आयुष्मान योजना में इलाज जारी, लेकिन इंसेंटिव के इंतजार में स्वास्थ्यकर्मी
300 करोड़ का इंसेंटिव अटका, स्वास्थ्य विभाग से भुगतान की उम्मीद

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आयुष्मान(Ayushman) भारत योजना के तहत मरीजों को लगातार मुफ्त इलाज मिल रहा है, लेकिन इस योजना को जमीन पर लागू करने वाले सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी लंबे समय से अपनी प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) का इंतजार कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि पिछले करीब दो वर्षों से इंसेंटिव का भुगतान नहीं हुआ है, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
आयुष्मान(Ayushman) भारत योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में इलाज करने वाले डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, लैब टेक्नीशियन और अन्य कर्मचारियों को निर्धारित नियमों के अनुसार प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है। यह राशि उन स्वास्थ्यकर्मियों को अतिरिक्त कार्यभार और योजना के प्रभावी संचालन में योगदान के लिए दी जाती है। हालांकि, कर्मचारियों का दावा है कि लंबे समय से यह भुगतान अटका हुआ है।
दो साल से नहीं मिला प्रोत्साहन राशि का भुगतान
जानकारी के अनुसार, प्रदेशभर के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों का 300 करोड़ रुपये से अधिक का इंसेंटिव भुगतान लंबित बताया जा रहा है। इसका असर सिर्फ आर्थिक पक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्मचारियों के मनोबल पर भी पड़ रहा है। कई स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच वे लगातार अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन तय प्रोत्साहन राशि समय पर नहीं मिलने से निराशा बढ़ रही है।
डॉक्टर, नर्स और टेक्नीशियन कर रहे इंतजार
वर्तमान में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में करीब 2,500 से अधिक डॉक्टर, 1,500 से ज्यादा नर्सिंग स्टाफ, 5,000 से अधिक लैब टेक्नीशियन और बड़ी संख्या में अन्य स्वास्थ्यकर्मी आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों के इलाज में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन सभी कर्मचारियों को इंसेंटिव भुगतान का इंतजार है।
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि आयुष्मान(Ayushman) भारत योजना लागू होने के बाद सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्यभार भी पहले की तुलना में काफी बढ़ा है। ऐसे में प्रोत्साहन राशि का समय पर भुगतान कर्मचारियों का मनोबल बनाए रखने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
लंबित भुगतान से स्वास्थ्यकर्मियों में बढ़ रहा असंतोष
इधर, स्वास्थ्यकर्मियों की मांग है कि लंबित भुगतान को जल्द जारी किया जाए, ताकि कर्मचारियों को उनका अधिकार मिल सके। उनका कहना है कि योजना का सफल संचालन केवल वित्तीय संसाधनों से नहीं, बल्कि उसे लागू करने वाले कर्मचारियों के उत्साह और विश्वास पर भी निर्भर करता है।
फिलहाल सभी की निगाहें स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं। यदि लंबित इंसेंटिव का भुगतान जल्द नहीं होता, तो कर्मचारियों की नाराजगी और बढ़ सकती है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और लाखों आयुष्मान(Ayushman) लाभार्थियों को सेवाएं देने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को उनका लंबित प्रोत्साहन कब तक मिल पाता है।

