पर्यावरण कानून में जुर्माने के नए नियम पर हाईकोर्ट में सुनवाई, राज्य सरकार से मांगा जवाब

रायपुर: पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 में वर्ष 2023 में हुए संशोधनों के बाद कई पर्यावरणीय उल्लंघनों पर अब आपराधिक केस की जगह आर्थिक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसी व्यवस्था को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दो याचिकाओं पर सुनवाई शुरू हुई है।
रायपुर के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि नए नियमों के अनुसार पर्यावरण कानून, नियम या सरकारी निर्देशों का उल्लंघन करने पर 10 हजार रुपये से लेकर 15 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि उल्लंघन जारी रहता है तो प्रतिदिन अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है। जुर्माना नहीं भरने पर तीन साल तक की सजा या दोगुना जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।
डॉ. गुप्ता ने वर्ष 2023 में शंकर नगर चौक पर गणेशोत्सव के दौरान कथित ध्वनि प्रदूषण और करबला तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य में वेटलैंड नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर अलग-अलग शिकायतें निर्णायक अधिकारी के पास दर्ज कराई थीं।
हालांकि, निर्णायक अधिकारी ने यह कहते हुए दोनों शिकायतें खारिज कर दीं कि जुर्माना लगाने की प्रक्रिया तय नहीं है। इसके बाद इन आदेशों को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाओं पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद संबंधित अधिकारी को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
डॉ. गुप्ता का कहना है कि कानून में जुर्माना लगाने का अधिकार पहले से दिया गया है और केवल नियम नहीं बनने के आधार पर शिकायतों को खारिज करना उचित नहीं है। उनका मानना है कि यदि ऐसा माना गया तो पर्यावरण कानून का प्रभाव कमजोर हो जाएगा और उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करना मुश्किल हो जाएगा।
उनके अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह देश के शुरुआती मामलों में शामिल है, इसलिए हाईकोर्ट का फैसला भविष्य में पर्यावरण कानूनों के पालन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


