ग्रामीण विद्यार्थियों तक पहुंचेगी AI और रोबोटिक्स की शिक्षा
ड्रोन और रोबोटिक्स, मोबाइल लैब की शुरुआत

रायपुर | छत्तीसगढ़ के ग्रामीण(Rural) विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने नई पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बुधवार को विधानसभा परिसर से ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ के तहत संचालित निःशुल्क मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह मोबाइल लैब पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न स्कूलों में पहुंचकर विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, ड्रोन, 3डी प्रिंटिंग, कोडिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), एयरोमॉडलिंग और एआर/वीआर जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए ग्रामीण(Rural) क्षेत्रों के बच्चों को भी आधुनिक तकनीक से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल एक मोबाइल लैब नहीं, बल्कि ग्रामीण(Rural) प्रतिभाओं को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने और उनमें वैज्ञानिक सोच विकसित करने का माध्यम बनेगी। उनका कहना था कि गांव और शहर के विद्यार्थियों के बीच तकनीकी अवसरों का अंतर कम करना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया तेजी से डिजिटल और उभरती तकनीकों की ओर बढ़ रही है। ऐसे में जरूरी है कि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी समय रहते इन तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव मिले, ताकि वे भविष्य की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें। उन्होंने नई शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल विद्यार्थियों में नवाचार, कौशल और रचनात्मक सोच विकसित करने में मददगार साबित होगी।
मोबाइल लैब में मिलेगा आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष ने मोबाइल टेक्नोलॉजी लैब का अवलोकन भी किया। प्रशिक्षकों ने उन्हें लैब में उपलब्ध उपकरणों और प्रशिक्षण प्रणाली की जानकारी दी। लैब में विद्यार्थी केवल सैद्धांतिक जानकारी नहीं लेंगे, बल्कि स्वयं ड्रोन उड़ाने, रोबोट संचालित करने, 3डी मॉडल तैयार करने, कोडिंग सीखने और एआई आधारित तकनीकों का प्रयोग करने का अवसर भी मिलेगा।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि विज्ञान और तकनीक के इस दौर में ग्रामीण विद्यार्थियों को भी वही अवसर मिलने चाहिए जो बड़े शहरों के छात्रों को उपलब्ध हैं। उनके अनुसार यह पहल बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें भविष्य के रोजगार और तकनीकी चुनौतियों के लिए भी तैयार करेगी। उन्होंने इस पहल को शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बताया।
पहले वर्ष में 5 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों तक पहुंचेगी तकनीकी शिक्षा
इस परियोजना के तहत पांच प्रशिक्षकों की टीम पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के शासकीय विद्यालयों और सरस्वती शिशु मंदिरों में जाकर तीन से पांच दिन की कार्यशालाएं आयोजित करेगी। प्रशिक्षण पूरा करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र भी दिया जाएगा। पहले चरण में कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि बाद में अन्य कक्षाओं के छात्रों को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा।
सरकार का लक्ष्य पहले वर्ष में पांच हजार से अधिक विद्यार्थियों तक आधुनिक तकनीकी शिक्षा पहुंचाना है। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक भावना बोहरा सहित कई जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को नई तकनीकों से जोड़कर उन्हें भविष्य की संभावनाओं के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

