी बड़ा विस्तार
मुंबई-हावड़ा हाई-डेंसिटी नेटवर्क पर खड़गपुर से झारसुगुड़ा तक चौथी रेल लाइन को मंजूरी दी गई है। इसकी लंबाई करीब 367 किलोमीटर होगी और परियोजना पर लगभग 6,528 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
वहीं अरक्कोनम से रेनिगुंटा के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन के निर्माण को भी मंजूरी मिली है। यह सेक्शन करीब 77 किलोमीटर लंबा होगा और इस पर लगभग 1,936 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
7 हाई-डेंसिटी कॉरिडोर होंगे 4-लेन
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता और कोलकाता-दिल्ली मिलकर गोल्डन क्वाड्रिलैटरल बनाते हैं। इसके अलावा दिल्ली-चेन्नई और मुंबई-कोलकाता जैसे दोनों डायगोनल तथा दिल्ली-गुवाहाटी रूट को भी हाई-डेंसिटी कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है।
इन रूटों को 4-लेन करने से रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी और व्यस्त मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारु होने की उम्मीद है।



